युवराज मेहता की मौत के बाद बड़ा फैसला, जिले में बनेंगी 6 जल पुलिस चौकियां

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक बेसमेंट में गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद पुलिस कमिश्नरेट ने जिले में जल सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद यह साफ हो गया कि जिले में जल दुर्घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने छह जल पुलिस चौकियों की स्थापना की योजना तैयार की है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य यमुना और हिंडन नदी, नहरों, घाटों और जल पर्यटन स्थलों पर श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करना भी इस पहल का अहम हिस्सा है।

धार्मिक आयोजनों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए फैसला

पुलिस अधिकारियों के अनुसार श्रावण मास की कांवड़ यात्रा, छठ पूजा, दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान नदी घाटों और नहरों पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे समय में जल दुर्घटनाओं, अवैध गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए जिले के रणनीतिक स्थानों पर जल पुलिस चौकियां स्थापित की जाएंगी।

कहां-कहां बनेंगी जल पुलिस चौकियां

योजना के तहत जिले के तीनों जोन में जल पुलिस चौकियां बनाई जाएंगी—

 

नोएडा जोन:

सेंट्रल नोएडा जोन:

ग्रेटर नोएडा जोन:

आपात स्थिति में तुरंत होगा रेस्क्यू

जल पुलिस चौकियों का मुख्य काम घाटों पर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, भीड़ प्रबंधन करना, बैरिकेडिंग लगाना और नावों की तय क्षमता के अनुसार संचालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा किसी भी दुर्घटना या आपदा की स्थिति में तुरंत बचाव कार्य किया जाएगा।

इसके लिए स्थानीय नाविकों, गोताखोरों और आपदा मित्रों के साथ समन्वय किया जाएगा। हर जल पुलिस चौकी पर प्रशिक्षित पुलिस बल के साथ रबर से बनी रेस्क्यू बोट, प्रशिक्षित बोट चालक, सहायक चालक और स्थानीय गोताखोर तैनात रहेंगे। राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग भी दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जनशक्ति बढ़ाने की भी व्यवस्था होगी।

जल चौकी होती तो बच सकती थी युवराज की जान

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि जिले में पहले से जल पुलिस चौकियां होतीं तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान बचाई जा सकती थी। वर्तमान में पुलिस के पास प्रशिक्षित तैराकों की कमी है, जिस कारण उन्हें गांवों में रहने वाले निजी गोताखोरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसके अलावा जिले में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। बड़ी घटनाओं के समय गाजियाबाद से बचाव दल को बुलाना पड़ता है, जिसमें कोहरा, बारिश, सर्दी और ट्रैफिक जाम के कारण काफी समय लग जाता है। जिस दिन युवराज के साथ हादसा हुआ, उस दिन घना कोहरा था, जिससे बचाव दल के पहुंचने में देरी हुई। अगर उस समय जल पुलिस चौकी होती, तो रेस्क्यू बोट, प्रशिक्षित चालक और गोताखोरों की मदद से युवराज को समय रहते बचाया जा सकता था।

यह नई योजना जिले में जल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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