Ajit Pawar से जुड़ी कथित प्लेन क्रैश घटना के बाद अब एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें कुछ नेताओं और स्थानीय लोगों द्वारा तंत्र-मंत्र और काले जादू जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी द्वारा सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा किए जाने के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है। इन तस्वीरों में कथित रूप से पूजा-पाठ और बकरे की बलि जैसे दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। 23 अप्रैल 2026 को सामने आए इन दावों में कहा गया कि अजित पवार के बारामती आगमन से पहले उनके खेत और फार्महाउस के आसपास कुछ संदिग्ध अनुष्ठान किए गए थे। अमोल मिटकरी ने यह भी कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं हो सकती और इसके पीछे किसी प्रकार की रहस्यमयी गतिविधि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अब तक कोई ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इस मामले में रोहित पवार के भी पहले दिए गए बयानों को दोबारा चर्चा में लाया जा रहा है। उन्होंने पहले ही इस घटना को लेकर कुछ सवाल उठाए थे, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी लगातार जारी है। इन दावों की सच्चाई जानने के लिए मीडिया टीम बारामती के काटेवाड़ी गांव पहुंची, जहां कथित पूजा-पाठ होने की बात कही जा रही थी। गांव में कुछ लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने खेतों में धार्मिक अनुष्ठान होते देखे थे, जबकि कुछ ने इसे सामान्य ग्रामीण पूजा बताया। ग्रामीणों के अनुसार, वहां हुई गतिविधियों को सीधे तौर पर किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति से जोड़ना सही नहीं होगा।
काटेवाड़ी के उपसरपंच मिलिंद तुकाराम काटे ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वायरल तस्वीरें अजित पवार के खेत या फार्महाउस की नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर पूजा की बात की जा रही है, वह किसी अन्य निजी खेत में आयोजित की गई थी और इसका कथित दुर्घटना से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि यह पूजा घटना के लगभग 15 दिन बाद आयोजित की गई थी, न कि उससे पहले। उनके अनुसार, गांव में समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं और उन्हें अंधविश्वास या काले जादू से जोड़ना उचित नहीं है। आधुनिक समय में इस तरह के दावों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। गांव के अन्य निवासियों ने भी इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अजित पवार के प्रति स्थानीय जनता में सम्मान है और उनकी छवि को लेकर किसी तरह की नकारात्मक बातों का कोई आधार नहीं है। वहीं कुछ ग्रामीणों का मानना है कि मीडिया रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने इस मामले को अनावश्यक रूप से बढ़ा दिया है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यदि वास्तव में इस घटना में किसी तरह की साजिश या संदिग्ध गतिविधि शामिल होती, तो अब तक जांच एजेंसियां स्पष्ट निष्कर्ष सामने ला चुकी होतीं। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और यह केवल अटकलें हैं। यह पूरा मामला राजनीतिक आरोपों, सोशल मीडिया चर्चाओं और ग्रामीण दावों के बीच उलझा हुआ है। एक तरफ इसे लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग और कुछ नेता इसे केवल अफवाह और गलतफहमी बता रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां और प्रशासन आगे इस मामले में क्या आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करते हैं।
पूजा का दादा से कोई संपर्क नहीं
हम काटेवाड़ी गांव में उस स्थान पर पहुंचे, जहां कथित रूप से पूजा और अनुष्ठान किए जाने का दावा किया गया था। यह इलाका शांत ग्रामीण परिवेश में स्थित है, जहां आसपास खेतों और पेड़ों की कतारें दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, हाल के दिनों में यहां कुछ असामान्य गतिविधियों की चर्चा रही है, जिसने पूरे गांव का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मौके पर हमें किसान संजय मधुकर मिले, जिन्होंने हमें उस खेत तक ले जाकर घटनास्थल दिखाया, जिसके बारे में ग्रामीणों में चर्चा चल रही है। उन्होंने बताया कि यह स्थान उनके खेत के पास ही है और यहां कुछ समय पहले लोगों की आवाजाही और पूजा जैसी गतिविधियां देखी गई थीं। उनके अनुसार, यह दृश्य सामान्य ग्रामीण पूजा से थोड़ा अलग था। संजय मधुकर ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं वहां पूजा होते हुए देखी थी, हालांकि वे यह स्पष्ट नहीं कर सके कि यह आयोजन किसने और किस उद्देश्य से किया था।
