रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: राम रहीम की सजा पर हाईकोर्ट में सुनवाई, बैलिस्टिक सबूतों पर सवाल

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में दोषी करार दिए जा चुके डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने अपनी सजा के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की है।

करीब सात साल बाद इस केस की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े किए। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में कहा कि इस मामले में पेश किए गए बैलिस्टिक और फोरेंसिक सबूतों में कई तकनीकी खामियां हैं, जिन पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने बताया कि पोस्टमार्टम के समय मृतक के शरीर से जो गोली निकाली गई थी, उसे एम्स अस्पताल की सील लगाकर सुरक्षित रखा गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गोली सीलबंद थी, तो उसकी फॉरेंसिक जांच कैसे की गई।

वकीलों ने यह भी कहा कि जब यह सबूत ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया, तब भी वह सीलबंद था। इससे पहले की गई जांच पर संदेह पैदा होता है। बचाव पक्ष ने फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट को भी सवालों के घेरे में रखा।

इसके अलावा बचाव पक्ष का तर्क था कि जिस रिवॉल्वर से हत्या किए जाने की बात कही गई है, उससे बरामद गोलियों का आपसी मेल भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बैलिस्टिक लिंक कमजोर पड़ता है, जो इस केस में दोषसिद्धि का बड़ा आधार रहा है।

बचाव पक्ष ने अदालत से कहा कि आजीवन कारावास जैसी गंभीर सजा देने से पहले सभी सबूत पूरी तरह भरोसेमंद और संदेह से परे होने चाहिए।

फिलहाल हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है और अगली सुनवाई में अभियोजन पक्ष अपनी दलीलें रखेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत इन तकनीकी पहलुओं को कैसे देखती है और क्या राम रहीम को इस मामले में कोई राहत मिलती है या नहीं।

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