नीट परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान पार्टी की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका ने सरकार को चार सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों को स्वीकार कर लेती है, तो वे अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने पर विचार करेंगे। बैठक के दौरान सीजेपी ने अपनी पहली मांग में शिक्षाविद सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देने और उनके आवागमन पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाने की बात कही। इसके साथ ही दूसरी मांग में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेने की मांग की गई। पार्टी का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई विवादों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। तीसरी मांग के तहत नीट परीक्षा से जुड़े विवादों के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग रखी गई। वहीं चौथी मांग में दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति सुनिश्चित करने की बात कही गई। सीजेपी नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन शुरू से ही शांतिपूर्ण रहा है और वे सरकार के साथ संवाद के जरिए समाधान चाहते हैं। उनका दावा है कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक फैसला लेती है, तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा। पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की भी मांग की। वहीं, जेपी नड्डा ने प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात की जानकारी देते हुए कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें लिखित रूप में सौंपी हैं और सभी प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग करने की अपील की है। अब सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया और इन मांगों पर होने वाले फैसले पर टिकी हुई है।

सोनम वांगचुक को रिहा किया जाए और उनके मूवमेंट पर किसी तरह की रोक न रहे.
धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा लिया जाए.
नीट परीक्षा में बैठने वाले उन छात्रों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले, जिन्होंने आत्महत्या कर ली.
दिल्ली पुलिस तुरंत छात्रों पर अत्याचार रोके. बल प्रयोग का किसी भी तरह से इस्तेमाल न किया जाए.
शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में कई अहम मुद्दे उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि उनका आंदोलन शुरू से ही शांतिपूर्ण रहा है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहे हैं। ज्ञापन में सरकार से छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने और जल्द समाधान निकालने की अपील की गई है। सीजेपी ने अपने ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद, कथित पेपर लीक, तकनीकी समस्याएं और परीक्षा में देरी जैसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना समय की जरूरत है ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सके। पार्टी ने यह भी कहा कि परीक्षा से जुड़े विवादों का असर लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ा है। संगठन का दावा है कि लगातार सामने आ रही समस्याओं के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ा है। इसी वजह से सरकार को शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। ज्ञापन में आंदोलन की पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया गया है। सीजेपी के अनुसार, इस अभियान की शुरुआत 20 जून से की गई थी, जिसके बाद शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े। संगठन ने कहा कि वांगचुक ने लंबे समय तक भूख हड़ताल कर छात्रों के मुद्दों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से मांग की है कि उनके ज्ञापन में शामिल सभी प्रमुख मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाए। संगठन का कहना है कि यदि सरकार सकारात्मक कदम उठाती है, तो आंदोलन की दिशा पर आगे फैसला लिया जाएगा। फिलहाल छात्रों से जुड़े इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा लगातार जारी है।
मेरी अपील है कि धरने को समाप्त करें
नीट परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच पहली बार औपचारिक वार्ता हुई, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों का लिखित ज्ञापन भी सरकार को सौंपा। जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सुबह प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि पहले मौखिक बातचीत हुई और बाद में प्रतिनिधिमंडल ने लिखित याचिका सौंपी। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपना धरना समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करें। प्रदर्शनकारियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में पहली मांग शिक्षाविद सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देने और उनकी आवाजाही पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाने की रखी गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। ज्ञापन में दूसरी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। प्रतिनिधियों का आरोप है कि हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों, कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के मामलों में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना आवश्यक है ताकि छात्रों का भरोसा बहाल किया जा सके। तीसरी मांग के तहत प्रदर्शनकारियों ने उन परिवारों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है, जिनके बच्चों की कथित तौर पर परीक्षा संबंधी तनाव या विवादों के बाद मृत्यु हुई। प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को उचित सहायता और न्याय मिलना चाहिए। अब सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपनी चौथी प्रमुख मांग के रूप में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह के बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। संगठन ने सरकार से अपील की है कि प्रदर्शनकारियों के साथ संवेदनशील और संवादपूर्ण रवैया अपनाया जाए। सीजेपी नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन शुरू से ही अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। उनका दावा है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाना है। पार्टी ने कहा कि यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो आंदोलन समाप्त करने पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक माहौल में विस्तार से चर्चा हुई। पहले मौखिक बातचीत हुई और उसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का लिखित ज्ञापन सरकार को सौंपा। जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपना धरना समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश करेगी। इस बयान के बाद आंदोलन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो विरोध प्रदर्शन समाप्त होने की संभावना बन सकती है। वहीं, यदि बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचती, तो छात्रों से जुड़े इस मुद्दे पर आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियां आगे भी जारी रह सकती हैं।










