पंजाब के पटियाला से एक ऐसा सनसनीखेज और दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मां-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है। यहां एक कलयुगी मां ने अपनी ही 21 महीने की मासूम बच्ची के लगातार रोने से तंग आकर उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल हुई बच्ची ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और हर कोई इस क्रूरता को सुनकर हैरान है। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला की पहचान लवप्रीत कौर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों बच्ची लगातार रो रही थी और चुप होने का नाम नहीं ले रही थी। बच्ची को चुप कराने के तमाम प्रयास जब नाकाम रहे, तो मां अपना आपा खो बैठी। गुस्से और झुंझलाहट में आकर उसने घर में रखे तेज धारदार चाकू से अपनी ही जिगर के टुकड़े पर कई वार कर दिए। मासूम बच्ची मां के इस गुस्से को समझ भी नहीं पाई और लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ी। वारदात को अंजाम देने के बाद परिवार ने कानून के शिकंजे से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची। शुरुआत में इस जघन्य हत्याकांड को एक दुर्घटना या हादसा साबित करने का पूरा प्रयास किया गया। परिवार के सदस्यों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए कहानी गढ़ी कि बच्ची किसी हादसे का शिकार हुई है। इस चालबाजी का मकसद आरोपी मां को बचाना और पुलिस की जांच की दिशा को पूरी तरह से भटकाना था। जब पुलिस को बच्ची की मौत की सूचना मिली, तो शव की स्थिति को देखकर उन्हें गहरा संदेह हुआ। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन तफ्तीश शुरू कर दी। जांच के दौरान जब मृतका के पिता और आरोपी महिला के पति से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो वह ज्यादा देर तक झूठ नहीं टिक सका। पुलिस के मनोवैज्ञानिक दबाव और तीखे सवालों के आगे आखिरकार पति टूट गया और उसने रोते हुए पूरी सच्चाई बयां कर दी।
पति ने पुलिस के सामने कुबूल किया कि बच्ची की मौत कोई इत्तेफाक या हादसा नहीं थी, बल्कि उसकी पत्नी लवप्रीत कौर ने ही उसे बेरहमी से मौत के घाट उतारा था। उसने बताया कि वह बच्ची के रोने की आदत से बेहद परेशान आ चुकी थी और इसी वजह से उसने गुस्से में आकर इस खौफनाक कदम को अंजाम दिया। पति के इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद पुलिस के भी होश उड़ गए और तुरंत कार्रवाई की गई। पति के बयान और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर पटियाला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मां लवप्रीत कौर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू को भी अपने कब्जे में ले लिया है। महिला के खिलाफ हत्या की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या महिला किसी मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रही थी। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक मां, जिसे बच्चे का सबसे सुरक्षित आशियाना माना जाता है, वही अगर रक्षक से भक्षक बन जाए, तो समाज किस दिशा में जा रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों का रोना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इस बात पर इतनी हिंसक हो जाना किसी बड़ी मानसिक विकृति या गहरे गुस्से को दर्शाता है। पटियाला पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस वारदात को छिपाने और सबूतों को मिटाने में परिवार के किसी अन्य सदस्य की भी सक्रिय भूमिका थी। अगर जांच में किसी और की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से पूरे पटियाला और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। लोग 21 महीने की उस मासूम बच्ची के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं, जिसने दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और आरोपी महिला को सख्त से सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा खौफनाक कदम उठाने की हिम्मत न कर सके।
परिवार घटना को बताकर धोका दे रहा था।
