सुप्रीम कोर्ट ने NTA को लगाई फटकार: पूछा- पिछली गलती से क्या सीखा? NEET पेपर लीक मामले में केंद्र और CBI से भी मांगा जवाब


नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि पहले हुए पेपर लीक मामलों से कोई सबक नहीं लिया गया।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA), यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह मामला पहले भी सुप्रीम Court तक पहुंच चुका है और उस समय बनाई गई कमेटी ने कई अहम सिफारिशें दी थीं, जिन्हें स्वीकार भी किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया है कि वह गुरुवार तक हलफनामा दाखिल कर बताए कि 2024 में दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई। इसके साथ ही केंद्र सरकार और CBI से भी जवाब मांगा गया है।
FAIMA की मुख्य मांगें
FAIMA ने अपनी याचिका में मांग की है कि:
- NEET-UG परीक्षा कराने के लिए NTA की जगह एक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाई जाए।
- जब तक नई संस्था नहीं बनती, तब तक एक हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाए।
- कमेटी में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और फोरेंसिक साइंटिस्ट को शामिल किया जाए।
FAIMA का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने से 22 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य और मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
UDF ने भी उठाए सवाल
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने भी NTA की मौजूदा व्यवस्था को भंग कर नई राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बनाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हुई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया।
NTA के मुताबिक 7 मई को परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी गई। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 मई को री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया।
इस मामले में CBI लगातार कार्रवाई कर रही है। हाल ही में एजेंसी ने 5 आरोपियों को दिल्ली की अदालत में पेश किया था।