Russia के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस दौरे का न्योता दिया है। दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। पुतिन ने पीएम मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस आने का आमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति के इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। दोनों देशों के बीच हर साल होने वाली शिखर बैठक को भारत-रूस संबंधों में महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इस बैठक में दोनों पक्ष आपसी रिश्तों की प्रगति की समीक्षा करने के साथ भविष्य के सहयोग की दिशा पर भी चर्चा करते हैं। पीएम मोदी के रूस दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद आपसी सुविधा के अनुसार कार्यक्रम निर्धारित किया जाएगा। इसके लिए राजनयिक स्तर पर दोनों पक्ष संपर्क में रहेंगे और सहमति बनने के बाद दौरे की तारीख की घोषणा की जाएगी। पुतिन का यह निमंत्रण ऐसे समय आया है जब भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार जारी है। दोनों देशों के नेता समय-समय पर द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते रहे हैं। ऐसे में अगला वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों की साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए एक और अहम अवसर बन सकता है। अगली बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, निवेश और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों पर आगे की रणनीति को लेकर बातचीत होने की संभावना है। इसके अलावा बदलती वैश्विक परिस्थितियों और दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े विषय भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल सबकी नजर पीएम मोदी की रूस यात्रा की तारीख और आगामी शिखर सम्मेलन के एजेंडे पर है।
पश्चिम एशिया और ब्लैक सी के हालात पर भी चर्चा हुई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बातचीत में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग की स्थिति पर विस्तार से विचार किया गया। नेताओं ने अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने के साथ आगे की साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। बैठक के दौरान राजनीतिक संबंधों के साथ आर्थिक और रक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दे भी सामने आए। ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने के अलावा कुशल कामगारों की आवाजाही और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया। इससे भारत-रूस संबंधों को पारंपरिक क्षेत्रों से आगे ले जाने की कोशिश का संकेत मिलता है। औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर INNOPROM India का आयोजन भी चर्चा में रहा। भारत में पहली बार हुई इस अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी का आयोजन 9 से 11 सितंबर 2026 के बीच किया गया। दोनों नेताओं ने इसे भारत और रूस के बीच कारोबार तथा उद्योग जगत के संबंधों को विस्तार देने की दिशा में अहम पहल बताया। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने प्रदर्शनी का दौरा किया और वहां मौजूद प्रतिभागियों से बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को करीब से देखने का अवसर मिला। ऐसे आयोजनों से कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ने और भविष्य में नई कारोबारी साझेदारियां बनने की उम्मीद जताई जा रही है। बातचीत में भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता का मुद्दा भी शामिल रहा। दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग को आगे बढ़ाने और साझा हितों से जुड़े विषयों पर मिलकर काम करने की संभावनाओं पर विचार किया। BRICS के मंच को दोनों देशों के लिए वैश्विक मुद्दों पर संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। इसके अलावा पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों पर भी दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए। इन क्षेत्रों में जारी संघर्षों और बदलते वैश्विक हालात का असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों, व्यापार और सुरक्षा पर पड़ रहा है। ऐसे में मोदी और पुतिन की बातचीत में इन घटनाक्रमों का शामिल होना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संघर्षों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति निकल सकता है
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों से पैदा हुई चुनौतियों पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। इन घटनाक्रमों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत के लिए अपने नाविकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार को सुचारु बनाए रखना एक अहम विषय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तलाशा जाना चाहिए। भारत ने पहले भी अलग-अलग वैश्विक संकटों के दौरान संवाद के रास्ते को प्राथमिकता देने की बात कही है। मोदी ने यह भी भरोसा दिलाया कि जहां भी शांति स्थापित करने के प्रयास होंगे, भारत अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग के लिए तैयार रहेगा। दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। बातचीत में यह बात सामने आई कि बदलते वैश्विक समीकरणों और कई तरह की भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता बनी हुई है। भारत और रूस आने वाले समय में आपसी सहयोग को और व्यापक बनाने पर काम जारी रखना चाहते हैं। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने प्रदर्शनी का दौरा भी किया और वहां मौजूद कारोबारियों तथा प्रतिभागियों से बातचीत की। इस दौरान भारत और रूस के बीच औद्योगिक और कारोबारी सहयोग की संभावनाओं को करीब से समझने का मौका मिला। माना जा रहा है कि इस तरह के मंच दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच बनाने और नए व्यावसायिक संपर्क विकसित करने में मदद कर सकते हैं। भारत की BRICS अध्यक्षता भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल रही। दोनों पक्षों ने संगठन के भीतर सहयोग बढ़ाने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में BRICS की भूमिका को लेकर विचार साझा किए। भारत की अध्यक्षता में होने वाली गतिविधियों और पहलों के जरिए बहुपक्षीय सहयोग को किस तरह मजबूत किया जा सकता है, इस पर भी बातचीत हुई। मोदी और पुतिन ने पश्चिम एशिया तथा काला सागर क्षेत्र की स्थिति का भी आकलन किया। इन इलाकों में जारी तनाव का प्रभाव ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन पर पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत और रूस जैसे प्रमुख देशों के बीच इन मुद्दों पर लगातार संपर्क को अहम माना जा रहा है। बातचीत का दायरा केवल द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं रहा। दोनों नेताओं ने वैश्विक अस्थिरता, व्यापारिक चुनौतियों, समुद्री सुरक्षा और शांति प्रयासों जैसे मुद्दों पर भी विचार साझा किए। इससे साफ है कि भारत और रूस अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती चुनौतियों पर भी मिलकर संवाद जारी रखना चाहते हैं।
मोदी और पुतिन की मुलाकात में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण समुद्री कारोबार के सामने खड़ी चुनौतियों पर भी बात हुई। अलग-अलग क्षेत्रों में जारी तनाव का असर समुद्री रास्तों से होने वाले व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित आवागमन का मुद्दा भी बातचीत का अहम हिस्सा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघर्षों को खत्म करने के लिए बातचीत को सबसे जरूरी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि दुनिया में शांति और स्थिरता कायम करने वाली कोशिशों में वह अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। बैठक के दौरान भारत और रूस के आपसी रिश्तों को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई। दोनों देशों ने अपनी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों के बीच यह भरोसा नजर आया कि वैश्विक स्तर पर परिस्थितियां तेजी से बदलने के बावजूद भारत-रूस संबंध अपनी मजबूती बनाए हुए हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को रूस आने का निमंत्रण देना भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। मोदी ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। दोनों नेताओं के बीच अगली वार्षिक शिखर बैठक को लेकर अब आगे की प्रक्रिया कूटनीतिक माध्यमों से तय की जाएगी। इस प्रस्तावित यात्रा को दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर संपर्क को और मजबूत करने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। वार्षिक शिखर बैठक भारत और रूस के बीच सहयोग की समीक्षा करने के साथ-साथ भविष्य की प्राथमिकताएं तय करने का भी महत्वपूर्ण मंच होती है। ऐसे में अगली बैठक में कई नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। अब दोनों देशों के बीच अगली वार्षिक बैठक की तारीख तय होने का इंतजार है। इस बैठक में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक, निवेश और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में आगे की रणनीति पर बातचीत हो सकती है। साथ ही बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों के रिश्तों को किस तरह और मजबूत किया जाए, इस पर भी नजर रहेगी।









