India

थमा अबू धाबी सेंटर विवाद

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) को लेकर आए दिन नए मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन हाल ही में नागपुर के एक छात्र को विदेश (अबू धाबी) में परीक्षा केंद्र अलॉट होने का मामला सोशल मीडिया पर खूब गरमाया हुआ था। इस अजीबो-गरीब घटनाक्रम पर चौतरफा घिरी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अब एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनटीए के आधिकारिक बयान के बाद इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ मिल गया है, जिसने तकनीकी खराबी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। शुरुआती दौर में इस घटना को एनटीए के सिस्टम की एक बड़ी लापरवाही और तकनीकी गड़बड़ी (Technical Glitch) के रूप में देखा जा रहा था। नागपुर में रहने वाले छात्र के लिए अचानक सात समंदर पार का सेंटर अलॉट होना हर किसी के लिए हैरान करने वाला था। सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर एनटीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे कि आखिर भारत में रहने वाले एक परीक्षार्थी का सेंटर बिना किसी वजह के खाड़ी देश में कैसे ट्रांसफर हो सकता है। इस विवाद पर से पर्दा उठाने के लिए एनटीए ने जब अपने वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड्स और डिजिटल लॉग्स की बारीकी से जांच की, तो सच कुछ और ही निकला। एजेंसी ने साफ किया है कि यह कोई तकनीकी चूक नहीं थी, बल्कि छात्र के रजिस्टर्ड लॉगिन क्रेडेंशियल्स (यूज़र आईडी और पासवर्ड) का उपयोग करके परीक्षा केंद्र के विकल्प को बदला गया था। एनटीए के डेटा के अनुसार, छात्र के डैशबोर्ड से ही अबू धाबी के परीक्षा केंद्र का चयन किया गया था, जिसके बाद सिस्टम ने नियमों के मुताबिक उसे वह सेंटर अलॉट कर दिया। इस खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि गलती सिस्टम की तरफ से नहीं, बल्कि यूज़र एंड (छात्र के स्तर) पर हुई थी। हालांकि, यह अभी भी जांच का विषय है कि यह बदलाव छात्र ने खुद अनजाने में किया, किसी साइबर कैफे की गलती से हुआ या फिर उसके अकाउंट के साथ कोई छेड़छाड़ की गई थी। इस खुलासे ने उन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है जिसमें परीक्षा कराने वाली एजेंसी की साख पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। इन सब के बीच, सबसे राहत की बात यह रही कि एनटीए ने इस संवेदनशील मामले में कड़ा रुख अपनाने के बजाय ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ (छात्र सर्वोपरि) की नीति अपनाई। परीक्षा शुरू होने से महज 48 घंटे पहले छात्र की तरफ से केंद्र बदलने का अनुरोध मिला था। छात्र के भविष्य और मानसिक तनाव को देखते हुए, एनटीए ने तत्काल कदम उठाया और उसे नागपुर में ही एक नया परीक्षा केंद्र अलॉट कर दिया। एजेंसी के इस मानवीय फैसले की वजह से छात्र का साल बर्बाद होने से बच गया और वह अपने घरेलू शहर में ही परीक्षा दे सका।

