Chandigarh में नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के एफडीआर और बैंक खातों के मामले में जांच तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस पूरे प्रकरण में अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड तलब किए हैं। मामला वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा होने के कारण प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। सीबीआई ने इस मामले में नगर निगम कमिश्नर को आधिकारिक नोटिस भेजकर सभी संबंधित फाइलें और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वित्तीय लेन-देन में किन स्तरों पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई है। इस जांच के दायरे में कई अधिकारी शामिल हैं, जिनकी भूमिका की गहन समीक्षा की जा रही है। एजेंसी ने विशेष रूप से उन अधिकारियों के रिकॉर्ड मांगे हैं जो इस वित्तीय प्रणाली से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े रहे हैं। सीबीआई ने निलंबित अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा से संबंधित सभी सेवा रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेज भी तलब किए हैं। इसके अलावा स्मार्ट सिटी परियोजना की पूर्व वित्त अधिकारी नलिनी मलिक से जुड़े कागजात भी जांच के लिए मांगे गए हैं। पूर्व जॉइंट कमिश्नर गुरिंदर सिंह सोढ़ी के सेवा विवरण, नियुक्ति आदेश और पोस्टिंग से संबंधित जानकारी भी जांच एजेंसी के रडार पर है। साथ ही उनके हस्ताक्षर और लिखावट के नमूने भी फॉरेंसिक जांच के लिए मांगे गए हैं।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या एफडीआर और बैंक खातों से जुड़े लेन-देन में किसी प्रकार की वित्तीय हेराफेरी या फर्जीवाड़ा किया गया है। इसके लिए संबंधित बैंकिंग रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा अधिकारियों के सहयोगियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों की सूची भी मांगी गई है, ताकि पूरे नेटवर्क की भूमिका को समझा जा सके। सीबीआई हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह माना जा रहा है कि मामला काफी व्यापक हो सकता है और इसमें कई स्तरों पर प्रशासनिक जिम्मेदारी तय हो सकती है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के वित्तीय प्रबंधन पर अब सवाल उठने लगे हैं। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। सीबीआई की यह कार्रवाई आगे और तेज होने की संभावना है, क्योंकि एजेंसी लगातार नए दस्तावेज और साक्ष्य जुटा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बड़े अधिकारियों के कार्य का विश्लेषण



बैंक खातों और एफडीआर के रिकॉर्ड की मांग की गई
सीबीआई ने 20 मार्च 2025 को विभिन्न बैंकों को भेजे गए पत्रों और 24 फरवरी 2026 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि भी मांगी है। इसके अतिरिक्त, बैंक खातों के संचालन, चेकबुक की रखरखाव, एफडीआर रिकॉर्ड, इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस, ओटीपी लिंक डिवाइस और आधिकारिक ईमेल आईडी से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। सीबीआई ने नगर निगम कमिश्नर से 20 बिंदुओं पर दस्तावेज मांगे हैं। इनमें नगर निगम तथा स्मार्ट सिटी लिमिटेड के गठन से संबंधित कागजात, बैंक खाते खोलने की स्वीकृति, फंड ट्रांसफर निर्देश, ऑडिट रिपोर्ट, टैली और ईआरपी डेटा, ईमेल रिकार्ड तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी शामिल है। जांच एजेंसी ने विशेष रूप से लगभग 108.73 करोड़ रुपए की 11 एफडीआर का संपूर्ण विवरण मांगा है। इसमें असली दस्तावेज, बैंक खाता जानकारी, स्कैन की गई प्रतियां और बैंक के साथ हुई बातचीत से संबंधित रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
प्रशासन ने जांच सीबीआई को सौंप दी।
सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने 11 मई 2026 को बीएनएसएस की धारा 94 के तहत इस मामले में औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और बैंकिंग प्रक्रियाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर की गई है। यह केस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वित्तीय लेन-देन में नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर और कैसे हुआ। मामले की जांच मुख्य रूप से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोले गए खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) और धन हस्तांतरण की प्रक्रिया पर केंद्रित है। इन सभी वित्तीय गतिविधियों में कथित अनियमितताओं की गहन जांच की जा रही है। सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि बैंकिंग प्रक्रियाओं के दौरान सभी आवश्यक नियमों और मानकों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी स्तर पर प्रशासनिक या वित्तीय लापरवाही तो नहीं हुई। नगर निगम सदन से स्वीकृति मिलने के बाद यूटी प्रशासन ने इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष सीबीआई जांच के लिए सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र की मंजूरी मिलने पर एजेंसी ने औपचारिक रूप से जांच शुरू की। फिलहाल सीबीआई इस पूरे प्रकरण से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।










