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पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव, चुनाव आयोग ने बताई वजह और सुरक्षा इंतजाम

Election Commission of India ने रविवार को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिन राज्यों में चुनाव होंगे उनमें Assam, Kerala, West Bengal और Tamil Nadu शामिल हैं। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश Puducherry में भी विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे।

चुनाव आयोग के मुताबिक इन राज्यों में मतदान की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में होगी। असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होंगे।

बंगाल में दो चरणों में क्यों होंगे चुनाव?

जब मुख्य चुनाव आयुक्त से यह सवाल पूछा गया कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान क्यों कराया जा रहा है, तो उन्होंने बताया कि पहले यहां चुनाव कई चरणों में होते थे। उदाहरण के तौर पर पिछली बार पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया गया था।

चुनाव आयोग ने इस बार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की और फैसला लिया कि चरणों की संख्या कम की जानी चाहिए। आयोग का मानना है कि कम चरणों में चुनाव कराने से पूरी प्रक्रिया ज्यादा आसान और व्यवस्थित हो जाती है।

हिंसा पर सख्त रहेगा आयोग

चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पिछले चुनावों में हिंसा में शामिल रहे कुछ पुलिस अधिकारियों की सूची आयोग के पास मौजूद है और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

मतदाता सूची पर क्या कहा?

मतदाता सूची के विशेष संशोधन यानी SIR को लेकर उठे सवालों पर भी चुनाव आयोग ने अपनी बात रखी। आयोग ने कहा कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 326 उसे यह जिम्मेदारी देता है कि केवल योग्य और पात्र लोगों के नाम ही मतदाता सूची में शामिल हों।

इसी प्रक्रिया के तहत समय-समय पर मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सकें।

आचार संहिता को लेकर भी दी जानकारी

मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में केंद्र और राज्य सरकारें आचार संहिता लागू होने से पहले कोई भी नीतिगत फैसला ले सकती हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव की घोषणा होती है, आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है और उसके बाद नई घोषणाएं या योजनाएं शुरू नहीं की जा सकतीं।

फेक न्यूज और डीपफेक पर निगरानी

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत जानकारी और डीपफेक वीडियो पर खास नजर रखी जाएगी। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।

कुल मिलाकर चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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