Delhi में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया के दौरान कई बड़े नेताओं, अधिकारियों और उनके परिवारों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में आए हैं। इस दौरान कुछ लोगों के मौजूदा वोटर रिकॉर्ड में जानकारी का अंतर पाया गया, जबकि कुछ रिकॉर्ड पुराने मतदाता डेटा से लिंक नहीं हो सके। इसी आधार पर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। SIR की इस प्रक्रिया में पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जैसे बड़े नामों के रिकॉर्ड भी सामने आए हैं। इनके अलावा चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के वोटर रिकॉर्ड की भी जांच की गई है। खास बात यह है कि नोटिस मिलने के पीछे अलग-अलग मामलों में अलग कारण बताए जा रहे हैं। दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और उनके परिवार के सदस्यों को भी SIR के तहत नोटिस मिलने की जानकारी है। उनके रिकॉर्ड में डेटा मिसमैच से जुड़ी जानकारी सामने आई है। इसी तरह CBI निदेशक प्रवीण सूद, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई समेत कई मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारियों के रिकॉर्ड भी पुराने मतदाता डेटा से मिलान की प्रक्रिया में शामिल हुए हैं। यहां समझना जरूरी है कि SIR के दौरान नोटिस जारी होना अपने आप में वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब नहीं है। जिन रिकॉर्ड में पुरानी जानकारी से मिलान नहीं हो पाया या किसी विवरण में अंतर मिला है, उनसे संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड और उपलब्ध जानकारी की जांच करके आगे की प्रक्रिया तय करते हैं। SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी को व्यवस्थित करना और रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करना है। इसलिए VIPs समेत किसी भी मतदाता को नोटिस मिलने के बाद अंतिम फैसला प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा। दिल्ली में चल रही इस कवायद के बीच अब इन नोटिसों और उनके कारणों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
किसे किस वजह से मिला नोटिस ?
दिल्ली में चल रहे Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान कई प्रमुख लोगों के वोटर रिकॉर्ड का पुराने मतदाता डेटा से मिलान किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया में विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आया है। दोनों को ‘अंतिम SIR के साथ अनमैप्ड’ कैटेगरी में रखा गया है, यानी उनके मौजूदा वोटर रिकॉर्ड को 2002 की पिछली SIR सूची में मौजूद संबंधित रिकॉर्ड से लिंक नहीं किया जा सका। एस जयशंकर और उनकी पत्नी नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुंदर बाग इलेक्टोरल पार्ट में मतदाता बताए गए हैं। SIR के दौरान पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड के बीच मिलान नहीं होने पर संबंधित मतदाता को नोटिस देकर रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी स्पष्ट करने का मौका दिया जाता है। ऐसे मामलों में नोटिस का उद्देश्य रिकॉर्ड की स्थिति को सत्यापित करना और जरूरी जानकारी हासिल करना होता है। इसी तरह CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद, उनकी पत्नी वनिता सूद और उनकी मां कमलेश सूद के रिकॉर्ड भी पुराने मतदाता डेटा से लिंक नहीं हो पाए। इन तीनों को भी ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में रखा गया है। वहीं पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी के वोटर रिकॉर्ड का भी पिछली SIR सूची से मिलान नहीं हो सका। दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में मतदाता हैं। पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी के परिवार से जुड़े रिकॉर्ड भी SIR प्रक्रिया में सामने आए हैं। उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका आडवाणी के मौजूदा वोटर रिकॉर्ड को पिछली SIR की सूची से मैप नहीं किया जा सका, जिसके बाद उन्हें नोटिस मिलने की जानकारी है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2002 में पिछली SIR के समय एलके आडवाणी केंद्र सरकार में गृह मंत्री के पद पर थे। आडवाणी परिवार के सभी रिकॉर्ड एक जैसी स्थिति में नहीं हैं। उनके बेटे जयंत आडवाणी का रिकॉर्ड नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में चल रही मैपिंग प्रक्रिया में स्पष्ट हो गया। इससे यह भी सामने आता है कि SIR के दौरान एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों के रिकॉर्ड की स्थिति अलग हो सकती है। पुराने और मौजूदा डेटा के मिलान के आधार पर ही संबंधित रिकॉर्ड को मैप्ड या अनमैप्ड श्रेणी में रखा जा रहा है।

सिसोदिया परिवार के रिकॉर्ड में क्या गड़बड़ी?
