देशभर में लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक छठ पर्व शनिवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ शुरू हो गया। यह चार दिवसीय महापर्व व्रतियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस वर्ष छठ पर्व में व्रतियों ने गंगा सहित प्रमुख नदियों, तालाबों और जलाशयों में स्नान कर भगवान भास्कर (सूर्य देव) की आराधना की।
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पहले दिन व्रतियों ने अपने शरीर और मन को पवित्र करने के लिए स्नान किया और शुद्ध जल में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर लोग पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर नदी किनारे पहुंचते हैं और सूर्य देव की उपासना करते हैं। व्रतियों ने स्नान के बाद कद्दू, अरवा चावल, चना दाल और आंवले की चटनी से बना प्रसाद ग्रहण किया। इसे ग्रहण करना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस मौके पर महिलाएं विशेष रूप से साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर व्रत की तैयारी करती हैं और छठ घाट पर पहुंचकर पूजा की तैयारी करती हैं। पुरुष भी व्रत में शामिल होकर पूजा और तैयारी में योगदान देते हैं। छठ पर्व की चार दिवसीय परंपरा में पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन संध्या अर्घ्य और चौथा दिन उषा अर्घ्य के रूप में मनाया जाता है।
इस साल भी बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में व्रतियों ने सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से घाटों पर पूजा-अर्चना की। प्रशासन और स्थानीय समाजिक संगठन व्रतियों की सुविधा के लिए जलाशयों और घाटों पर साफ-सफाई, सुरक्षा और जल व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं।
धार्मिक परंपरा के अनुसार छठ पर्व सूर्य देव की आराधना और प्राकृतिक तत्वों के संरक्षण का प्रतीक भी माना जाता है। व्रतियों का यह उत्साह और आस्था सामाजिक-सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा देती है। घाटों पर लोगों की भव्य सजावट, दीपों की रोशनी और पारंपरिक गीत छठ की माहौल को और भी विशेष बनाते हैं।
व्रतियों ने नहाय-खाय के दौरान स्वास्थ्य और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए शुद्ध और प्राकृतिक खाद्य सामग्री का प्रयोग किया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस पर्व के दौरान सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का इंतजाम भी किया है।
छठ महापर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और परिवारों में भाईचारे की भावना को मजबूत करने वाला पर्व भी है। व्रतियों की आस्था और उत्साह के बीच, घाटों पर शांतिपूर्ण वातावरण देखा गया और लोग अपने श्रद्धा और भक्ति भाव से सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते रहे।इस प्रकार, छठ महापर्व का शुभारंभ नहाय-खाय के साथ पूरे उत्साह और आस्था के साथ हुआ और रविवार को होने वाले खरना व्रत की तैयारी में व्रती पूरी तरह से जुट गए हैं।










