Dunki रूट से अमेरिका पहुँचा Haryana का बेटा ट्रक हादसे में जिंदा जला 6 महीने बाद थी शादी

यह कहानी केवल एक युवक की मृत्यु की खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों सपनों की राख है जो हरियाणा के गाँवों से ‘डंकी रूट’ के खतरनाक रास्तों पर हर साल दम तोड़ देते हैं। कैथल के बाकल गाँव के 26 वर्षीय सिमरनजीत सिंह ने गरीबी से लड़ने और परिवार को एक खुशहाल भविष्य देने के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर सात समंदर पार का सफर तय किया था; वह छह महीने तक जंगलों, अज्ञात सीमाओं और जेल की सलाखों से जूझता हुआ अमेरिका पहुँचा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस युवक की छह महीने बाद सिर पर सेहरा सजने वाला था और जिसने वीडियो कॉल पर अपनी मंगेतर को सात जन्मों का साथ निभाने का वचन दिया था, उसकी जिंदगी कैलिफोर्निया की एक सड़क पर ट्रक के मलबे और आग की लपटों के बीच सिमट कर रह गई। आज उसके घर में शहनाइयों की गूँज की जगह सन्नाटा और चीखें हैं, और पीछे छूट गई हैं सिर्फ वो जली हुई हड्डियाँ जो इस कड़वी हकीकत को बयां कर रही हैं कि ‘डॉलर’ के पीछे की यह दौड़ अक्सर अपनों से हमेशा के लिए दूर कर देती है।

जानिए परिवार ने सिमरनजीत के विषय में क्या कहा…

डंकी रूट द्वारा 6 महीने में अमेरिका पहुंचा: सिमरनजीत सिंह की मृत्यु के बाद परिवार से बातचीत में कई जानकारियाँ सामने आईं। उसके चचेरे भाई इंद्रपाल सिंह ने कहा कि सिमरनजीत सिंह को डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने में लगभग 6 महीने लगे थे। वह तीन देशों के रास्ते अमेरिका पहुँचा। आर्मी ने उसे पकड़ लिया तो जेल जाना पड़ाः पहले वह दुबई गया और कुछ समय वहां बिता गया। फिर वह मास्को गया और उसके बाद मेक्सिको चला गया। वहां दीवार पार करते ही आर्मी ने उसे पकड़ लिया। कुछ दिन वह जेल में रहा, जिसके बाद छुड़वाया गया। 17 साल की उम्र में अमेरिका पहुँचा: सिमरनजीत ने केवल 17 साल की आयु में अमेरिका जाकर नए जीवन की शुरुआत की। 12वीं कक्षा के बाद उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और विदेश जाने की इच्छा व्यक्त की। परिवार ने उसकी बात मानकर उसे विदेश भेजने का निर्णय लिया। प्रारंभ में वह परिचितों के साथ रहा, लेकिन जब उसे ट्रक चलाने का काम मिला, तो वह अपने दोस्तों के साथ रहने लगा। दोस्तों के साथ रहना पसंद करता थाः अमेरिका में रह रहीं दोनों बहनें उसे अपने साथ रहने के लिए कहती थीं, लेकिन सिमरनजीत हमेशा बताता था कि वह अपने दोस्तों के संग ही रहना चाहता है और वहां उसे कोई परेशानी नहीं है। इस पर बहनों ने उसे दोस्तों के साथ रहने की इजाजत दे दी थी। माता-पिता का हाल बेहालः बेटे की मौत के बाद माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। लगभग 55 वर्षीय पिता और 52 वर्षीय मां अपने बेटे के निधन का सदमा नहीं झेल पा रहे हैं। मां को बार-बार बेहोशी की समस्या पेश आ रही है। कैथल में रहने वाली बेटी और परिवार की अन्य महिलाएं उसकी मां का ख्याल रख रही हैं।