दिल्ली में चल रहे Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनके परिवार के वोटर रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं। सिसोदिया और उनके परिवार के सदस्यों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सिसोदिया को भेजे गए नोटिस में किसी विशेष वजह का स्पष्ट उल्लेख नहीं बताया गया है। वहीं उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के रिकॉर्ड में ‘सेल्फ-नेम मिसमैच’ दर्ज होने की बात सामने आई है। आसान शब्दों में कहें तो वोटर रिकॉर्ड में दर्ज नाम और उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के बीच अंतर पाया गया है। इसी तरह उनके बेटे मीर सिसोदिया को ‘पैरेंट-नेम मिसमैच’ के आधार पर नोटिस मिला है, यानी रिकॉर्ड में माता-पिता से जुड़ी जानकारी के मिलान को लेकर अंतर सामने आया है। मीर सिसोदिया के मामले में सामने आई जानकारी उनकी मां के वोटर रिकॉर्ड में पाए गए अंतर से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, किसी रिकॉर्ड में मिसमैच पाए जाने का मतलब सीधे तौर पर नाम हटना नहीं माना जाता। SIR की प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता से जानकारी और जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, ताकि रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट की जा सके। इस मामले में परिवार के करीबी सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि उन्हें इन नोटिसों के जारी होने की जानकारी पहले से नहीं थी। दूसरी ओर, SIR के दौरान केवल सिसोदिया परिवार ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख लोगों के परिवारों के रिकॉर्ड में भी इस तरह के अंतर सामने आए हैं। CPM सांसद जॉन ब्रिटास की पत्नी शेबा ब्रिटास और उनके बेटे आनंद ब्रिटास को भी नोटिस मिलने की जानकारी है। शेबा के रिकॉर्ड में ‘सेल्फ-नेम मिसमैच’, जबकि आनंद के रिकॉर्ड में ‘पैरेंट-नेम मिसमैच’ दर्ज किया गया है। दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता बताए गए हैं। SIR के दौरान इस तरह के नोटिस का उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी को सत्यापित करना और जरूरत पड़ने पर उसे दुरुस्त करना है। इसलिए नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है। इसके बाद अधिकारी उपलब्ध जानकारी की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करते हैं।
IAS और दूसरे बड़े अधिकारियों को भी नोटिस
दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों और उनके परिवारों के वोटर रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारियों के रिकॉर्ड को पुराने मतदाता डेटा से मिलाया जा रहा है। इसी प्रक्रिया में कुछ रिकॉर्ड ऐसे मिले हैं, जिन्हें पिछली SIR की सूची से लिंक नहीं किया जा सका। सामने आई जानकारी के मुताबिक विदेश सचिव विक्रम मिसरी का रिकॉर्ड भी उन मामलों में शामिल है, जिनका पुराने वोटर डेटा से मैपिंग नहीं हो पाई। इसके अलावा SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव के रिकॉर्ड भी SIR की जांच प्रक्रिया में सामने आए हैं। इन अधिकारियों के रिकॉर्ड को पुराने मतदाता डेटा से जोड़ने में परेशानी आने के बाद उन्हें ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में रखा गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मौजूदा वोटर रिकॉर्ड का पिछली SIR में मौजूद संबंधित रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड को स्पष्ट करने के लिए संबंधित मतदाता से दस्तावेज या अन्य जरूरी जानकारी मांगी जा सकती है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के रिकॉर्ड भी इसी प्रक्रिया में सामने आए हैं। रंजना देसाई, उनके पति प्रकाश देसाई, बेटे और वकील माइक देसाई तथा बहू साक्षी देसाई के रिकॉर्ड को ‘अंतिम SIR के साथ अनमैप्ड’ कैटेगरी में रखा गया है। यानी इन रिकॉर्ड्स का पुराने मतदाता डेटा से अपेक्षित तरीके से मिलान नहीं हो पाया। SIR के दौरान किसी रिकॉर्ड का ‘अनमैप्ड’ होना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का प्रमाण नहीं है। इस तरह के मामलों में संबंधित रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन किया जाता है। मतदाता को अपनी जानकारी स्पष्ट करने तथा जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है, जिसके बाद संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का पुराने रिकॉर्ड से मिलान करना और डेटा में मौजूद अंतर को दूर करना है। वरिष्ठ अधिकारियों या आम मतदाताओं, दोनों के मामलों में रिकॉर्ड की स्थिति को प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
क्या नोटिस का मतलब नाम कट जाएगा?
दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान कई वोटरों को नोटिस जारी किए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या नोटिस मिलने से नाम वोटर लिस्ट से हट जाएगा। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल नोटिस जारी होना किसी मतदाता का नाम हटाए जाने का आधार नहीं है। SIR के दौरान जारी किए जा रहे कई नोटिस सिस्टम जनरेटेड हैं। इनका उद्देश्य ECINET में मौजूद मतदाता संबंधी जानकारी को जांचना और जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड में सुधार करना है। यानी किसी रिकॉर्ड में अंतर या पुराने डेटा से लिंक नहीं होने पर संबंधित मतदाता से जानकारी मांगी जा सकती है। जिन मतदाताओं के मौजूदा रिकॉर्ड का पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया है या उनकी जानकारी में किसी तरह की विसंगति सामने आई है, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। संबंधित Electoral Registration Officer के सामने मतदाता अपनी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके बाद अधिकारी जमा किए गए जवाब और दस्तावेजों की जांच करेंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित मामले में आदेश जारी किया जाएगा। CEO की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी मतदाता का नाम बिना सुनवाई का मौका दिए और उचित, स्पष्ट तथा अपील योग्य आदेश के बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता। SIR की इस प्रक्रिया के तहत नोटिस पर कार्रवाई पूरी करने की समयसीमा 29 अक्टूबर बताई गई है। इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी की जानी है। ऐसे में जिन लोगों को नोटिस मिला है, उनके लिए जरूरी है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना जवाब और संबंधित दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं।
दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान कई राजनीतिक परिवारों और वरिष्ठ अधिकारियों के वोटर रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। इसी प्रक्रिया में CPM सांसद जॉन ब्रिटास की पत्नी शेबा ब्रिटास और उनके बेटे आनंद ब्रिटास के रिकॉर्ड में भी अंतर सामने आने की जानकारी है। शेबा के रिकॉर्ड में नाम से जुड़ा मिसमैच, जबकि आनंद के रिकॉर्ड में अभिभावक के नाम से संबंधित अंतर बताया गया है। दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। SIR की जांच का दायरा केवल राजनीतिक हस्तियों और उनके परिवारों तक सीमित नहीं है। कई मौजूदा और रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारियों के रिकॉर्ड भी पुराने मतदाता डेटा के साथ मिलाए जा रहे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी, SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव के रिकॉर्ड भी उन मामलों में शामिल बताए गए हैं, जिनका पुराने वोटर डेटा से मिलान नहीं हो पाया। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के रिकॉर्ड भी SIR की प्रक्रिया में सामने आए हैं। रंजना देसाई, उनके पति प्रकाश देसाई, बेटे और वकील माइक देसाई तथा बहू साक्षी देसाई के रिकॉर्ड को ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में रखे जाने की जानकारी है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा रिकॉर्ड को पुराने मतदाता रिकॉर्ड से अपेक्षित तरीके से जोड़ा नहीं जा सका। किसी रिकॉर्ड का ‘अनमैप्ड’ होना या नोटिस मिलना सीधे तौर पर वोटर लिस्ट से नाम हटने का संकेत नहीं है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, ऐसे नोटिस सिस्टम के जरिए जनरेट किए गए हैं और इनका मकसद ECINET में मौजूद मतदाता डेटा को सही करना है। संबंधित मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाएगा। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड पुराने डेटा से लिंक नहीं हो पाए हैं या जिनकी जानकारी में किसी तरह का अंतर मिला है, उन्हें संबंधित Electoral Registration Officer के सामने अपना जवाब दाखिल करना होगा। अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद मामले में आगे का आदेश जारी करेंगे। किसी मतदाता का नाम बिना सुनवाई का अवसर दिए और उचित, स्पष्ट तथा अपील योग्य आदेश के बिना हटाया नहीं जा सकता। SIR के तहत इन नोटिसों पर कार्रवाई पूरी करने की समयसीमा 29 अक्टूबर बताई गई है। इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी की जानी है। ऐसे में अभी नोटिस मिलने वाले मामलों में प्रक्रिया जारी है और अंतिम स्थिति संबंधित जांच, दस्तावेजों और अधिकारियों के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।









