हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाने और बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि 1 मार्च से राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों के मोबाइल फोन लाने और इस्तेमाल करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
यह घोषणा बिलासपुर जिले के घुमारविन में आयोजित 69वें राष्ट्रीय स्कूल खेल (अंडर-19 गर्ल्स हैंडबॉल) टूर्नामेंट के समापन समारोह के दौरान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई छात्र स्कूल में मोबाइल लेकर आता है, तो उसका फोन जब्त किया जाएगा और 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही, अभिभावकों के लिए स्कूल काउंसलिंग सत्र में शामिल होना अनिवार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का उद्देश्य बच्चों को सजा देना नहीं, बल्कि स्कूलों में ऐसा माहौल बनाना है, जहां छात्र बिना किसी डिजिटल व्यवधान के पढ़ाई, खेल और आपसी संवाद पर ध्यान दे सकें। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन आज पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बनता जा रहा है और इससे बच्चों की एकाग्रता व अनुशासन प्रभावित हो रहा है।
आज मोबाइल सिर्फ बातचीत का साधन नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम, शॉर्ट वीडियो और चैटिंग का केंद्र बन चुका है। स्कूल समय में मोबाइल का इस्तेमाल बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटकाता है। इससे आंखों की समस्या, नींद की कमी, मानसिक तनाव और एकाग्रता में कमी जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास पर नकारात्मक असर डालता है।
सोशल मीडिया का बच्चों पर असर
सोशल मीडिया पर मौजूद नकारात्मक और भ्रामक सामग्री बच्चों की सोच और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। कम उम्र में इंटरनेट और अनुपयुक्त कंटेंट के संपर्क में रहने से बच्चों की रचनात्मकता, याददाश्त और सोचने की क्षमता कमजोर हो जाती है। बच्चे दूसरों की नकल करने लगते हैं और अपने विचार विकसित नहीं कर पाते।

स्कूलों में मोबाइल बैन से छात्रों की पढ़ाई में ध्यान बढ़ेगा, शिक्षक-छात्र संवाद बेहतर होगा और बच्चे आपस में ज्यादा बातचीत करेंगे। इससे उनमें टीमवर्क, सहयोग और आत्मविश्वास बढ़ेगा। साथ ही, खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
सरकार ने अभिभावकों के लिए काउंसलिंग सत्र अनिवार्य कर दिया है, ताकि वे इस फैसले के महत्व को समझ सकें और बच्चों का सहयोग कर सकें। कई माता-पिता सुरक्षा कारणों से बच्चों को मोबाइल देते हैं, इसलिए स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जरूरी स्थिति में संपर्क के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हो।
खेल और शिक्षा दोनों पर जोर
इस मौके पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कई घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में भाग लेने वाली महिला खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। राष्ट्रीय हैंडबॉल चैंपियनशिप में जीत पर हिमाचल टीम को 20 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। साथ ही, खिलाड़ियों के दैनिक भत्ते में भी बढ़ोतरी की गई है।
भविष्य की दिशा में अहम कदम
कुल मिलाकर, स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध का यह फैसला बच्चों के शैक्षणिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया और अभिभावकों का पूरा सहयोग मिला, तो यह पहल आने वाले समय में बेहतर और अनुशासित शिक्षा व्यवस्था की मिसाल बन सकती है।