छात्र के लॉगिन से हुआ था बदलाव

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) के केंद्र आवंटन को लेकर उपजा विवाद अब पूरी तरह से साफ हो चुका है। नागपुर के एक परीक्षार्थी को भारत के बजाय सीधे अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात) का परीक्षा केंद्र मिलने पर जो हंगामा खड़ा हुआ था, उस पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने एक और बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी अपडेट जारी किया है। इस नए खुलासे ने सिस्टम की खराबी के बचे-कुचे दावों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया है और यह साबित कर दिया है कि यह बदलाव पूरी तरह से योजनाबद्ध या मानवीय चूक का परिणाम था। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब परीक्षा की तारीख 21 जून तय होने के बाद एनटीए ने छात्रों की सुविधा के लिए ‘सिटी करेक्शन विंडो’ (City Correction Window) ओपन की थी। इस विंडो का उद्देश्य उन छात्रों को राहत देना था जो अपने परीक्षा शहर में बदलाव करना चाहते थे। इसी अवधि के दौरान, संबंधित छात्र के अकाउंट से लॉग-इन किया गया और परीक्षा केंद्र के रूप में नागपुर की जगह सीधे सात समंदर पार अबू धाबी का विकल्प चुन लिया गया। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब एनटीए ने अपने डिजिटल सुरक्षा और लॉग रिकॉर्ड्स की गहराई से फॉरेंसिक जांच की। जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड्स में लगातार एक ही ‘सिंगल-यूज़र एक्सेस पैटर्न’ (Single-User Access Pattern) दर्ज हुआ। इसका सीधा मतलब यह है कि छात्र के रजिस्टर्ड यूज़र आईडी और पासवर्ड के ज़रिए एक ही डिवाइस या तय पैटर्न से अकाउंट को एक्सेस किया गया था, जो किसी बाहरी हैकिंग या सिस्टम के अचानक ऑटो-अपडेट होने की संभावना को पूरी तरह नकारता है। इस तकनीकी विश्लेषण से यह साफ है कि लॉगिन क्रेडेंशियल्स का उपयोग बेहद सामान्य और नियमित तरीके से किया गया था, जैसा कि एक सामान्य यूज़र करता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या छात्र ने खुद अनजाने में या किसी गलतफहमी के कारण विदेशी केंद्र का चयन कर लिया, या फिर फॉर्म भरते समय किसी साइबर कैफे या तीसरे व्यक्ति ने बिना सोचे-समझे यह बड़ी गलती कर दी। बहरहाल, एनटीए के इस पुख्ता डेटा ने यह साफ कर दिया है कि उनकी तरफ से परीक्षा पोर्टल के संचालन में कोई तकनीकी खामी नहीं थी। इस पूरे विवाद का अंत हालांकि बेहद सकारात्मक रहा। परीक्षा से ठीक 48 घंटे पहले जब छात्र और उसके परिवार को इस बड़ी चूक का अहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत एनटीए से गुहार लगाई। एजेंसी ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए डिजिटल रिकॉर्ड्स की सच्चाई के बावजूद छात्र के भविष्य को प्राथमिकता दी। ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ (छात्र सर्वोपरि) दृष्टिकोण के तहत आपातकालीन स्थिति में छात्र का सेंटर दोबारा बदलकर नागपुर ही कर दिया गया, जिससे परीक्षार्थी बिना किसी मानसिक तनाव के अपने गृह नगर में परीक्षा में शामिल हो सका।

