Zirakpur में ठोस कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए नगर परिषद लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन बिशनपुरा डंपिंग ग्राउंड पर वर्षों से जमा कचरे का निस्तारण अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। शहर की बढ़ती आबादी के साथ प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है, जिससे पुराने कचरे को खत्म करने के साथ-साथ नए कचरे का समय पर प्रबंधन करना प्रशासन के लिए आसान नहीं रह गया है। नगर परिषद ने शहर से निकलने वाले फ्रेश वेस्ट के संग्रहण, परिवहन और प्रबंधन के लिए लगभग 16 करोड़ रुपये का ठेका एक निजी कंपनी को दिया है। कंपनी को घरों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को नियमित रूप से एकत्रित कर डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य शहर में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना और कचरे के अनियंत्रित ढेर बनने से रोकना है। वर्तमान में जीरकपुर से प्रतिदिन लगभग 75 से 80 टन ताजा कचरा बिशनपुरा डंपिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। वहीं दूसरी ओर, वर्षों से जमा लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण भी जारी है। यदि नए कचरे की प्रोसेसिंग और पुराने कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया समान गति से नहीं चलेगी, तो डंपिंग ग्राउंड पर दबाव पूरी तरह कम करना मुश्किल होगा। नगर परिषद का कहना है कि शहर में नियमित कचरा उठान प्रभावित न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही पुराने कचरे के निस्तारण को भी प्राथमिकता दी जा रही है ताकि भविष्य में डंपिंग ग्राउंड पर कूड़े के नए पहाड़ बनने से रोका जा सके। इसके लिए आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि करोड़ों रुपये की लागत वाली योजनाएं जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाती हैं। लोगों का मानना है कि केवल कचरा उठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि फ्रेश वेस्ट की नियमित प्रोसेसिंग, लिगेसी वेस्ट का समयबद्ध निस्तारण और प्रभावी निगरानी ही बिशनपुरा डंपिंग ग्राउंड की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान दे सकती है।
एक नजर में बिशनपुर डंपिंग ग्राउंड की स्थिति
बिशनपुरा डंपिंग ग्राउंड पर वर्षों से जमा लिगेसी वेस्ट को खत्म करने का काम जारी है। नगर परिषद के अनुसार अब तक लगभग 80 प्रतिशत पुराने कचरे का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि करीब 20 प्रतिशत कचरा अभी भी प्रोसेस किया जाना बाकी है। हालांकि, पुराने कचरे के साथ-साथ हर दिन बड़ी मात्रा में नया कचरा पहुंचने से पूरी प्रक्रिया लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। जीरकपुर शहर से प्रतिदिन करीब 75 से 80 टन फ्रेश वेस्ट डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच रहा है। नगर परिषद ने इस ताजा कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रबंधन के लिए लगभग 16 करोड़ रुपये का ठेका एक निजी कंपनी को दिया है। उद्देश्य यह है कि शहर में नियमित सफाई व्यवस्था बनी रहे और कचरे का समय पर निस्तारण किया जा सके। नगर परिषद का मानना है कि केवल पुराने कचरे का निस्तारण पर्याप्त नहीं होगा। यदि रोजाना आने वाले नए कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग समान गति से नहीं हुई, तो डंपिंग ग्राउंड पर दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकेगा। यही कारण है कि फ्रेश वेस्ट और लिगेसी वेस्ट दोनों के समानांतर प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। नगर परिषद के प्रधान गुरप्रीत सिंह विर्क ने बताया कि संबंधित कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर लीगल नोटिस जारी किया गया है। साथ ही कंपनी को किए जाने वाले सभी भुगतान फिलहाल रोक दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार कंपनी पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी, ताकि कचरा प्रबंधन कार्य में लापरवाही न हो और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। नगर परिषद का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि करोड़ों रुपये की योजनाओं और लंबे समय से चल रहे प्रयासों के बाद बिशनपुरा डंपिंग ग्राउंड पर बने कूड़े के पहाड़ पूरी तरह कब समाप्त होंगे। शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस बार तय समय सीमा के भीतर इस वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकालने में सफल होगा।
