पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति देश की न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे उनके लंबे अनुभव और न्यायिक कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका मिलेगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी देते हुए इस नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी किया है। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति भी प्राप्त हो गई, जिसके साथ ही उनके नाम को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सूची में शामिल कर लिया गया है। इस संबंध में जानकारी केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर साझा की। उन्होंने बताया कि यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत की गई है और यह प्रक्रिया मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद पूरी हुई है। मंत्री ने अपनी पोस्ट में नवनियुक्त न्यायाधीशों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति न्यायिक प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक होगी और देश में न्याय वितरण की प्रक्रिया को गति मिलेगी। जस्टिस शील नागू का न्यायिक करियर कई महत्वपूर्ण पदों और जिम्मेदारियों से भरा रहा है। हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अहम मामलों में निर्णय दिए और कानून के दायरे में रहते हुए संतुलित और प्रभावशाली फैसलों के लिए पहचाने जाते रहे हैं।
जुलाई 2024 में बने थे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस
जस्टिस शील नागू को 4 जुलाई 2024 को नियुक्त किया गया। उन्होंने 9 जुलाई 2024 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। वह इस पद पर 692 दिनों से हैं। इस समय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए। वे हाईकोर्ट के 36वें स्थायी मुख्य न्यायाधीश रहे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू को देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीश बनाने के निर्णय से न्यायिक जगत में खुशी का माहौल है। उनकी नियुक्ति को भारतीय न्यायपालिका के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। लंबे अनुभव और प्रभावी न्यायिक कार्यशैली के कारण उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को स्वीकृति दी और उनकी नियुक्ति का औपचारिक आदेश जारी किया। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद उनका नाम उन न्यायाधीशों की सूची में शामिल हो गया, जिन्हें देश की सर्वोच्च अदालत में सेवा देने का अवसर मिला। जस्टिस शील नागू ने अपने न्यायिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। विभिन्न अदालतों में काम करते हुए उन्होंने कानून की निष्पक्ष व्याख्या और न्याय के सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। उनकी पहचान ऐसे न्यायाधीश के रूप में है जो संवेदनशील मामलों में भी संतुलित और स्पष्ट निर्णय देने के लिए जाने जाते हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल कई महत्वपूर्ण फैसलों के लिए चर्चित रहा है। उन्होंने प्रशासनिक जवाबदेही, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों से संबंधित मुद्दों में प्रभावशाली हस्तक्षेप करते हुए कई निर्देश जारी किए। न्यायिक सुधारों पर जस्टिस नागू का दृष्टिकोण स्पष्ट रहा है। उन्होंने समयबद्ध न्याय और पारदर्शिता पर जोर दिया। अदालतों में लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया को तेज करने और न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में उन्होंने कई बार कड़े निर्णय लिए। विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। उनके निर्णयों ने यह स्थापित किया कि विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सामाजिक मुद्दों पर उनकी संवेदनशीलता भी कई निर्णयों में दिखाई दी। श्रमिकों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानव गरिमा से जुड़े मामलों में उन्होंने ऐसे निर्देश दिए जो आम जन के हितों को सशक्त करने वाले माने गए। इसलिए, उनके कई फैसले व्यापक चर्चा का विषय बने। जस्टिस शील नागू को उनके अनोखे और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए भी जाना जाता है। कई मामलों में उन्होंने ऐसी शर्तें और सुझाव दिए, जिनका लक्ष्य केवल कानूनी प्रक्रिया को पूरा करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश देना भी था। उनकी कार्यशैली ने उन्हें न्यायपालिका में अलग पहचान दिलाई। सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति के साथ अब उनसे और बड़ी जिम्मेदारियों की अपेक्षा की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव और न्यायिक दृष्टिकोण सर्वोच्च अदालत के कार्यों को और सशक्त बनाएगा। भविष्य में वे कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और राष्ट्रीय मामलों की सुनवाई का हिस्सा बन सकते हैं।

शील नागू के 4 प्रमुख फैसले
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय किए। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में हाथ से गटर साफ करने की घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस परंपरा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया और सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए। पर्यावरण संरक्षण के तहत हरियाणा के सोनीपत में पुलिस स्टेशन निर्माण के लिए 150 साल पुराने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई और सरकार को वैकल्पिक स्थान खोजने के लिए कहा। पुलिस व्यवस्था में सुधार के लिए उन्होंने आदेश दिया कि गंभीर अपराध की शिकायत मिलते ही एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा और किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। चंडीगढ़ की मूल शहरी संरचना को बनाए रखने के लिए उन्होंने ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर निर्माण पर रोक लगाते हुए प्रशासन को अंडरपास विकल्प पर विचार करने का सुझाव दिया।
अस्पताल में टीवी लगवाने का अनूठा निर्णय जस्टिस शील नागू अपने दिलचस्प और कड़े निर्णयों के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्ष 2020 में जब वे हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में कार्यरत थे, तब उन्होंने एक मामले में अनोखी शर्त के साथ निर्णय सुनाया। यह मामला हत्या के प्रयास से संबंधित था, जिसमें आरोपी अरविंद पटेल और कमलेश पाल ने जमानत याचिका प्रस्तुत की थी। आरोप था कि 18 फरवरी 2020 को ग्वालियर जिले के बड़ौनी थाना क्षेत्र के गांव औरीना में उन्होंने बृजेश पाल के पैर में गोली मारी थी। उस समय भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में तनावपूर्ण स्थिति थी। इसी संदर्भ में जस्टिस नागू ने जमानत प्रदान करते हुए यह शर्त रखी कि आरोपी अस्पताल में लगभग 25 हजार रुपये मूल्य का एलईडी टीवी लगवाएं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि टीवी भारत या किसी अन्य देश में निर्मित होनी चाहिए, लेकिन चीन में नहीं।