तीन बार चेक किया गया था सेंटर

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) में नागपुर के एक छात्र को अबू धाबी का परीक्षा केंद्र अलॉट होने का मामला अब पूरी तरह से साफ हो चुका है। इस पूरे विवाद में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अब तक का सबसे बड़ा और पुख्ता डिजिटल सबूत पेश किया है। एनटीए के नए डेटा विश्लेषण से यह साफ हो गया है कि परीक्षा केंद्र का विदेशी शहर में बदलना कोई एक बार की मानवीय चूक या ‘क्लिक मिस्टेक’ भी नहीं थी, बल्कि इस विकल्प को बकायदा जांचा और परखा गया था। एनटीए द्वारा जारी किए गए ताजा वेब-लॉग्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स के अनुसार, छात्र के रजिस्टर्ड क्रेडेंशियल्स (यूज़र आईडी और पासवर्ड) का उपयोग करके न सिर्फ परीक्षा केंद्र को बदला गया, बल्कि इसके बाद की गतिविधियों ने सबको हैरान कर दिया है। सिस्टम के रिकॉर्ड्स बताते हैं कि लॉगिन करने के बाद केंद्र के रूप में अबू धाबी का चयन किया गया और इसके बाद दो अलग-अलग मौकों पर इसका ‘प्रीव्यू’ (पूर्वावलोकन) भी देखा गया था। इसका सीधा मतलब यह है कि सिस्टम में कुल 3 मौकों पर यह बात दर्ज हुई कि परीक्षा केंद्र नागपुर से बदलकर अबू धाबी किया जा रहा है। पहली बार में सेंटर बदला गया और अगली दो बार क्रेडेंशियल्स के ज़रिए स्क्रीन पर यह कन्फर्म किया गया कि चुना गया केंद्र अबू धाबी ही है। इस पुख्ता डेटा के सामने आने के बाद अब तकनीकी खराबी या सिस्टम की लापरवाही के आरोपों में रत्ती भर भी दम नहीं रह गया है। इस खुलासे के बाद अब सारा ध्यान ‘यूज़र एंड’ यानी छात्र के स्तर पर टिक गया है। एक ही सिंगल-यूज़र पैटर्न से तीन बार पोर्टल पर यह गतिविधि होना यह दर्शाता है कि फॉर्म में बदलाव करने वाले व्यक्ति को पूरी तरह पता था कि स्क्रीन पर क्या दिख रहा है। अब यह जांच का विषय है कि क्या छात्र ने किसी भारी गलतफहमी के तहत ऐसा किया, या फिर जिस साइबर कैफे या बाहरी व्यक्ति से यह फॉर्म अपडेट कराया गया था, उसने छात्र के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए इतनी बड़ी लापरवाही को अंजाम दिया। इस पूरे घटनाक्रम में एनटीए की भूमिका की तारीफ भी हो रही है। डिजिटल रिकॉर्ड्स से यह साबित होने के बाद भी कि गलती छात्र की तरफ से हुई थी, एजेंसी ने सख्त रवैया नहीं अपनाया। परीक्षा से मात्र 48 घंटे पहले आए अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए एनटीए ने ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ (छात्र सर्वोपरि) नीति के तहत छात्र का सेंटर वापस नागपुर अलॉट कर दिया। इस त्वरित और मानवीय फैसले के कारण छात्र का साल खराब होने से बच गया और वह बिना किसी कानूनी या मानसिक उलझन के अपनी परीक्षा दे सका।

48 घंटे पहले मिला था अनौपचारिक अनुरोध

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) में नागपुर के एक छात्र का परीक्षा केंद्र अचानक अबू धाबी अलॉट होने के मामले में हर दिन नए और दिलचस्प खुलासे हो रहे हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अब इस बात की सटीक टाइमलाइन साझा की है कि आखिर परीक्षा से ठीक पहले क्या हुआ था। एनटीए के मुताबिक, उन्हें इस गंभीर चूक का पता तब चला जब परीक्षा शुरू होने में महज 48 घंटे का समय बचा था, जिसके बाद एजेंसी ने बेहद तत्परता से काम किया। एनटीए द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 19 जून की शाम को उनके पास एक ‘अनौपचारिक अनुरोध’ (Informal Request) आया था। इस अनुरोध में बताया गया कि नागपुर का एक परीक्षार्थी बेहद परेशान है क्योंकि उसका परीक्षा केंद्र भारत के बजाय अबू धाबी (UAE) दिखा रहा है। चूंकि परीक्षा की तारीख 21 जून तय थी, इसलिए 19 जून की शाम को यह जानकारी मिलना प्रशासनिक रूप से एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि परीक्षा की सभी तैयारियां और सिटिंग अरेंजमेंट पहले ही फाइनल हो चुके थे। इस अनौपचारिक शिकायत या अनुरोध पर एनटीए ने बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत एक्शन लिया। आमतौर पर सरकारी या राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में तय समय-सीमा (Correction Window) बीत जाने के बाद ऐसे बदलाव करना नियमों के खिलाफ होता है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता और छात्र के मानसिक तनाव को देखते हुए अधिकारियों ने इस पर तुरंत विचार किया। एनटीए ने अपने डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच के साथ-साथ बैकएंड पर छात्र को राहत देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। डिजिटल डेटा की जांच में यह पहले ही साफ हो चुका था कि छात्र के रजिस्टर्ड यूज़र आईडी और पासवर्ड से तीन बार पोर्टल एक्सेस करके अबू धाबी का विकल्प चुना और कन्फर्म किया गया था। यानी तकनीकी रूप से गलती यूज़र एंड पर ही थी। इसके बावजूद, एनटीए ने किसी सख्त कानूनी या तकनीकी रुख को अपनाने के बजाय पूरी तरह से मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। एजेंसी ने माना कि इस वक्त छात्र की गलती खोजने से ज्यादा जरूरी उसका साल बचाना और उसे परीक्षा में बैठने का मौका देना है। एनटीए ने ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ (छात्र सर्वोपरि) की अपनी स्थापित नीति पर अमल करते हुए युद्ध स्तर पर काम किया। 19 जून की देर शाम को मिले इस अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए, चंद घंटों के भीतर छात्र के लिए नागपुर में ही एक नया परीक्षा केंद्र अलॉट कर दिया गया। एनटीए के इस त्वरित और संवेदनशील फैसले की वजह से एक होनहार छात्र का पूरा साल बर्बाद होने से बच गया, और वह 21 जून को बिना किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की भागदौड़ या मानसिक तनाव के अपने ही शहर में परीक्षा दे सका।

