Chandigarh में एक हाई-प्रोफाइल कानूनी मामले को लेकर लेखिका Madhu Kishwar एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर उन्होंने चंडीगढ़ कोर्ट का रुख किया है और एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की है। चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें जांच में शामिल होने के लिए दो बार नोटिस भेजा, लेकिन अब तक वे व्यक्तिगत रूप से जांच में पेश नहीं हुई हैं। इसके बजाय, उन्होंने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए सीधे अदालत में याचिका दायर की है। अपनी याचिका में मधु किश्वर ने कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रति उन्हें नहीं दी गई है, जबकि यह उनका कानूनी अधिकार है। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि उन्हें एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराई जाए। इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि एफआईआर की कॉपी क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई और जांच की वर्तमान स्थिति क्या है। दूसरी ओर, इसी केस से जुड़े एक अन्य पहलू में वायरल वीडियो मामले में नामजद एक दंपति ने जांच में सहयोग करते हुए इन्वेस्टिगेशन में भाग लिया है। यह मामला सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो फैलाने से जुड़ा बताया जा रहा है। इस केस में एक वीडियो को गलत संदर्भ के साथ सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था, जिससे लोगों के बीच भ्रम फैलने की स्थिति बनी। आरोप है कि वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी के रूप में हुई है, जिसे हैदराबाद से पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी की पहचान की गई और उसे हिरासत में लिया गया। अब उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल यह मामला कानूनी और डिजिटल दोनों ही स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कोर्ट की अगली सुनवाई और पुलिस की जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जिससे आने वाले समय में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
Chandigarh में सामने आए इस मामले ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली सूचनाओं की सच्चाई और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस केस में वायरल वीडियो से जुड़े कई पहलुओं की जांच जारी है, जिससे पूरा मामला और अधिक जटिल होता जा रहा है। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले दंपति ने अब जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना शुरू कर दिया है। उन्होंने जांच में शामिल होकर अपना पक्ष रखने और तथ्यों को स्पष्ट करने की कोशिश की है, जिससे केस की दिशा में कुछ नई जानकारियां सामने आ रही हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला सोशल मीडिया पर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि एक वीडियो को तोड़-मरोड़कर और गलत संदर्भ में साझा किया गया, जिससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। जांच में यह भी सामने आया है कि वीडियो को एडिट करके या उसके मूल संदर्भ को बदलकर प्रस्तुत किया गया, ताकि उसे एक विशेष तरीके से दिखाया जा सके। इसी वजह से मामले ने गंभीर रूप ले लिया और पुलिस को जांच शुरू करनी पड़ी। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी के रूप में हुई है, जिसे हैदराबाद से पकड़ा गया है। उस पर सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक कंटेंट फैलाने का आरोप है।

हैदराबाद से एक आरोपी को पकड़ा गया।
चंडीगढ़ पुलिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो फैलाने के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर गलत वीडियो प्रसारित कर जनता को गुमराह किया जा रहा था। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी के रूप में हुई है, जो तेलंगाना के हैदराबाद का रहने वाला है। आरोपी को तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर चिन्हित किया गया, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से एक वीडियो को गलत संदर्भ के साथ साझा कर रहा था। इस वीडियो को एडिट या भ्रामक कैप्शन के साथ पोस्ट कर लोगों के बीच गलत धारणा पैदा करने की कोशिश की गई। चंडीगढ़ पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी साइबर सेल की मदद से संभव हो पाई। टीम ने लगातार डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक किया और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर आरोपी तक पहुंच बनाई। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया पर सक्रिय रूप से इस तरह की सामग्री प्रसारित करने में शामिल रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गतिविधि में कोई और व्यक्ति या समूह भी शामिल है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की गहन जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जी वीडियो का असली स्रोत क्या था और इसे सबसे पहले किसने फैलाया।