अक्टूबर में विवाह करने का विचार कर रहा था परिवार।

सिमरनजीत की मौत ने न केवल एक जीवन को समाप्त किया, बल्कि उन अरमानों को भी राख कर दिया जो एक माँ की आँखों और घर की दहलीज़ पर पल रहे थे। उसके चचेरे भाई इंद्रपाल की बातें कलेजे को चीर देने वाली हैं, जो बताते हैं कि कैसे सात समंदर पार बैठे सिमरनजीत ने वीडियो कॉल की छोटी सी स्क्रीन के जरिए अपनी जीवनसंगिनी को चुना था और शगुन की रस्म पूरी कर अपना वचन दिया था। एक तरफ हरियाणा के उस घर में अक्टूबर-नवंबर की सर्दियों में गूंजने वाली शहनाइयों की तैयारियां चल रही थीं, माँ ने चाव से गहने जोड़कर रखे थे और यूपी की उस लड़की के सपने परवान चढ़ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कैलिफोर्निया की एक सड़क पर लगी आग ने सब कुछ खाक कर दिया। यह महज एक हादसा नहीं है, बल्कि एक ऐसा क्रूर मजाक है जहाँ शादी का जोड़ा तैयार खड़ा था, लेकिन घर सिर्फ जली हुई हड्डियाँ लौटीं; वह कमरा जहाँ सेहरा सजना था, वहाँ अब केवल मातम की चीखें और कभी न पूरे होने वाले वादों का बोझ बाकी रह गया है।

बहनें भाभी के आने का बेसब्री से कर रही थीं इंतजार।

सिमरनजीत के बलिदान की यह कहानी उस पारिवारिक प्रेम और जिम्मेदारी की मिसाल थी, जिसे उसने अपनी जान जोखिम में डालकर निभाया था। उसने न केवल खुद संघर्ष किया, बल्कि अपनी दोनों बहनों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उन्हें अमेरिका में बसाया और वहाँ अपनी बहन का घर बसाकर एक भाई का सबसे बड़ा कर्तव्य पूरा किया। विदेश की धरती पर दोनों बहनें खुशहाल जीवन जी रही थीं और उनकी आँखों में बस एक ही हसरत बाकी थी—कि जल्द ही उनके भाई के सिर पर सेहरा सजे और उनकी नई भाभी भी उसी खुशियों भरे संसार का हिस्सा बनें। लेकिन जिस भाई ने अपनी बहनों के आँगन में खुशियों के फूल खिलाए, वही अपनी गृहस्थी बसाने के सपने को हकीकत में तब्दील होते नहीं देख सका। आज उन बहनों का इंतज़ार एक ऐसे अंतहीन दर्द में बदल गया है, जहाँ भाभी के स्वागत की खुशियाँ अब कभी न खत्म होने वाले विलाप में तब्दील हो चुकी हैं, और वह घर जो भाई-बहन के साथ से चहकने वाला था, अब केवल उन अधूरे वादों की गूँज बनकर रह गया है।

अब जानिए सिमरनजीत की मृत्यु कैसे हुई…

कैलिफोर्निया में जाते हुए सिमरनजीत के सामने एक कार का एक्सिडेंट हुआ। इसी कारण वो अपने केमिकल से भरे ट्रक को सड़क किनारे रोकने लगा। इसी समय पीछे का एक और ट्रक उसके ट्रक में टकरा गया। वास्तव में, टकराव के कारण ट्रक से चिंगारी निकली, जिससे आग प्रज्वलित हुई। आग धीरे-धीरे ट्रक के पिछले हिस्से में मौजूद केमिकल के लोड तक पहुंच गई और भयावह हो गई। इसी बीच, आग लगने के बाद सिमरनजीत ट्रक के अंदर फंस गया। सिमरनजीत सिंह ट्रक के साथ पूरी तरह से जल गया। ट्रक में केवल उसकी हड्डियाँ जली हुई अवस्था में पाई गईं। परिवार सरकार से अपील कर रहा है कि बेटे की अस्थियों को उनके घर लाने में मदद की जाए ताकि परिवार रीति-रिवाज के अनुसार उनकी आत्मा की शांति के लिए अंतिम संस्कार कर सके।

हरियाणा के कैथल का 26 वर्षीय लड़का अमेरिका में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। युवक केमिकल से भरा ट्रक लेकर सड़कों के किनारे खड़ा था। तभी एक अन्य ट्रक ने पीछे से उसके ट्रक को टक्कर दे दी। टक्कर के बाद केमिकल में आग लग गई, जिससे युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

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