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चिन्नी कुबाहेड़ी हत्याकांड का पर्दाफाश एडीजीपी की भाभी मास्टरमाइंड गिरफ्तार गैंगस्टर नेटवर्क का खुलासा

Chandigarh के सेक्टर-9 में हुए प्रॉपर्टी डीलर चमनप्रीत सिंह उर्फ चिन्नी कुबाहेड़ी हत्याकांड ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को हिला कर रख दिया है। इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए जांच एजेंसियों ने एडीजीपी की भाभी अमरीन राय को मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला लंबे समय से चल रहे प्रॉपर्टी विवाद और वित्तीय लेन-देन से उपजे तनाव का नतीजा था, जिसने बाद में एक खतरनाक साजिश का रूप ले लिया। जांच में सामने आया है कि अमरीन राय ने कथित तौर पर इस हत्या की योजना गैंगस्टर लकी पाटियाल के नेटवर्क के जरिए बनाई थी। इस साजिश को अंजाम देने में प्रॉपर्टी डीलर हर्षप्रीत सिंह ने अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जिसने एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए दोनों पक्षों के बीच संपर्क स्थापित किया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है, ताकि इस संगठित अपराध की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके। इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले हर्षप्रीत सिंह की गिरफ्तारी ने पुलिस को बड़ी अहम जानकारी दी। उसके पास से एक विदेशी .45 बोर पिस्टल और दो कारतूस बरामद किए गए। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि हथियार अमरीन राय के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिससे उसके प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि हुई।

एन्क्रिप्टेड ऐप से लेकर कॉन्ट्रैक्ट किलिंग तक चिन्नी कुबाहेड़ी हत्याकांड में बड़ा खुलासा

हर्षप्रीत ने एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए अमरीन और गैंगस्टर नेटवर्क के बीच संपर्क स्थापित करवाया था। इसके बदले में उसे आर्थिक लाभ और सुरक्षा देने का वादा किया गया था। इस डिजिटल लिंक ने जांच को नई दिशा दी और पूरे नेटवर्क को उजागर करने में मदद मिली। हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए शूटरों को पूरी तरह प्रशिक्षित और तैयार किया गया था। गैंगस्टर लकी पाटियाल के निर्देश पर रंजन उर्फ पीयूष पहलवान और प्रीतम को इस काम के लिए चुना गया। दोनों को न केवल हथियार दिए गए बल्कि भागने की पूरी योजना भी पहले से तैयार की गई थी। 18 मार्च को दोनों शूटरों ने पहले से रेकी करने के बाद चमनप्रीत सिंह को निशाना बनाया। जैसे ही वह जिम से बाहर आए, उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी तेजी से फरार हो गए और पुलिस को शुरुआती जांच में कोई ठोस सुराग नहीं मिला। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर एंगल से इसकी जांच कर रही हैं। इस हत्याकांड ने एक बार फिर संगठित अपराध और हाई-प्रोफाइल विवादों के खतरनाक गठजोड़ को उजागर कर दिया है |

हर्षप्रीत की गिरफ्तारी से खुला राज

29 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच को एक महत्वपूर्ण गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। सूचना के मुताबिक संदिग्ध गतिविधियों में शामिल एक व्यक्ति मलोया इलाके के सत्संग भवन के पास देखा गया था। इस जानकारी को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तुरंत इलाके में नाका लगाकर निगरानी शुरू कर दी। कुछ ही समय बाद पुलिस को संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियां नजर आईं, जिसके बाद टीम ने उसे रोककर पूछताछ की। यह व्यक्ति हर्षप्रीत सिंह (27) था, जो मोहाली के कैम्बाला गांव का रहने वाला बताया गया। पुलिस ने शक के आधार पर उसकी तलाशी ली और उसके बैग की गहन जांच शुरू की। तलाशी के दौरान पुलिस को एक विदेशी .45 बोर पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए। इस बरामदगी के बाद मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और आगे की पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच ऑफिस ले जाया गया। इस बरामदगी ने जांच को एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया। पूछताछ के दौरान हर्षप्रीत सिंह ने शुरुआत में गोलमोल जवाब दिए, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने कई अहम जानकारियां साझा कीं। पुलिस को शक हुआ कि यह मामला केवल अवैध हथियार रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। जांच में सामने आया कि बरामद किया गया पिस्टल अमरीन राय के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिससे इस पूरे मामले में उसकी भूमिका पर सवाल उठने लगे। यह तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया और अमरीन राय को भी जांच के घेरे में शामिल किया। इसके बाद पुलिस ने इस मामले को कॉन्ट्रैक्ट किलिंग से जोड़ते हुए गहन जांच शुरू कर दी। शुरुआती सबूतों के आधार पर यह संकेत मिले कि यह केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं। अवैध हथियार रखने और आपराधिक साजिश में शामिल होने के चलते हर्षप्रीत सिंह के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धाराओं 25, 54 और 59 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

शूटरों ने वारदात को दिया अंजाम

इस सनसनीखेज हत्याकांड में जांच के दौरान पुलिस को एक संगठित आपराधिक नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि इस पूरी साजिश को अंजाम देने के पीछे कुख्यात गैंगस्टर लकी पाटियाल की अहम भूमिका रही है, जिसने इस ऑपरेशन को योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया। लकी पाटियाल ने इस वारदात के लिए दो शूटरों का चयन किया, जिनमें रंजन उर्फ पीयूष पहलवान और प्रीतम शामिल थे। दोनों को इस काम के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया और उन्हें पूरी योजना के बारे में विस्तार से बताया गया ताकि किसी भी तरह की चूक न हो। जांच में यह भी सामने आया है कि शूटरों को वारदात को अंजाम देने के लिए जरूरी हथियार उपलब्ध कराए गए थे। इसके साथ ही उन्हें आर्थिक सहायता भी दी गई ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस अपराध को अंजाम दे सकें और बाद में सुरक्षित निकल सकें। इसके अलावा आरोपियों के लिए भागने की पूरी रणनीति पहले से तैयार की गई थी। उन्हें बाइक उपलब्ध कराई गई और अलग-अलग सुरक्षित रास्तों की जानकारी दी गई ताकि वारदात के बाद पुलिस की पकड़ से बचा जा सके। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि 18 मार्च को दोनों शूटर पहले ही इलाके में पहुंच गए थे। उन्होंने जिम के आसपास कई घंटों तक रेकी की और चमनप्रीत सिंह की दिनचर्या पर नजर रखी ताकि सही समय पर हमला किया जा सके। जैसे ही चमनप्रीत सिंह जिम से बाहर निकले, दोनों शूटरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर मौके पर ही उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी तुरंत मौके से फरार हो गए। उनकी योजना इतनी सटीक थी कि शुरुआती घंटों में पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका और आरोपी आसानी से बच निकलने में कामयाब हो गए। पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही पूरे गैंगस्टर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर इस अपराध की पूरी सच्चाई सामने लाने का प्रयास जारी है।

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