मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब गंभीर रूप से सामने आने लगा है। इस संघर्ष ने न सिर्फ सैन्य हालात को बिगाड़ा है, बल्कि मानव जीवन, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डाला है।
मानवीय संकट गहराया
युद्ध के पहले ही हफ्ते में हालात बेहद भयावह हो गए।ईरान में अमेरिकी और इस्राइली हमलों के कारण 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
सबसे दर्दनाक घटना दक्षिणी शहर मिनाब में सामने आई, जहां एक लड़कियों के स्कूल पर बमबारी में 170 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। इनमें ज्यादातर बच्चियां थीं।
वहीं लेबनान में बढ़ती हिंसा के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, जबकि लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
आर्थिक असर: तेल और उड़ानों पर बड़ा प्रभाव
इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
युद्ध से पहले जहां कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, वहीं अब यह 90 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
इसके अलावा, भारत समेत कई देशों ने पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र में उड़ानों को कम कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
दूसरा हफ्ता: युद्ध और हुआ तेज
युद्ध के दूसरे हफ्ते तक यह साफ हो गया कि यह कोई छोटा सैन्य ऑपरेशन नहीं है और हालात जल्द सामान्य होने वाले नहीं हैं।
सैन्य घटनाएं
- इराक में अमेरिका का एक ईंधन भरने वाला विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें चालक दल के 6 सदस्य मारे गए।
- तेहरान में पहली बार तेल डिपो को निशाना बनाया गया, जिसके बाद शहर में “काली बारिश” जैसी स्थिति बन गई।
- ईरान ने होर्मुज के पास जहाजों को निशाना बनाया और सऊदी अरब पर भी हमले किए।
लेबनान में बढ़ी हिंसा
ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्ला ने इस्राइल पर रॉकेट हमले किए, जिसके जवाब में इस्राइल ने लेबनान में जमीनी और हवाई हमले तेज कर दिए।
बेरूत और उसके आसपास के इलाकों में भारी बमबारी हुई।
राजनीतिक असर: नया नेतृत्व और कड़ा रुख
इस बीच ईरान में बड़ा राजनीतिक बदलाव भी देखने को मिला।दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया।
उन्होंने साफ कहा है कि अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ जंग जारी रहेगी और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा जाएगा।
मिडिल ईस्ट का यह युद्ध अब एक बड़े वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है।जहां एक तरफ लगातार बढ़ती मौतें चिंता का विषय हैं, वहीं दूसरी तरफ तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका असर पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस युद्ध को रोका जा सकेगा या यह और बड़े स्तर पर फैल सकता है।