तुरंत लिया एक्शन और पिता से संपर्क किया

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) के परीक्षा केंद्र आवंटन से जुड़ा नागपुर का विवाद अब अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुका है। डिजिटल रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच करने के बाद जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को पुख्ता सबूत मिल गए कि गलती सिस्टम की नहीं बल्कि यूज़र एंड (छात्र के स्तर) पर हुई थी, तब भी एजेंसी ने दंडात्मक या सख्त रुख नहीं अपनाया। बल्कि, इसके बाद एनटीए के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जो सक्रियता दिखाई, उसने एक छात्र का भविष्य दांव पर लगने से बचा लिया। तकनीकी फॉरेंसिक जांच में यह साफ हो चुका था कि ‘सिटी करेक्शन विंडो’ के दौरान छात्र के ही रजिस्टर्ड आईडी-पासवर्ड से तीन बार पोर्टल एक्सेस करके अबू धाबी का चयन और प्रीव्यू कन्फर्म किया गया था। नियमों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव करने के लिए परीक्षा एजेंसी बाध्य नहीं थी, क्योंकि चूक पूरी तरह से छात्र या उसके फॉर्म भरने वाले की तरफ से दर्ज की गई थी। इसके बावजूद, एनटीए ने इस मामले में प्रशासनिक औपचारिकता से ऊपर उठकर काम करने का फैसला किया। 19 जून की शाम जब परीक्षा में केवल दो दिन का समय बचा था और एनटीए को इस गंभीर मानवीय चूक का अनौपचारिक पता चला, तो उनके कर्मचारियों ने तुरंत एक्शन मोड में काम शुरू किया। तकनीकी रूप से छात्र की गलती साबित होने के बाद भी, एनटीए की टीम ने उसी शाम तत्काल छात्र के पिता से सीधे फोन पर संपर्क साधा। परीक्षा के ऐन वक्त पर राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी से अचानक आए इस फोन कॉल ने न सिर्फ पीड़ित परिवार की घबराहट को दूर किया, बल्कि उन्हें एक नई उम्मीद भी दी। एनटीए के कर्मचारियों ने छात्र के पिता से बात कर पूरी स्थिति को स्पष्ट किया और उन्हें समझाया कि चूंकि रिकॉर्ड्स में गलती उनके स्तर से हुई है, इसलिए केंद्र में दोबारा बदलाव करने के लिए एक आवश्यक और वैध ‘औपचारिक प्रक्रिया’ (Formal Process) को तुरंत पूरा करना होगा। अधिकारियों के मार्गदर्शन में छात्र के पिता ने बिना कोई समय गंवाए उन सभी जरूरी दस्तावेजी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को उसी रात पूरा कर दिया, जो आपातकालीन स्थिति में केंद्र बदलने के लिए अनिवार्य थीं। जैसे ही परिवार की ओर से औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई, एनटीए के बैकएंड स्टाफ ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए छात्र के लिए नागपुर में ही एक नया परीक्षा केंद्र अलॉट कर दिया। ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ (छात्र सर्वोपरि) के अपने मूल मंत्र को धरातल पर उतारते हुए एनटीए ने यह सुनिश्चित किया कि 21 जून को होने वाली परीक्षा में छात्र बिना किसी मानसिक दबाव या अंतरराष्ट्रीय यात्रा के तनाव के शामिल हो सके। एनटीए की इस त्वरित और संवेदनशील कार्यप्रणाली की अब हर तरफ सराहना हो रही है।

