प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर हमला, बोलीं— पीएम संसद में जवाब देने से बच रहे हैं

संसद में जारी गतिरोध को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि पीएम संसद में जवाब देने के बजाय लोकसभा स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं।गुरुवार को प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने या उन पर किसी तरह के हमले की योजना का दावा पूरी तरह झूठा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी कोई योजना थी ही नहीं और सरकार बेवजह डर का माहौल बना रही है।प्रियंका की यह प्रतिक्रिया लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुरक्षा से जुड़ी पुख्ता जानकारी मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया था। स्पीकर ने दावा किया था कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंचने की कोशिश कर सकते थे, जिससे कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती थी।इन आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार स्पीकर से यह सब कहलवा रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री में उस दिन सदन में आने की हिम्मत नहीं थी। उन्होंने कहा, “यह सरासर झूठ है। प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने की बात पूरी तरह बेबुनियाद है।”

प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि अगर सत्तापक्ष अपने सांसदों को मनमानी करने, किताबें कोट करने और अनर्गल बयान देने की छूट देगा, तो विपक्ष विरोध जरूर करेगा। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “सिर्फ इसलिए कि तीन महिलाएं प्रधानमंत्री की बेंच के सामने खड़ी थीं, यह कहना कि हमला हो सकता था— यह क्या बकवास है?”

इसके साथ ही प्रियंका गांधी ने सरकार से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने क्यों नहीं दिया गया और क्या किसी सार्वजनिक स्रोत को उद्धृत करने से रोकने का कोई वैध कारण सरकार के पास है।

इससे पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि सदन और उनके कार्यालय में हुआ व्यवहार संसदीय परंपराओं के खिलाफ था। उन्होंने इसे लोकसभा के इतिहास में अभूतपूर्व बताया और संसद की गरिमा पर काला धब्बा करार दिया।

स्पीकर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका थी और अगर कोई अप्रिय घटना होती तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए नुकसानदायक होता। इसी वजह से उन्होंने एहतियातन प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया था

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