ChandigarhIndiaPunjabWorld News

CBI कोर्ट में DIG भुल्लर को बड़ा झटका

Chandigarh स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ दर्ज रिश्वत मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस फैसले को मामले की सुनवाई में अहम मोड़ माना जा रहा है। अदालत ने हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी कृष्ण शारदा के खिलाफ 8 लाख रुपये की कथित रिश्वत से जुड़े मामले में आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट का मानना है कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले की नियमित सुनवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने मुकदमे की अगली सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। कोर्ट ने आगामी सुनवाई के लिए अभियोजन पक्ष के दो गवाहों को भी समन जारी किए हैं। अब ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। दोनों पक्षों को अदालत में अपने-अपने तर्क और सबूत पेश करने का अवसर मिलेगा। यह मामला कथित तौर पर 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप से जुड़ा है। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की थी और मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से यह मामला विशेष अदालत में विचाराधीन है। अब आरोप तय होने के बाद केस कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। 23 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में अभियोजन पक्ष अपने गवाहों के बयान दर्ज कराएगा, जिसके आधार पर ट्रायल की आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

सीबीआई ने मद्रास कोर्ट की रखी दलील

सुनवाई के दौरान निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की ओर से अदालत में सीबीआई की जांच प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र को लेकर कई कानूनी आपत्तियां उठाई गईं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि भुल्लर पंजाब सरकार के अधीन कार्यरत राज्य कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं, इसलिए उनके खिलाफ सीधे सीबीआई द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना कानूनी रूप से उचित नहीं था। बचाव पक्ष ने अपने तर्कों के समर्थन में मद्रास हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया। वकीलों का कहना था कि राज्य कैडर के अधिकारियों के मामलों में जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और इस मामले में उसी आधार पर राहत दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, सीबीआई ने अदालत में बचाव पक्ष की दलीलों का कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि मामले में की गई कार्रवाई कानून के अनुरूप है और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य नियमित ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त हैं। सीबीआई ने अदालत से आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज करने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बचाव पक्ष की आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि इस स्तर पर आरोपमुक्त करने का कोई आधार नहीं बनता और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाई जानी चाहिए। अदालत ने अंततः हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की नियमित सुनवाई जारी रहेगी और आगामी चरण में अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

यह है मामला

यह मामला पिछले वर्ष दर्ज हुई एक शिकायत के बाद चर्चा में आया था। मंडी गोबिंदगढ़ के कारोबारी आकाश बत्ता ने आरोप लगाया था कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर उनसे 8 लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ली। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू की और पूरे घटनाक्रम की निगरानी की। जांच एजेंसी ने आरोपों की पुष्टि के लिए आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद विशेष रणनीति के तहत कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद मामले में कथित रिश्वत लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच आगे बढ़ाई गई। सीबीआई ने 16 अक्टूबर 2025 को विशेष अभियान चलाते हुए पंजाब पुलिस के तत्कालीन डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और कथित बिचौलिए कृष्ण शारदा को गिरफ्तार किया। एजेंसी का दावा है कि कार्रवाई शिकायत और जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर की गई थी। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जहां वे फिलहाल बंद हैं। इस दौरान दोनों की ओर से विभिन्न अदालतों में जमानत के लिए कई याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन अब तक किसी भी याचिका पर राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने हर बार मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया। अब आरोप तय होने के बाद यह मामला नियमित ट्रायल के चरण में पहुंच चुका है। आगामी सुनवाई में अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और साक्ष्यों को अदालत के समक्ष पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को भी अपने तर्क रखने का अवसर मिलेगा। अदालत की आगे की कार्यवाही पर इस बहुचर्चित मामले की दिशा निर्भर करेगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

Subscribe to Our Newsletter!

This will close in 0 seconds