99.5% छात्रों को मिला मनपसंद शहर

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) के परीक्षा केंद्र आवंटन को लेकर मचे घमासान के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक डेटा जारी किया है। नागपुर के एक छात्र का सेंटर मानवीय चूक के कारण अबू धाबी होने और फिर उसे आपातकालीन स्थिति में बदले जाने के बाद, एजेंसी ने यह साफ किया है कि उसका पूरा सिस्टम कितना पारदर्शी और छात्र-अनुकूल रहा है। एनटीए के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, परीक्षा री-शेड्यूल होने के बाद खोली गई सुधार विंडो का देश भर के लाखों छात्रों ने लाभ उठाया है। एजेंसी द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब परीक्षा की नई तारीख 21 जून तय की गई और उसके बाद ‘सिटी करेक्शन विंडो’ (City Correction Window) को दोबारा ओपन किया गया, तब लगभग 3.2 लाख (3 लाख 20 हजार) उम्मीदवारों ने अपने आवेदनों में सुधार किया। इस विंडो का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों को राहत देना था, जो परीक्षा की तारीख बदलने के कारण अपने परीक्षा शहर या अन्य विवरणों को अपडेट करना चाहते थे। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का पोर्टल पर आना यह दर्शाता है कि यह सुविधा परीक्षार्थियों के लिए कितनी जरूरी थी। इस पूरे डेटा में सबसे राहत देने वाली और चौंकाने वाली बात यह है कि एनटीए ने इस बार केंद्र आवंटन में सटीकता का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। आंकड़ों के मुताबिक, सुधार विंडो का उपयोग करने वाले कुल छात्रों में से 99.5% से भी अधिक उम्मीदवारों को उनके द्वारा चुनी गई ‘पहली पसंद’ (First Choice) का ही परीक्षा शहर आवंटित किया गया है। यह आंकड़ा साबित करता है कि एनटीए का एल्गोरिदम और सिटिंग अरेंजमेंट सिस्टम छात्रों की प्राथमिकताओं को पूरा करने में लगभग शत-प्रतिशत सफल रहा है। इतने बड़े पैमाने पर सटीक आवंटन के बाद, एनटीए ने परोक्ष रूप से यह भी साफ कर दिया है कि नागपुर के छात्र का सेंटर अबू धाबी पहुंचना किसी भी तरह से सिस्टम का फॉल्ट नहीं था। जब 99.5% से अधिक छात्रों को उनकी पसंदीदा जगह मिली, तो उस एक छात्र के मामले में भी सिस्टम ने वही काम किया जो उसके डैशबोर्ड से कमांड दी गई थी। छात्र के क्रेडेंशियल्स से तीन बार पोर्टल पर अबू धाबी का चयन और प्रीव्यू देखा गया था, जिसे सिस्टम ने उसकी पहली पसंद मानते हुए अलॉट कर दिया था। 0.5% से भी कम मामलों में जहां विसंगतियां या मानवीय भूलें सामने आईं, वहां एनटीए ने बेहद संवेदनशील रुख दिखाया। नागपुर के मामले में 19 जून की शाम को मिले अनुरोध के बाद एजेंसी के कर्मचारियों ने खुद छात्र के पिता से संपर्क किया, औपचारिकताएं पूरी करवाईं और 21 जून की परीक्षा से ठीक पहले केंद्र को वापस नागपुर शिफ्ट कर दिया। कुल मिलाकर, एनटीए का यह विशाल डेटा और उनका त्वरित रिस्पॉन्स यह दिखाता है कि राष्ट्रीय स्तर की इतनी बड़ी परीक्षा को पारदर्शी और तनावमुक्त बनाने के लिए एजेंसी ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ नीति पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

