लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने गाजीपुर गांव को जोड़ने वाले काजवे की कमजोर स्थिति को एक बार फिर सामने ला दिया है। सुखना-चो में तेज बहाव के कारण काजवे के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे इसका ढांचा प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद मार्ग पर सफर करना पहले की तुलना में अधिक जोखिम भरा हो गया है और प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की जा रही है। नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार काजवे की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है। पहले भी इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर संबंधित विभागों को अवगत कराया गया था और आवश्यक सुधार कार्य की जरूरत बताई गई थी। मौजूदा हालात को देखते हुए अधिकारियों ने विशेष सतर्कता बरतने और भारी वाहनों की आवाजाही सीमित रखने की सलाह दी है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके। बारिश के बाद क्षेत्र के कई हिस्सों में सड़क के आसपास कटाव बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर मानसून में इसी तरह की समस्या सामने आती है, जिससे गांव के लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय मजबूत और दीर्घकालिक ड्रेनेज तथा संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है। प्रशासन की ओर से काजवे की मरम्मत की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। योजना के तहत क्षतिग्रस्त हिस्सों को मजबूत करने, धंसे हुए पाइपों को बदलने और पूरे मार्ग को सुरक्षित बनाने का कार्य किया जाएगा। संबंधित विभागों का कहना है कि मरम्मत पूरी होने तक लोगों से सावधानी बरतने और निर्धारित सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मरम्मत कार्य जल्द शुरू किया जाए ताकि बरसात के मौसम में लोगों को सुरक्षित आवागमन मिल सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते हैं तो भविष्य में जलभराव, कटाव और दुर्घटनाओं जैसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

35 लाख रुपये से होगा काजवे की मुरम्मत
गाजीपुर काजवे की खराब होती स्थिति को देखते हुए नगर परिषद ने इसके पुनर्निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 35 लाख रुपये की लागत से काजवे की मरम्मत कराई जाएगी। योजना के तहत क्षतिग्रस्त हिस्सों को मजबूत करने के साथ धंसे हुए पाइपों को बदला जाएगा, ताकि मार्ग को दोबारा सुरक्षित बनाया जा सके और भविष्य में बारिश के दौरान जोखिम कम हो। मरम्मत कार्य शुरू होने तक प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारी वाहनों की आवाजाही रोकने की सिफारिश की है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में बड़े वाहनों का दबाव काजवे को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए उनके पास केवल दो प्रमुख रास्ते हैं। एक रास्ता सुखना-चो पर बने इसी काजवे से होकर गुजरता है, जबकि दूसरा रेलवे अंडरपास के माध्यम से जुड़ता है। मानसून के दौरान काजवे पर पानी बहने लगता है और अंडरपास में जलभराव हो जाता है, जिससे दोनों मार्ग प्रभावित होने पर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या दोहराई जाती है। स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और किसानों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय मजबूत और दीर्घकालिक समाधान अपनाया जाना चाहिए, ताकि हर मानसून में इस तरह की स्थिति पैदा न हो। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात खत्म होने का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि समय पर कार्रवाई से संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और गांव के लोगों के लिए सुरक्षित एवं सुचारु आवागमन सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने भविष्य में काजवे की नियमित निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने की मांग की है।