हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पुश्तैनी और जमीन खरीदकर रहने वाले लोगों के लिए भवन निर्माण नियमों में सरलीकरण करने का फैसला लिया है। कैबिनेट की बैठक में इस मामले पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई और मंजूरी दे दी गई। इसके तहत पंचायतों में तकनीकी सहायक भवनों के नक्शे को सत्यापित करेगा, जबकि अंतिम मंजूरी ग्रामसभा से ली जाएगी।

नियमों में बदलाव और प्रक्रिया
- पुश्तैनी लोगों और जमीन खरीदने वालों को भवन निर्माण के लिए सरल प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।
- भवनों का निर्माण नदी-नालों से उचित दूरी पर ही किया जा सकेगा।
- नक्शे बनाने का काम किसी संगठित एजेंसी को भी सौंपा जा सकता है।
- ग्रामीणों को यह सुविधा इस उद्देश्य से दी गई है कि किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा या प्रशासनिक जटिलताओं से उन्हें परेशानी न हो।
भूमि खरीदकर निर्माण करने वालों के लिए नियम
जिन लोगों ने गाँव में जमीन खरीदी है और भवन निर्माण करना चाहते हैं, उन्हें टीसीपी (Town and Country Planning) से अनुमति लेनी होगी। राजस्व विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि जहाँ भवन बनाए जा रहे हैं, वहां से नदी-नालों की दूरी सुरक्षित और नियमानुसार हो।
प्राकृतिक आपदा के बाद उठाया कदम
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में प्राकृतिक आपदा ने ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचाई है। नदी-नालों के किनारे बने भवनों को काफी नुकसान हुआ। इस संकट के मद्देनजर सरकार ने भवन निर्माण नियमों को सख्त और सुरक्षित बनाने का फैसला किया
इस फैसले के पीछे ग्रामीण विकास विभाग का प्रस्ताव और नियम तैयार करने का काम रहा। विभाग ने सुनिश्चित किया कि नियम पुश्तैनी लोगों के हित में हों और उनके लिए भवन निर्माण प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी रहे।
मुख्य उद्देश्य
सरकार का मुख्य उद्देश्य है:
- ग्रामीणों को भवन निर्माण में कोई कठिनाई न हो।
- नदी-नालों के किनारे भवनों की सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए।
- पुश्तैनी और जमीन खरीदकर रहने वाले लोगों के लिए सरल और तेज़ अनुमोदन प्रक्रिया लागू की जाए।
इस बदलाव के बाद हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में भवन निर्माण अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित होगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।