एनटीए का स्टूडेंट-फर्स्टअप्रोच

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) के परीक्षा केंद्र आवंटन से जुड़े नागपुर के चर्चित मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। डिजिटल रिकॉर्ड्स से यह साबित होने के बाद भी कि अबू धाबी का केंद्र खुद छात्र के क्रेडेंशियल्स से चुना गया था, एनटीए ने छात्र के हित में बड़ा फैसला लिया। एजेंसी ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट रूप से कहा है, “हमारी प्राथमिकता यह है कि किसी भी प्रशासनिक संदेह या भ्रम के कारण कोई भी उम्मीदवार परीक्षा देने से न चूके।” एनटीए का यह बयान उसकी छात्र-केंद्रित कार्यप्रणाली को दर्शाता है। एजेंसी ने माना कि परीक्षा के अंतिम समय में छात्र और उसके परिवार का मानसिक रूप से तनावमुक्त होना बेहद जरूरी है। भले ही तकनीकी लॉग्स में गलती यूज़र एंड (छात्र के स्तर) पर दर्ज थी, लेकिन परीक्षा से ठीक 48 घंटे पहले उपजे इस भ्रम या मानवीय चूक के कारण किसी भी परीक्षार्थी का पूरा साल खराब नहीं होना चाहिए। इसी सोच और ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ (छात्र सर्वोपरि) नीति के तहत एनटीए ने छात्र के अनौपचारिक अनुरोध को बेहद गंभीरता से लिया। इसके बाद, एनटीए के कर्मचारियों ने सक्रियता दिखाते हुए 19 जून की शाम को ही छात्र के पिता से संपर्क किया और आपातकालीन स्थिति में केंद्र बदलने के लिए जरूरी सभी औपचारिकताओं को रात भर में पूरा करवाया। जैसे ही परिवार की ओर से औपचारिकताएं पूरी हुईं, एजेंसी ने तुरंत एक्शन लेते हुए छात्र का परीक्षा केंद्र अबू धाबी से बदलकर वापस उसके गृह नगर नागपुर में अलॉट कर दिया। एनटीए की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई की बदौलत छात्र बिना किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की भागदौड़ या मानसिक उलझन के अपने ही शहर में परीक्षा में शामिल हो सका।

