शून्य की ओर जाती मायावती की बसपा
उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव के बीच विधानसभा के मौजूदा संख्याबल पर भी सबकी नजर है। राज्य विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल के दौरान छह विधायकों के निधन के चलते फिलहाल 397 सदस्य ही राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मतदान करेंगे। ऐसे में चुनावी गणित में उपलब्ध विधायकों की संख्या अहम भूमिका निभाएगी। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए जरूरी वोटों की संख्या विधानसभा में प्रभावी सदस्य संख्या के आधार पर तय होती है। मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से उत्तर प्रदेश में एक राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए करीब 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल अपने मौजूदा संख्याबल के आधार पर उम्मीदवारों और संभावित सीटों का हिसाब लगा रहे हैं। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति विशेष रूप से चर्चा में है। विधानसभा में बसपा के विधायक उमाशंकर के निधन के बाद पार्टी का कोई मौजूदा विधायक नहीं बचा है। ऐसे में विधानसभा से राज्यसभा चुनाव के लिए बसपा के पास अपना उम्मीदवार जिताने के लिए जरूरी संख्याबल मौजूद नहीं है। बसपा के सामने एक और अहम स्थिति यह है कि राज्यसभा में पार्टी के मौजूदा एकमात्र सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है। अगर पार्टी राज्यसभा में अपनी सीट बरकरार नहीं रख पाती है, तो संसद के उच्च सदन में बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा। राज्यसभा चुनाव में विधायकों की संख्या के अलावा नामांकन, समर्थन और मतदान के दौरान बनने वाले राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे। अलग-अलग दलों के पास उपलब्ध संख्या के आधार पर सीटों का गणित तय होगा। ऐसे में चुनाव से पहले किसी भी संभावित बदलाव पर राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी। अब देखना होगा कि उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद राज्यसभा चुनाव का वास्तविक मुकाबला किस तरह आकार लेता है। खास तौर पर बसपा के लिए यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा में उसका कोई सदस्य नहीं है और राज्यसभा की मौजूदा सीट बचाए रखने की चुनौती उसके सामने है।

समाजवादी पार्टी को मिल सकती हैं दो सीटें
उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव ने राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्यसभा की इन सीटों पर होने वाला चुनाव सीधे जनता के मतदान से नहीं, बल्कि विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों के वोट से होता है। ऐसे में हर पार्टी के लिए विधानसभा में मौजूद संख्याबल चुनावी गणित का सबसे अहम हिस्सा बन जाता है। समाजवादी पार्टी के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है। पार्टी के पास विधानसभा में 101 विधायक होने की बात सामने आ रही है। इस संख्या के आधार पर सपा की नजर राज्यसभा की सीटों पर है, लेकिन अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों के नाम, सहयोगी दलों के समर्थन और मतदान के समय मौजूद प्रभावी संख्याबल के बाद ही स्पष्ट होगी। राज्यसभा चुनाव में विधायकों का एक-एक वोट अहम होता है। ऐसे में चुनाव से पहले किसी दल के विधायक पाला बदलते हैं या मतदान के दौरान पार्टी लाइन से अलग वोट करते हैं, तो इससे सीटों के गणित पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि राजनीतिक दल अपने विधायकों के समर्थन और चुनावी रणनीति को लेकर सतर्क रहते हैं। भारतीय जनता पार्टी के लिए भी यूपी की इन 10 सीटों का चुनाव महत्वपूर्ण है। मौजूदा राज्यसभा प्रतिनिधित्व को देखते हुए पार्टी को उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ विधानसभा में उपलब्ध वोटों का हिसाब लगाना होगा। सहयोगी दलों के साथ संभावित तालमेल भी चुनावी गणित का हिस्सा बन सकता है। इस चुनाव में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद यह पता चलेगा कि किन सीटों पर मुकाबला बन रहा है और कहां निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन सकती है। चुनाव आयोग ने यूपी की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना निर्धारित की है। उत्तर प्रदेश में होने वाला यह राज्यसभा चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान दलों का संख्याबल, उम्मीदवारों का चयन और विधायकों की भूमिका राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रहेगी। सभी की नजरें राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के ऐलान और नामांकन प्रक्रिया पर हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सपा, बीजेपी और अन्य दल कितनी सीटों के लिए मैदान में उतरते हैं और चुनाव का वास्तविक गणित किस तरह बनता है। 16 अक्टूबर को मतदान के बाद राज्यसभा में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व की नई तस्वीर सामने आएगी।









