पंडित नेहरू और पीएम मोदी
पंडित नेहरू के समय से पीएम मोदी के प्रशासन में भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। जब पंडित नेहरू ने सत्ता ग्रहण की, तब भारत की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ थी। जब पीएम मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब तक जनसंख्या 131 करोड़ को पार कर चुकी थी। 2026 में यह जनसंख्या 146 करोड़ से अधिक हो गई है. नेहरू ने एक ऐसा राजनीतिक माहौल तैयार किया जिसमें कांग्रेस का प्रभुत्व था। 1952 के चुनावों में पार्टी ने लोकसभा की 489 सीटों में से 364 सीटें हासिल की थीं. इसके उलट पीएम मोदी ने कहीं अधिक विस्तारित और प्रतिस्पर्धी राजनीतिक स्थिति में शासन किया है। पीएम मोदी पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने निरंतर दो पूर्ण बहुमत वाले कार्यकाल पूरे किए हैं। वह नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने वर्तमान नेता के रूप में लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के लंबे राजनीतिक सफर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रही है, जो उनके निरंतर जनसमर्थन और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। इस वर्ष की शुरुआत में, वे भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित नेता बने, जब गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल कार्यकाल 8,930 दिनों से अधिक हो गया था।

भारत की राजनीति में 10 जून 2026 को एक ऐतिहासिक घटना होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन एक ऐसा रिकॉर्ड बनाएंगे, जो पहले से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम था। लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री के हैसियत से सबसे लंबे समय तक बने रहने का यह नया मील का पत्थर भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को देश की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद, उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जीत दर्ज कर ताबड़तोड़ तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लगातार जनादेश पाकर यह सफलता उन्हें भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल करती है। अब तक लोकतांत्रिक रूप से चुनें गए प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल का सम्मान पंडित जवाहरलाल नेहरू को मिला था। स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनावों के पश्चात नेहरू ने 13 मई 1952 को प्रधानमंत्री पद ग्रहण किया और 27 मई 1964 तक इस पद पर बने रहे। उनका कार्यकाल 4,398 दिनों का था, जो छह दशकों से अधिक समय तक अडिग बना रहा।
10 जून 2026 को प्रधानमंत्री मोदी 4,399 दिनों का आंकड़ा पार कर लेंगे और इस मामले में नेहरू को पीछे छोड़ देंगे। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं होगा, बल्कि आधुनिक भारत की राजनीतिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी कहलाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का यह रिकॉर्ड उनकी लोकप्रियता और लगातार चुनावी सफलताओं का प्रतिफल है। उन्होंने उस समय यह उपलब्धि हासिल की है जब देश का राजनीतिक माहौल पहले की अपेक्षा कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और बहुदलीय हो गया है। नेहरू और मोदी के कार्यकाल की तुलना करें तो दोनों अलग-अलग काल के नेता रहे हैं। नेहरू ने स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण की आधारशिला रखी, जबकि मोदी ने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आधारभूत ढांचे के विकास और वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त उपस्थिति जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण बहुमत वाली सरकारों का नेतृत्व किया और तीसरी बार भी केंद्र की सत्ता में पहुंचे। यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र में बेहद असामान्य मानी जाती है।
देश की जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक ढांचे में नेहरू काल से मोदी युग तक व्यापक बदलाव आए हैं। जहां नेहरू के समय भारत की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ थी, वहीं आज यह 146 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इतने विशाल और विविध देश का नेतृत्व करना स्वयं में एक बड़ी चुनौती है। राजनीतिक इतिहास में लंबे समय तक सत्ता में रहना केवल समय का मुद्दा नहीं होता, बल्कि जनता के निरंतर समर्थन और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप नेतृत्व कौशल का भी संकेत है। मोदी का नया रिकॉर्ड इसी संदर्भ में खास महत्व रखता है। 10 जून 2026 को जब यह रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त करेगा, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बन जाएंगे। यह उपलब्धि भारतीय राजनीति में उनके नाम एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ देगी, जिसकी चर्चा आने वाले वर्षों में भी होती रहेगी।