कैसे शुरू हुआ था यह पूरा विवाद

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) का यह पूरा सनसनीखेज मामला नागपुर के रहने वाले छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब से जुड़ा है। जब अब्दुल्ला ने री-नीट 2026 के लिए अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो उसके होश उड़ गए। एडमिट कार्ड पर परीक्षा केंद्र के रूप में भारत का कोई शहर नहीं, बल्कि सात समंदर पार अबू धाबी (UAE) का एक प्रतिष्ठित इंडियन स्कूल दर्ज था। जैसे ही इस अजीबोगरीब एडमिट कार्ड का स्क्रीनशॉट इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, वैसे ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की साख को लेकर देश भर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया और देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक गलियारों में पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम पर छात्र के पिता डॉ. मोहम्मद तालिब ने मीडिया के सामने आकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया था। उन्होंने बताया कि उनके बेटे अब्दुल्ला के पास तो अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पासपोर्ट तक नहीं है, ऐसे में उसका परीक्षा केंद्र विदेश में अलॉट होना सिस्टम की एक बहुत बड़ी और संदेहास्पद लापरवाही है। पिता का कहना था कि परीक्षा के ठीक पहले इस तरह का एडमिट कार्ड देखकर उनका बेटा गहरे सदमे और मानसिक तनाव में आ गया था। विपक्ष और सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी इस बयान को ढाल बनाकर एनटीए के ऑटोमेटेड सिस्टम और कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए थे। जब इस चौतरफा आलोचना के बाद एनटीए ने मामले की डिजिटल और फॉरेंसिक जांच की, तो कहानी पूरी तरह पलट गई। एनटीए के आधिकारिक वेब-लॉग्स से खुलासा हुआ कि ‘सिटी करेक्शन विंडो’ खुलने के बाद खुद छात्र के ही वैध लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके केंद्र को बदला गया था। सिस्टम में न सिर्फ एक बार अबू धाबी का चयन किया गया, बल्कि दो बार उसका प्रीव्यू भी देखा गया था। भले ही तकनीकी रूप से गलती छात्र के स्तर पर दर्ज थी, लेकिन एनटीए ने संवेदनशीलता दिखाते हुए 19 जून की शाम को खुद डॉ. मोहम्मद तालिब से संपर्क किया। एजेंसी ने ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ नीति के तहत रात भर में जरूरी औपचारिकताओं को पूरा कराया और परीक्षा से ऐन पहले अब्दुल्ला का सेंटर वापस नागपुर अलॉट कर उसका साल बर्बाद होने से बचा लिया।

राहुल गांधी ने सरकार और एनटीए को घेरा था

नागपुर के छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब का परीक्षा केंद्र अबू धाबी अलॉट होने का मामला तब और गर्मा गया, जब इसमें सियासत की एंट्री हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला था। राहुल गांधी ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए लिखा था कि जो व्यवस्था एक बच्चे को उसके अपने ही शहर में परीक्षा केंद्र नहीं दे सकती, उसे इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा कराने का कोई हक नहीं है। उन्होंने एनटीए से सीधे शब्दों में पूछा था कि आखिर परीक्षा से ठीक एक दिन पहले ऐसी गंभीर लापरवाही कैसे हो सकती है? विपक्ष के इस बड़े राजनीतिक हमले और चौतरफा दबाव के बाद एनटीए ने खामोश रहने के बजाय अपने पुख्ता ‘डिजिटल सबूतों’ के साथ स्थिति साफ की है। एनटीए के आधिकारिक वेब-एक्टिविटी लॉग्स ने विपक्षी दावों की हवा निकाल दी। एजेंसी के फॉरेंसिक डेटा से यह साफ हो गया कि केंद्र में अबू धाबी का यह बदलाव किसी तकनीकी खराबी या सिस्टम की गलती से नहीं, बल्कि खुद छात्र के रजिस्टर्ड लॉगिन क्रेडेंशियल्स (आईडी और पासवर्ड) के जरिए किया गया था। छात्र के अकाउंट से न सिर्फ केंद्र बदला गया था, बल्कि दो बार उसका प्रीव्यू देखकर उसे कन्फर्म भी किया गया था। इस राजनीतिक घमासान और छात्र के स्तर पर हुई प्रमाणित गलती के बावजूद, एनटीए ने एक संवेदनशील और जिम्मेदार रुख का परिचय दिया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रशासनिक भ्रम या मानवीय चूक के कारण किसी होनहार उम्मीदवार की परीक्षा न छूटे। इसी ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ नीति के तहत एनटीए के कर्मचारियों ने 19 जून की शाम को खुद छात्र के पिता से संपर्क किया, रात भर में जरूरी औपचारिकताएं पूरी कराईं और परीक्षा से ऐन पहले अब्दुल्ला को नागपुर में ही नया केंद्र अलॉट कर दिया, जिससे इस पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का एक सुखद अंत हुआ।

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