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Abhishek Banerjee विवाद पर सियासी संग्राम

West Bengal में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee से जुड़ी सोनारपुर की घटना ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कथित दुर्व्यवहार और विरोध प्रदर्शन के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। घटना के बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर हमला बता रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का कहना है कि जनता की नाराजगी को राजनीतिक हमले के रूप में पेश किया जा रहा है। इस विवाद के चलते विभिन्न जिलों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और पार्टी कार्यकर्ता खुलकर अपने-अपने पक्ष में प्रदर्शन कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इससे राज्य के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों और दलों की रणनीतियों पर भी असर पड़ने की संभावना है। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee के साथ सोनारपुर में कथित दुर्व्यवहार और विरोध प्रदर्शन की घटना के बाद राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। सोनारपुर में अपने कार्यक्रम के दौरान अभिषेक बनर्जी को कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोकने की कोशिश की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। तृणमूल कांग्रेस ने इसे सुनियोजित हमला बताया है, जबकि विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहे हैं।

घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और शिकायत दर्ज होने के कुछ ही समय बाद पांच लोगों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी स्थानीय निवासी हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विरोध प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त था या इसके पीछे किसी प्रकार की राजनीतिक योजना थी। इस विवाद के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली। पार्टी समर्थकों ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए और घटना की कड़ी निंदा की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी राजनीतिक नेता के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। हुगली जिले के चुंचुड़ा क्षेत्र में तृणमूल समर्थकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर विरोध दर्ज कराया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और राजनीतिक हिंसा पर रोक लगाने की अपील की। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता Dilip Ghosh ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें स्थानीय जनभावनाओं को समझना चाहिए था। उनके बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार को उचित नहीं ठहराया जा सकता। पार्टी का दावा है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को अलग दिशा देने का प्रयास कर रहा है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि जनता की नाराजगी को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर असर डाल सकती है। हाल के चुनावी परिणामों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस तरह की घटनाएं राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। सभी पक्ष अपने-अपने दृष्टिकोण से जनता के सामने संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और राजनीतिक दलों की रणनीति इस मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सोनारपुर की यह घटना पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है और सभी की नजरें आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। असित मजूमदार ने कहा कि अत्याचार का सामना कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में जाने पर अभिषेक बनर्जी को कथित रूप से अपमानित किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए, जिसके विरोध में तृणमूल कांग्रेस सड़क पर उतरी है. बताया जा रहा है कि पूर्व विधायक का ये प्रदर्शन पहले से निर्धारित था, जहां वह पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले थे. इसी के तहत उन्होंने जोलाघाट से बीरपाती तक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ रैली निकाली. रैली के दौरान उन्हें अभिषेक बनर्जी के साथ कथित दुर्व्यवहार की सूचना मिली. इसके बाद असित मजूमदार अपने समर्थकों के साथ चुंचुड़ा के पिपुलपाती मोड़ पर धरने पर बैठ गए. टीएमसी नेता का धरने की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया और यातायात को सामान्य कराया. घटना को लेकर क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बना हुआ है.

क्यों हीरो बनने गए वहां

इसके साथ ही अभिषेक पर हुए हमले के बाद राजनीतिक टिप्पणियां शुरू हो गई हैं। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर कहा, ‘अभिषेक बनर्जी के साथ जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए था।’ किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है, लेकिन जनता ने पिछले 15 वर्षों में जो सहा है। प्रत्येक व्यक्ति को तंग किया गया... जनता के भीतर जो गुस्सा है, वो कहीं न कहीं प्रकट होगा ही… चुनाव नतीजों को देखते हुए आपको (अभिषेक बनर्जी) स्थिति का अंदाजा लगा लेना चाहिए था। क्यों आप हीरे बनने के लिए वहाँ गए थे?... जो व्यक्ति 22 गाड़ियों के साथ यात्रा करता रहा, यदि वह ऐसे हीरो बनने की कोशिश करेगा तो क्या होगा? ... लोगों ने सब कुछ देखा है और वो सिर्फ मौके की तलाश में थे। आप (अभिषेक बनर्जी) लोगों को मौका ही क्यों दे रहे हैं?…

‘अगर TMC सत्ता में आ गई होती तो…’

इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि ऐसी घटनाएँ स्वस्थ समाज के लिए उचित नहीं हैं। चुनाव परिणाम ने इस बात को साबित कर दिया है कि घमंड और एकात्मक तंत्र लंबे समय तक नहीं टिक सकते। किसी को कष्ट हो सकता है, नाराजगी हो सकती है। लेकिन इस प्रकार की घटना जो हो रही है, वह स्वस्थ समाज के लिए उचित नहीं है। इस घटना के साथ पूरी पार्टी पूरी तरह से जुड़ी हुई नहीं है. उन्होंने कहा कि पुलिस क्यों नहीं आई, पुलिस क्यों नहीं थी, यह मुझे नहीं पता, यह राज्य सरकार बता सकती है। लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं पर हाल ही में जिस तरह का अत्याचार हुआ है। जब शुभेंदु अधिकारी विपक्ष के नेता थे, तब उनकी गाड़ी में जिंदा जलाने का प्रयास हुआ। हर जगह हमारे कार्यकर्ताओं के साथ अत्याचार किया गया। इसी दक्षिण 24 परगना जिले में हमारे चार अध्यक्षों पर हमले हुए। बीजेपी के कारण टीएमसी के नेता और सांसद सुरक्षित हैं, यदि टीएमसी सत्ता में होती तो अब तक हमारे 500 कार्यकर्ता हत्या का शिकार हो चुके होते।

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