बिहार कैबिनेट में बड़ा उलटफेर: गृह विभाग BJP के पास, मंगल पांडे फिर बने स्वास्थ्य मंत्री

बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास दो दशकों से संभाले जा रहे गृह मंत्रालय का भार छोड़ दिया है। यह पहली बार है जब गृह विभाग जेडीयू से हटकर भाजपा के खाते में गया है, और इसकी कमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दी गई है। बिहार मंत्रिमंडल में यह फैसला सत्ता संतुलन और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

20 वर्षों बाद बदला सबसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो

गृह विभाग को अब तक नीतीश कुमार अपने पास रखते आए थे, लेकिन इस बार इसे भाजपा को सौंपकर उन्होंने गठबंधन की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। सम्राट चौधरी अब बिहार में कानून-व्यवस्था, पुलिस एवं सुरक्षा तंत्र की कमान संभालेंगे।

महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नया बंटवारा कौन, किसे मिला विभाग

नीचे मंत्रियों और उनके विभागों का पूरा विवरण दिया गया है:

🔹 जेडीयू (JDU) को मिले विभाग

🔹 भाजपा (BJP) को मिले बड़े विभाग

 

नई इंट्री राष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह को मिला बड़ा रोल

इस बार की कैबिनेट में स्पोर्ट्स बैकग्राउंड से आने वाली राष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह को शामिल किया गया है।
उन्हें खेल विभाग के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विभाग की जिम्मेदारी दी गई है — जो युवा, खेल और डिजिटल विकास के एजेंडे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

HAM और LJPR कोटे का बंटवारा

क्या संदेश देती है नई कैबिनेट

बिहार मंत्रिमंडल में विभागों के वितरण से तीन महत्वपूर्ण संकेत सामने आते हैं:

 BJP का बढ़ता प्रभाव

गृह, कृषि, उद्योग, युवा, पर्यटन, आपदा प्रबंधन जैसे बड़े मंत्रालय भाजपा के पास गए हैं, जो सत्ता संतुलन को साफ दर्शाता है।

जेडीयू ने फाइनेंस और हेल्थ पर फोकस किया

वित्त और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील और रणनीतिक मंत्रालय जेडीयू के नियंत्रण में हैं।

 नई पीढ़ी को आगे लाने का प्रयास

श्रेयसी सिंह और अन्य युवा चेहरों की एंट्री से पार्टी एक नई ब्रांडिंग की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

नीतीश सरकार के इस बड़े फेरबदल ने बिहार की राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं।
गृह मंत्रालय भाजपा को सौंपा जाना भविष्य की राजनीति और गठबंधन की दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।
कैबिनेट में विभागों का वितरण न सिर्फ राजनीतिक संतुलन पर आधारित है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता, विकास प्राथमिकताओं और जातीय-आंचलिक प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखकर किया गया है।

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