31 साल पुराने केस में पप्पू यादव ज्यूडिशियल कस्टडी में, PMCH में इलाज जारी – अगली सुनवाई सोमवार को

पटना, 7 फरवरी 2026: बिहार की राजनीति आज एक बार फिर से पूर्व सांसद और पूर्णिया के लोकप्रिय नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के नाम से सुर्खियों में है। 31 साल पुराने 1995 के फॉरजरी/धोखाधड़ी मामले में पटना पुलिस ने उन्हें देर रात गिरफ्तार किया और MP-MLA कोर्ट ने उन्हें आज ज्यूडिशियल कस्टडी (न्यायिक हिरासत) में भेज दिया। गिरफ्तारी के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक होने के कारण उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। अब अदालत सोमवार (10 फरवरी 2026) को उनके खिलाफ दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी।

पुलिस के मुताबिक यह मामला वर्ष 1995 में पटना के गर्दनीबाग थाना में दर्ज एक पुराने फॉरजरी/धोखाधड़ी एफआईआर से जुड़ा है। उस समय दर्ज मामले में आरोप है कि पप्पू यादव ने एक संपत्ति को गलत तरीके से उपयोग किया था और दस्तावेजों में कथित रूप से गड़बड़ी की गई थी। मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पप्पू यादव को कई बार अदालत में हाज़िर होने का आदेश मिला, लेकिन वे लगातार पेश नहीं हुए, जिससे अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

गत शुक्रवार देर रात पुलिस की टीम उनके पटना स्थित आवास पर पहुंची और वारंट के आधार पर उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच कुछ देर विरोध और बहस देखने को मिली, लेकिन पुलिस ने पूरे आंदोलन को काबू में रख कर मामला शांतिपूर्वक नियंत्रित किया।

हालांकि गिरफ़्तारी के कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके कारण पुलिस ने पहले उन्हें IGIMS अस्पताल ले जाया और बाद में बेहतर चिकित्सीय सुविधा के लिए PMCH में शिफ्ट कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार, उनकी हालत को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है और इसी वजह से उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया है।

आज सुबह पप्पू यादव को MP-MLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान यह निर्णय लिया है कि वर्तमान में उन्हें दो दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में रखा जाए, और जमानत याचिका पर सोमवार (10 फरवरी 2026) को अगली सुनवाई होगी। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय देने से पहले उनकी मेडिकल स्थिति तथा कानूनी तर्कों का विस्तृत परीक्षण करेगा।

वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस गिरफ्तारी को लेकर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है और आरोप लगाया है कि यह गिरफ्तारी पप्पू यादव की मुखरता और सरकार की आलोचना करने के कारण की गई है। जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा कदम अदालत के आदेश और कानून के मुताबिक उठाया गया है और किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रेरणा का इसमें कोई स्थान नहीं है।

इससे पहले गिरफ्तारी के समय पप्पू यादव ने मीडिया से कहा था कि वे अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चिंतित हैं और कोर्ट के समक्ष पेश होने के लिए तैयार थे, लेकिन प्रशासन ने आदेश का पालन करते हुए उन्हें हिरासत में लिया।

अब सबकी निगाहें सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत न केवल जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि क्या पप्पू यादव को न्यायिक हिरासत में रखकर आगे की कार्रवाई की जाए या उन्हें जमानत दी जाए। इस फैसले का न केवल उनके राजनीतिक करियर पर प्रभाव पड़ेगा, बल्कि बिहार की राजनीति में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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