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सद्भाव यात्रा के साथ पंचकूला पहुंची कांग्रेस, भारत-अमेरिका डील पर भाजपा सरकार पर हमला

पंचकूला पहुंची कांग्रेस की “सद्भाव यात्रा”। पूर्व लोकसभा सांसद बृजेंद्र सिंह के नेतृत्व में चौथे चरण के तहत सद्भाव यात्रा हरियाणा के 47वें हल्के पंचकूला में पहुंची। इस अवसर पर पूर्व लोकसभा सांसद बृजेंद्र सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ वीरेंद्र सिंह मीडिया से हुए रूबरू।    उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि 5 अक्टूबर को शुरू हुई “सद्भाव यात्रा” ने अपनी यात्रा के चार महीने पूरे कर लिए हैं और अब यात्रा के 123वें दिन पंचकूला पहुंची है। इस यात्रा का  स्लोगन है “कांग्रेस का हाथ, भाईचारे के साथ”।हरियाणा में कांग्रेस के गुटबाजी के लिए जिम्मेदार पड़े नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सभी का नम्बर आयेगा। जो कभी हरियाणा की राजनीति में शीर्ष पर थे आज शून्य हो चुके हैं।

पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने अमेरिका राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर भारत द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण फसलों का एलान किए जाने पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की अब परतें खुलनी शुरू हो गई है उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में भाजपा ने देश में तीन चीजों का डेडली कॉम्बिनेशन बना दिया है…..धर्म, बिग मनी और बिग मनी के थ्रू मीडिया कैप्चर….इससे 11 साल तो चला दिए लेकिन अब घटनाक्रम इतना तेज और इतना बड़ा होना शुरू हो गया की अब इन्हें छुपाए रास्ता नहीं मिल रहा है। और सब परतें खुल रही हैं।

भारत अमेरिकी डील पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ये जो पूरी अमेरिका के साथ डील हुई है। गजब की चीज यह है कि हमारे सरकार की तरफ से अभी तक 1 भी डीटेल नहीं दी गई है कि यह डील है क्या सिर्फ़ ये कहने के अलावा कि ग़ज़ब कर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्वीट कर सिर्फ इतनी ही जानकारी देश को दी गई है कि ट्रंप साहब का धन्यवाद, ट्रंप मेरे परम मित्र हैं। और यहाँ पर वही नगाड़े बजाने का सिलसिला शुरू हो गया की दुनिया फतेह कर ली। उस डील की टर्म्स क्या हैं, जैसे हमें आज तक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीज फायर की टर्म नहीं पता लगी इसकी टर्म्स भी अब तक पता नहीं लगी हैं कि टर्म्स हैं क्या? लेकिन अमेरिका के सेक्रेटरी एग्रीकल्चर ने ट्वीट किया कि अमेरिका के किसानों के प्रति भारत के निष्ठा को सलाम, अमेरिका के किसान के प्रति हिंदुस्तान के साथ 1.2 बिलियन डॉलर्स का डेफिसिट था, वो अब इस डील के होने से ये डेफिसिट अब खत्म हो जाएगा। सीधी सीधी इंग्लिश है। डेफिसिट तब खत्म होगा जब माल हिंदुस्तान में आके बिकेगा, माल से मतलब आपका एग्रीकल्चर प्रोड्यूस और डेयरी प्रोड्यूस। अब पियूष गोयल जी कितनी लफ्फाजी कर रहे हैं। लेकिन जो सत्य है सत्य है। और आज एक बात बता दें इसके अन्दर जो सबसे बड़ी कंपनी आएगी वो हमारा जो सबसे बड़ा इनडस्लिस्ट है, उसकी पार्टनरशिप वाली कंपनी आएगी जो इस चीज को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने इस डील की बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस डील की क्रोनोलॉजी समझिए पहले अमेरिका भारत सरकार के माध्यम से अडानी को तीन नोटिस सर्व कर चुकी है जो सर्विस नहीं हो रहे थे, इस बार अब अमेरिका ने डायरेक्ट नोटिस दिया है तो अडानी अब अमेरिका के साथ सेटलमेंट कर रहे हैं। और यह सेटलमेंट का समय और डील का समय एक ही है। उन्होंने कहा कि दो नेता और दो उद्योगपति देश को गिरवी रखे हुए हैं।

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ वीरेंद्र सिंह ने भी इस डील को  किसानों के साथ बड़ा धोखा बताते हुए कहा कि भारत की अभी तो ठगाई शुरू हुई है और आगे कहा रुकेगी कोई जानता नहीं इस बात को। लेकिन इतना जरुर है यह किसान आंदोलन के बाद सरकार ने 2 चीजें महसूस की है एक तो यह कि किसान लड़ाई लड़ सकता है इसलिए इसे कोई न कोई समझौता किया जाए। दूसरा इस किसान वर्ग को इतना कमजोर रखा जाए कि वह दोबारा इस तरह से न खड़े हो पाएं और न लड़ पाएं।सद्भाव यात्रा की जानकारी देते हुए बृजेंद्र सिंह ने कहा कि यह यात्रा उस समय निकाली जा रही है जब कोई चुनाव नहीं है। कोई राजनीतिक घटना नहीं घटने वाली। उसके बावजूद अगर लोग यात्रा से जुड़ रहे हैं तो लगता है कि उनकी बात कहीं न कहीं लोगों तक पहुंच रही है। इस यात्रा के दो पहलू हैं। एक सामाजिक है और दूसरा राजनीतिक।इस यात्रा को लेकर इसलिए चले है क्योंकि पिछले करीब 1 दशक से हरियाणा की 36 बिरादरी के भाईचारे की सामाजिक संरचना में जान बूझ कर उसके अन्दर तनाव पैदा किया जा रहा है।

एक समीकरण करके राजनीति करने में और एक खाई पैदा करने में बहुत अंतर है। यही अंतर पिछले 11-12 साल से आना आरंभ हुआ।एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा की यात्रा को लेकर लोगों में खलबली तो है।हरियाणा में कांग्रेसी आपस में कब सद्भाव में आएगी के प्रश्न पर उत्तर देते हुए बृजेंद्र सिंह ने कहा कि आपस में स्वभाव न होने का मुख्य कारण कांग्रेस का संगठन न बनना रहा है। जब संगठन नहीं होता तो धड़े और गुट बनते हैं। फिर पदाधिकारी नहीं वहां टिकटार्थी बचते हैं। यह जो आदत सब में बैठ गई है तो इसे बदलने में कुछ समय तो लगेगा ही। कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रतिनिधि भी यात्रा में आए हैं। जिस प्रकार से एक सोच है कि सभी इकट्ठे होकर आए अभी उसमें कमी है। सभी को निमंत्रण दिया गया है। इस यात्रा में कार्यकर्ता बड़ी शिद्दत के साथ आ रहा है।

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