गांव खेड़की में हुई इस खौफनाक वारदात के बाद पिछले मंगलवार की सुबह मृतका का पिता अपनी लहूलुहान बच्ची को बेहद नाजुक हालत में लेकर पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल पहुंचा था। बच्ची के शरीर से काफी खून बह चुका था और उसकी सांसें उखड़ रही थीं। हालांकि, डॉक्टरों ने जैसे ही बच्ची का परीक्षण किया, उन्होंने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल पहुँचने से पहले ही मासूम दम तोड़ चुकी थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने पुलिस को सूचित करने की प्रक्रिया शुरू की। कानून के शिकंजे और बदनामी से बचने के लिए परिवार ने डॉक्टरों के सामने एक बेहद सोची-समझी और काल्पनिक कहानी पेश की। पिता और परिजनों ने डॉक्टरों को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि यह महज एक घरेलू हादसा है। उन्होंने दावा किया कि बच्ची घर में खेल रही थी और खेलते-खेलते वह अचानक वहां रखे एक चाकू पर जा गिरी, जिससे उसे यह गंभीर चोटें आईं। परिवार पूरी कोशिश कर रहा था कि इस हत्या को एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का रूप दे दिया जाए। शुरुआती जांच में ही डॉक्टरों को परिवार की इस कहानी पर गहरा संदेह हो गया। बच्ची के शरीर पर बने घाव की स्थिति, गहराई और वार के निशान किसी हादसे की गवाही नहीं दे रहे थे। डॉक्टरों ने भांप लिया कि कोई भी बच्चा खेलते हुए इस तरह से चोटिल नहीं हो सकता। मामले की संदिग्धता और घावों की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बिना किसी देरी के तुरंत स्थानीय पुलिस को इस मामले की लिखित सूचना दे दी, जिसने आगे की तफ्तीश का रास्ता साफ किया। अस्पताल से मिली सूचना के बाद जब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की, तो परिवार की गढ़ी हुई कहानी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। पुलिस ने जब शव का मुआयना किया और डॉक्टरों से इनपुट लिए, तो मामला पूरी तरह से संदिग्ध नजर आया। इसके बाद पुलिस ने जब मृतका के पिता को हिरासत में लेकर कड़ाई से मनोवैज्ञानिक पूछताछ की, तो वह टूट गया। उसने कुबूल किया कि उसकी पत्नी ने ही गुस्से में आकर बच्ची पर चाकू से हमला किया था, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी मां को दबोच लिया।

विभिन्न बयानों से बढ़ा पुलिस का संदेह
अस्पताल प्रबंधन से मामले की गुप्त और संदिग्ध जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। पुलिस की एक विशेष टीम ने बिना कोई समय गंवाए फौरन मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मामले की प्रारंभिक जांच आरंभ कर दी। बच्ची के शव पर मौजूद निशानों और अस्पताल से मिले इनपुट के बाद पुलिस अधिकारियों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह मामला सामान्य दुर्घटना का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी क्रूर वारदात का है। जांच के पहले चरण में जब पुलिस ने घर के लोगों से घटनाक्रम को लेकर पूछताछ की, तो परिवार की गढ़ी हुई कहानी की परतें खुलने लगीं। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान परिवार के अलग-अलग सदस्यों के बयान एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न थे। कोई घटना का समय कुछ और बता रहा था, तो कोई चाकू के रखे होने की जगह को लेकर अलग बात कह रहा था। सभी के दावों में विरोधाभास और घबराहट को देखकर पुलिस का संदेह गहरा गया कि परिवार किसी बड़ी हकीकत को छुपाने की कोशिश कर रहा है। बयानों में आ रहे बदलावों को देखते हुए पुलिस ने अपनी रणनीति बदली। मामले की तह तक जाने और घटना की गहनता से जांच के लिए पुलिस ने शुक्रवार को परिवार के मुख्य सदस्यों को हिरासत में लिया और उनसे सख्ती से पूछताछ शुरू की। जब पुलिस ने मनोवैज्ञानिक तरीके से तीखे सवाल दागना शुरू किया, तो संदिग्धों के पास अपनी ही पुरानी बातों का कोई जवाब नहीं था। आखिरकार, पुलिस की इस कड़ाई के आगे उनका झूठ का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह गया। कड़ी पूछताछ और ठोस सबूतों के सामने आने के बाद आखिरकार परिवार के पैर उखड़ गए और उन्होंने सच उगल दिया। कलयुगी मां की इस खौफनाक करतूत का राजफाश होते ही पुलिस ने तुरंत आरोपी महिला को नामजद करते हुए उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बयानों का यह विरोधाभास ही इस केस का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसने एक मासूम बच्ची के कातिल को बेनकाब करने में सबसे अहम भूमिका निभाई।
पिता ने बताया सच, पत्नी डिप्रेशन से ग्रस्त है।
