भाजपा में किस बात से नाराज हैं अन्ना?


वो आंकड़ा, जो भाजपा को खल रहा
अन्नामलाई ने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 11 प्रतिशत था, जो हाल में हुए विधानसभा चुनावों में घटकर सिर्फ 3 प्रतिशत रह गया है. उन्होंने इस गिरावट की वजह AIADMK के साथ गठबंधन-जैसे कुछ गलत फैसलों को बताया. विधानसभा में पार्टी की ताकत 2021 के चार विधायकों से घटकर अब सिर्फ एक रह गई है. पूर्व IPS अधिकारी के करीबियों ने बताया है कि उन्होंने कुछ महीने पहले ही पार्टी छोड़ने और क्षेत्रीय आकांक्षाओं पर आधारित नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया. उन्हें लगता है कि राष्ट्रीय पार्टी का हिस्सा होने की वजह से उनके आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित हो जाती है. माना जा रहा है कि जब वह नई पार्टी बना लेंगे, तो भाजपा के भीतर दूसरी पंक्ति के नेताओं और कार्यकर्ताओं का पलायन हो सकता है. आज यानी 3 जून को अन्नामलाई खुद अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं. आज ही भाजपा नेतृत्व उनसे फिर मुलाकात कर सकता है. तमिलनाडु भाजपा की राजनीति इन दिनों एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के कारण चर्चा में है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे की खबरों ने राज्य की राजनीति के साथ-साथ भाजपा नेतृत्व की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। हालांकि अभी तक उनके इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दिल्ली में हुई बैठकों ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
अन्नामलाई हाल ही में दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। माना जा रहा है कि उन्होंने पार्टी की वर्तमान स्थिति और तमिलनाडु में संगठन की चुनौतियों को लेकर अपनी राय स्पष्ट रूप से रखी। इसी दौरान उनके इस्तीफे की चर्चाएं भी तेज हो गईं। बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व ने अन्नामलाई को तत्काल कोई बड़ा फैसला लेने से रोकने की कोशिश की है। पार्टी उन्हें तमिलनाडु में एक महत्वपूर्ण चेहरा मानती है और नहीं चाहती कि उनका संगठन से अलगाव पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो। इसी कारण उन्हें फिलहाल दिल्ली में रुकने के लिए कहा गया है। अन्नामलाई ने अपने कार्यकाल के दौरान तमिलनाडु में भाजपा को आक्रामक राजनीतिक पहचान दिलाने का प्रयास किया था। उनकी जनसभाएं, संगठनात्मक यात्राएं और विपक्षी दलों पर तीखे हमले उन्हें राज्य के प्रमुख नेताओं में शामिल करते रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नामलाई पार्टी की कुछ रणनीतिक फैसलों से संतुष्ट नहीं थे। विशेष रूप से गठबंधन राजनीति को लेकर उनकी अलग सोच बताई जा रही है। माना जा रहा है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। हाल के चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत और सीटों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। पार्टी के अंदर इस प्रदर्शन की समीक्षा की जा रही है और कई नेताओं का मानना है कि संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की आवश्यकता है। अन्नामलाई के समर्थकों का कहना है कि वह राज्य की राजनीति में स्वतंत्र और अधिक प्रभावी भूमिका निभाना चाहते हैं। इसी वजह से नई राजनीतिक संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। भाजपा नेतृत्व फिलहाल पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार अन्नामलाई के संपर्क में हैं और उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। तमिलनाडु भाजपा के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि अन्नामलाई पार्टी में बने रहते हैं तो संगठन को मजबूती मिल सकती है, जबकि उनके अलग होने की स्थिति में पार्टी को नए नेतृत्व और नई रणनीति की तलाश करनी पड़ सकती है। सभी की निगाहें अन्नामलाई और भाजपा नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और संभावित घोषणाओं से तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय हो सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल भाजपा ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।










