नशे की बढ़ती समस्या को लेकर चिंता व्यक्त की।
चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान सांसद मनीष तिवारी ने शहर में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह समस्या अब केवल व्यक्तिगत नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक चुनौती का रूप लेती जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से आवासीय कॉलोनियों और शहरी गांवों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया, जहां युवाओं के बीच नशे का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह स्थिति भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत है और तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। बैठक में यह भी सामने आया कि कई महिलाओं ने सांसद से सीधे संवाद कर अपने बच्चों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि किस तरह कम उम्र के युवा गलत संगत और नशे की चपेट में आ रहे हैं, जिससे परिवारों में तनाव और असुरक्षा बढ़ रही है। मनीष तिवारी ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। परिवारों, शिक्षकों और समाज के हर वर्ग को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहर के नशा मुक्ति केंद्रों को और अधिक मजबूत और सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से सेक्टर-18 स्थित डी-एडिक्शन सेंटर की सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया गया। सांसद ने कहा कि जो लोग नशे की लत से बाहर निकलना चाहते हैं, उन्हें सही चिकित्सा, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए केंद्रों में प्रशिक्षित स्टाफ और आधुनिक संसाधनों की जरूरत है। उन्होंने उपचार की लागत को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इलाज का खर्च कम रखा जाना चाहिए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भी आसानी से इन सेवाओं का लाभ उठा सकें। बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को और तेज किया जाए, खासकर स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं को इसके दुष्परिणामों के बारे में बताया जाए।
फंड के जरिए अस्पतालों में स्थायी सुविधाओं को सुधारें।


चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित बैठक में सांसद मनीष तिवारी ने अस्पतालों के वित्तीय प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि संसाधनों का सही उपयोग स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों के दैनिक संचालन से जुड़े खर्चों को रोगी कल्याण समिति के फंड से नहीं, बल्कि प्रशासनिक बजट से वहन किया जाना चाहिए। इससे विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध रह सकेगा। तिवारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली और पानी के बिल जैसे नियमित खर्चों का प्रबंधन चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार के निर्धारित बजट से किया जाना चाहिए। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन को मजबूत करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों की सामान्य देखभाल और रखरखाव पर होने वाला खर्च भी नियमित सरकारी बजट से ही पूरा होना चाहिए, ताकि अनावश्यक बोझ रोगी कल्याण समिति पर न पड़े। सांसद ने स्टाफ के वेतन से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी निर्धारित सरकारी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जब प्रशासनिक और दैनिक खर्च अलग स्रोतों से पूरे होंगे, तो रोगी कल्याण समिति का फंड पूरी तरह से विकास कार्यों पर केंद्रित किया जा सकेगा। तिवारी ने जोर देकर कहा कि इस फंड का उपयोग अस्पतालों में स्थायी सुविधाओं के निर्माण और विस्तार के लिए होना चाहिए। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक उपकरण और सुविधाओं का विस्तार तभी संभव है जब धन का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से किया जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए सुझाव
चंडीगढ़ में आयोजित स्वास्थ्य संबंधी बैठक के दौरान रोगी कल्याण समिति के अन्य सदस्यों ने शहर की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई सदस्यों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सुविधाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया। विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिलाया गया कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम लागत में बेहतर इलाज मिलना चाहिए। इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना जरूरी है। सदस्यों ने सुझाव दिया कि अस्पतालों और डिस्पेंसरी में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि मरीजों को समय पर परामर्श मिल सके और इलाज में देरी न हो। इसके साथ ही दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। कई बार मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिसे रोकने की आवश्यकता बताई गई। चिकित्सा जांच सुविधाओं के विस्तार को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया। सदस्यों ने कहा कि आधुनिक जांच मशीनें और तकनीक हर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध होनी चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि डिस्पेंसरी स्तर पर ही अधिक से अधिक बीमारियों का इलाज संभव बनाया जाए, ताकि बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम हो सके। बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए, जिससे किसी भी कमी को तुरंत दूर किया जा सके।