पुलिस की लगातार और गहन पूछताछ के सामने आखिरकार बच्ची का पिता ज्यादा देर तक टिक नहीं सका। कानूनी दबाव और पुलिसिया तफ्तीश के आगे उसका हौसला पस्त हो गया और वह अंदर से पूरी तरह टूट गया। उसने घुटने टेकते हुए पुलिस के सामने उस खौफनाक सच को कुबूल कर लिया, जिसे परिवार अब तक छुपाने की कोशिश कर रहा था। पिता ने रोते हुए स्पष्ट किया कि उसकी 21 महीने की मासूम बेटी की मौत कोई दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उसकी पत्नी ने ही इस जघन्य कृत्य को अंजाम दिया था। पिता ने पुलिस को दिए अपने आधिकारिक बयान में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसकी पत्नी और बच्ची की हत्यारी मां लवप्रीत कौर पिछले काफी लंबे समय से गंभीर मानसिक तनाव और डिप्रेशन (अवसाद) से जूझ रही है। उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था और इसके लिए उसका बाकायदा डॉक्टरी इलाज भी चल रहा था। इस खुलासे ने मामले में एक नया मोड़ ला दिया, जिससे यह साफ हुआ कि घर के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा था। घटना वाले दिन की कड़ियों को जोड़ते हुए पिता ने बताया कि उस सुबह मासूम बच्ची किसी बात को लेकर लगातार रो रही थी। डिप्रेशन से जूझ रही लवप्रीत कौर बच्ची के रोने की आवाज बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। लगातार रोने की वजह से वह अत्यधिक मानसिक दबाव और झुंझलाहट की स्थिति में आ गई। इसी दिमागी असंतुलन और बेकाबू गुस्से के कारण उसने अपना पूरा आपा खो दिया और घर में रखे धारदार चाकू को उठा लिया। मानसिक उन्माद की उस खौफनाक स्थिति में लवप्रीत ने अपनी ही रोती हुई निर्दोष बच्ची पर चाकू से ताबड़तोड़ जानलेवा हमले शुरू कर दिए। वह तब तक वार करती रही जब तक कि मासूम पूरी तरह लहूलुहान होकर शांत नहीं हो गई। पिता के इस कबूलनामे और पूरी कहानी के साफ होने के बाद पुलिस ने आरोपी मां के खिलाफ हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है, साथ ही पुलिस उसके मेडिकल और डिप्रेशन के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है।
2023 में विवाह हुआ था, मासूम एकल संतान थी।
पुलिस की गहन तफ्तीश में इस बदकिस्मत परिवार को लेकर कई और भावुक कर देने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आरोपी महिला लवप्रीत कौर और उसके पति का विवाह साल 2023 में बड़े ही अरमानों के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही उनके घर इस नन्हीं बच्ची की किलकारी गूंजी थी, जो कि इस जोड़े की एकमात्र संतान थी। इकलौती संतान होने के नाते वह पूरे परिवार की लाडली थी, लेकिन किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस मां ने उसे जन्म दिया, वही उसकी जान ले लेगी। इस खौफनाक वारदात के बाद हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह से तबाह हो गया है। अचानक उभरे मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) और मां के उस चंद मिनटों के बेकाबू गुस्से ने एक झटके में पूरे हंसते-खेलते संसार को उजाड़ कर रख दिया। एक तरफ जहां मासूम बच्ची हमेशा के लिए इस दुनिया से चली गई, वहीं दूसरी तरफ मां सलाखों के पीछे पहुंच चुकी है और पिता अपनी ही पत्नी की इस हैवानियत से गहरे सदमे में है। इस घटना ने पूरे इलाके के लोगों को भीतर तक हिलाकर रख दिया है। पटियाला पुलिस ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी मां लवप्रीत कौर को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने केवल हत्या की धारा ही नहीं, बल्कि शुरुआत में अपराध को हादसे का रूप देने और सच्चाई को छुपाने की कोशिश करने के आरोप में साक्ष्यों को नष्ट करने (तथ्य छुपाने) से संबंधित सख्त कानूनी धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया है। पुलिस पूरी मजबूती के साथ कोर्ट में केस फाइल करने की तैयारी कर रही है। पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की आगे की कानूनी कागजी कार्रवाई और सबूतों को कोर्ट के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी महिला के खिलाफ वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि अदालत में उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। इस दिल दहला देने वाले मामले ने एक बार फिर समाज में मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी और घरेलू स्तर पर बढ़ते मानसिक तनाव की गंभीर स्थिति को उजागर किया है।