उन्होंने कहा कि गांव में कई लोग इस घटना के बारे में अलग-अलग बातें कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई क्या है, यह कोई निश्चित रूप से नहीं बता पा रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा का एक और विषय यह है कि खेत में मौजूद पेड़ पर अभी भी कुछ अवशेष लटके हुए दिखाई देते हैं, जिन्हें ग्रामीण बकरे के अवशेष बता रहे हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। फिर भी यह दृश्य गांव में जिज्ञासा और बहस का कारण बना हुआ है। संजय मधुकर का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि इस पूजा में कौन लोग शामिल थे और इसका उद्देश्य क्या था। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं, जिससे स्थिति और अधिक उलझती जा रही है। गांव के अन्य लोगों का कहना है कि यह स्थान सामान्यतः शांत रहता है, लेकिन हाल की चर्चाओं के बाद यहां लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। कुछ लोग इसे साधारण धार्मिक अनुष्ठान मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संदिग्ध गतिविधियों से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्पष्टता नहीं है और ग्रामीणों में उत्सुकता बनी हुई है। ‘कई लोग पूजा की तस्वीर दिखाकर साजिश का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन वहां किसी की तस्वीर नहीं रखी गई थी। मैंने देखा था कि वहां एक बकरा लटकाया गया था और उसका सिर शरीर से अलग था। नीचे नींबू और नारियल रखकर पूजा की गई थी, परंतु इसका अजित दादा के विमान दुर्घटना से कोई संबंध नहीं है। इसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूर्व निर्धारित साजिश है।
गाँववासियों के आरोपों के बारे में जानने के बाद हमने NCP विधायक अमोल मिटकरी से भी चर्चा की। वे अजित पवार के प्लेन क्रैश से पहले अघोरी पूजा के दावों को लेकर दृढ़ बने हुए हैं। अमोल बताते हैं कि बारामती में उपचुनाव के दौरान मैं काटेवाड़ी गया था। वहाँ अजित दादा के फार्महाउस की कुछ तस्वीरें मिलीं, जिनमें जादू-टोने जैसी चीजें नजर आ रही थीं। ये सभी काटेवाड़ी फार्म हाउस के पिछले हिस्से की थीं। अमोल का कहना है, ‘यदि कोई प्लेन क्रैश को हादसा मानता है, तो उसे इसे साबित करना चाहिए। पायलट प्रशिक्षित थे, इसलिए हादसे की संभावना कम है। यह महत्वपूर्ण है कि 26, 27 और 28 जनवरी को अजित पवार किस स्थान पर थे।‘
अजित के भतीजे रोहित ने कहा- काली पूजा के पीछे का क्या कारण है, छानबीन होनी चाहिए।
अजीत पवार के भतीजे और NCP (SP) के विधायक रोहित पवार का कहना है कि अजित दादा के काटेवाड़ी, बारामती और मुंबई के घरों के बाहर काली पूजा हुई थी। इसके वीडियो भी उपलब्ध हैं। काली पूजा से जुड़े अशोक खरात इस समय चर्चा का विषय हैं। दादा की पार्टी के कई कार्यकर्ता उनके संपर्क में थे। हम जादू-टोने पर विश्वास नहीं करते, लेकिन जो लोग काले जादू में लगे हैं, उनके उद्देश्य की जांच होनी चाहिए। वे राजनीतिक कारणों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ‘मौत के चार महीने पहले से अजित दादा भाजपा के खिलाफ तेज अभियान चला रहे थे। यदि शरद पवार साहब का बुद्धिमत्तापूर्ण दृष्टिकोण और दादा का कार्यशैली फिर मिल जाती तो सत्ताधारी लोगों की परेशानी बढ़ जाती। क्या इस दुश्मनी के चलते कुछ हुआ, यह संदेह समाप्त होना चाहिए।‘ रोहित आगे बताते हैं कि VSR एविएशन के मालिक वीके सिंह और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के साथ स अच्छे संबंध हैं, इसलिए कंपनी की जांच सही तरीके से नहीं की जा रही है। वीके सिंह साजिश में शामिल लोगों के नाम बता सकते हैं।
पुलिस के पास तंत्र-मंत्र की शिकायत नहीं।
बारामती तालुका पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर चंद्रशेखर यादव ने विमान दुर्घटना के बाद अजित पवार को जलते मलबे से निकाला था। फार्म हाउस में पूजा या जादू-टोने के आरोपों पर चंद्रशेखर कहते हैं, ‘पुलिस के पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। हम स्वयं साइट पर गए थे। अगर किसी ने अपने निजी खेत में कुछ किया हो तो अजित पवार की मृत्यु से उसका कोई संबंध नहीं है।’ रोहित पवार पर केस न दर्ज करने के आरोपों पर उनका कहना है, ‘एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज होते ही पूरा मामला CID को सौंप दिया गया। पुलिस ने सभी जानकारियां उन्हें दे दी हैं।‘
BJP नेता ने कहा- जादू-टोना जैसा कुछ नहीं है, यह बस एक दुर्घटना है।
बारामती में बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष नितिन भामे का कहना है, ‘प्रारंभिक जांच और पुलिस द्वारा की गई छानबीन में यह एक हादसा प्रतीत हो रहा है। बारामती तालुका पुलिस थाने में पहले ही एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है।‘ ‘कुछ लोग विमान के इंजन की आवाज या उसकी अस्थिरता के बारे में चर्चा कर रहे थे। जांच एजेंसियां इन सभी बिंदुओं की जांच कर रही हैं। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दुर्घटना का कारण यांत्रिक खराबी थी या मानव त्रुटि। वास्तविकता जांच के समाप्त होने पर सामने आएगी।‘ उनका कहना है कि अमोल जिन चित्रों को जादू टोने का सबूत मानते हैं, उनका प्लेन क्रैश की घटना से कोई संबंध नहीं है। जो भी स्थानीय जानकारी हमें मिल रही है, हम उसे जांच एजेंसियों के साथ साझा कर रहे हैं।