दिल्ली में पहली बार क्लाउड सीडिंग का परीक्षण: प्रदूषण कम करने के लिए कृत्रिम बारिश आज संभव”

दिल्ली में मंगलवार को पहली बार क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) का परीक्षण होगा। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि यह परीक्षण प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके लिए कानपुर से विशेष विमान भेजा जाएगा, जो उपयुक्त मौसम की स्थिति में उड़ान भरेगा।

परीक्षण का विवरण

क्लाउड सीडिंग क्या है?

क्लाउड सीडिंग, जिसे कृत्रिम वर्षा भी कहा जाता है, एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें बादलों में विशेष रसायनों का छिड़काव करके वर्षा कराई जाती है। यह तकनीक मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहां प्राकृतिक वर्षा कम होती है।

रसायन का छिड़काव: बादलों में सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड या शुष्क बर्फ छोड़ा जाता है।

  1. संघनन: ये रसायन जलवाष्प को आकर्षित करते हैं और पानी की बूंदों या बर्फ के क्रिस्टल में बदलते हैं।
  2. वर्षा: जब बूंदें पर्याप्त भारी हो जाती हैं, तो वे पृथ्वी पर गिरती हैं।

प्रदूषण पर प्रभाव

क्लाउड सीडिंग सीधे प्रदूषण को नहीं हटाती, लेकिन वर्षा के माध्यम से हवा में मौजूद धूल, पराग और अन्य कण नीचे गिर जाते हैं। इस प्रकार, यह अप्रत्यक्ष रूप से वायु गुणवत्ता सुधार में मदद कर सकती है।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईटीओ घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया।

क्लाउड सीडिंग हर बार सफल नहीं होती।

 

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