परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का 9वां संस्करण आज सुबह 10 बजे से शुरू हो चुका है। इस विशेष संवाद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे बातचीत कर रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को परीक्षा से जुड़े तनाव से मुक्त करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और करियर से जुड़े सवालों का समाधान देना है।
इस बार परीक्षा पे चर्चा को नए और इंटरैक्टिव अंदाज में आयोजित किया गया है, जिसमें देश के कोने-कोने से छात्रों को जोड़ने और उनके सवालों के सीधे जवाब देने पर खास जोर दिया गया है।
विकसित भारत की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर: पीएम मोदी
छात्रों से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। इसके लिए युवाओं को अपने अंदर कौशल, आत्मविश्वास और अच्छी सेहत विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए मेड इन इंडिया को अपनाना बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी ने साफ-सफाई को लेकर भी युवाओं से जिम्मेदारी निभाने की अपील की और कहा कि खुद स्वच्छ रहना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना राष्ट्र निर्माण का अहम हिस्सा है। इसके साथ ही उन्होंने समय की अहमियत पर जोर देते हुए भारतीय मानक समय को लेकर सोच बदलने की आवश्यकता बताई।

विदेशी उत्पादों की जगह भारतीय सामान अपनाने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसे उत्पाद शामिल हैं, जो विदेशों में बने होते हैं। हमें धीरे-धीरे भारतीय उत्पादों को अपनाने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम खुद अपने देश की चीजों पर भरोसा दिखाएंगे, तभी दुनिया भी भारतीय उत्पादों को सम्मान देगी।
पढ़ाने की गति छात्रों की समझ के अनुसार हो: पीएम मोदी
कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने पढ़ाई की गति को लेकर चिंता जताई। छात्र ने कहा कि कई बार वह शिक्षक की पढ़ाने की गति से तालमेल नहीं बिठा पाता, जिससे पिछला पाठ भी छूट जाता है और आगे की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
इस सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनका जवाब खास तौर पर शिक्षकों के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को हमेशा छात्रों की गति से सिर्फ एक कदम आगे रहना चाहिए, उससे ज्यादा नहीं। इससे छात्रों की समझ बेहतर होगी और सीखने की प्रक्रिया आसान बनेगी।
लक्ष्य ऐसा हो जो हासिल किया जा सके
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो हमारी पहुंच में हो, लेकिन उसे पाने के लिए हमें थोड़ी मेहनत करनी पड़े। लक्ष्य इतना दूर नहीं होना चाहिए कि व्यक्ति हताश हो जाए। सही लक्ष्य और सही दिशा में किया गया प्रयास सफलता की कुंजी है।
छोटी आदतें बड़े सपनों को पूरा करती हैं
एक छात्र द्वारा पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सपनों को पूरा करने के लिए सबसे पहले महान लोगों की जीवनियां पढ़नी चाहिए। इससे यह समझ आता है कि जो लोग आज सफल हैं, वे भी कभी सामान्य परिस्थितियों से ही आगे बढ़े थे।
उन्होंने कहा कि जीवनियां पढ़ने से यह सीख मिलती है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि लगातार मेहनत और धैर्य से सीढ़ी दर सीढ़ी हासिल होती है।
सिर्फ सपने नहीं, कर्म जरूरी है
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि सपने देखना गलत नहीं है, बल्कि सपने देखना जरूरी है। लेकिन केवल सपनों में खोए रहना किसी काम का नहीं होता। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता कर्म से ही मिलती है।
पीएम मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि जहां हैं, वहीं से मेहनत शुरू करें। सही लगन और परिश्रम से किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल की जा सकती है।
सुविधाएं नहीं, सोच आगे बढ़ाती है
परीक्षा पे चर्चा 2026 के दौरान एक छात्र ने छोटे घर और सीमित संसाधनों में पढ़ाई की कठिनाइयों को साझा किया। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि सुविधाएं न हों, तब भी क्षमता विकसित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि कई छात्र छोटे गांवों और सीमित संसाधनों से निकलकर बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन करते हैं। मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से कोई भी छात्र आगे बढ़ सकता है।
गेमिंग में करियर पर पीएम मोदी की सलाह
एक छात्र ने गेमिंग में करियर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से मार्गदर्शन मांगा। छात्र ने कहा कि समाज और परिवार उसे केवल पढ़ाई पर ध्यान देने को कहते हैं, जबकि उसका मन गेमिंग में है।
इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शुरुआत में माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है। उन्होंने छात्र को सलाह दी कि शांत रहकर मेहनत करें और खुद को साबित करें। पीएम मोदी ने कहा कि जब आप अपने क्षेत्र में सफलता हासिल कर लेते हैं और पहचान बनाते हैं, तो वही सफलता परिवार के लिए गर्व का कारण बन जाती है।