Russia के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार तड़के नई दिल्ली पहुंच गए। उनके भारत पहुंचने पर एयरपोर्ट पर औपचारिक स्वागत किया गया। केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पालम एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति की अगवानी की। पुतिन के इस दौरे को भारत और रूस के रिश्तों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। भारत पहुंचने के बाद पुतिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस बातचीत में दोनों देशों के मौजूदा रिश्तों और भविष्य के सहयोग पर चर्चा हो सकती है। खासतौर पर रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों की बातचीत पर नजर रहेगी। रक्षा क्षेत्र में भारत और रूस की लंबे समय से साझेदारी रही है। ऐसे में ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े विषय बातचीत में जगह बना सकते हैं। इसके अलावा रक्षा तकनीक और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार होने की संभावना है। ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है। भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी पहले से मौजूद है। इसके साथ ही व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने के नए रास्तों पर भी दोनों नेता विचार कर सकते हैं। पुतिन के दौरे के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे। करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होने के कारण इस मुलाकात को लेकर कूटनीतिक हलकों में खास दिलचस्पी है। BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इस बातचीत में भारत और चीन के संबंधों से जुड़े अहम मुद्दे उठ सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और सीमा से जुड़े विषय बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। इस तरह BRICS सम्मेलन भारत के लिए सिर्फ बहुपक्षीय बैठक तक सीमित नहीं रहने वाला है। सम्मेलन के दौरान रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की अलग-अलग मुलाकातें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का पक्ष रखने का अवसर देंगी। अब सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली इन अहम बैठकों और उनसे निकलने वाले संभावित फैसलों पर हैं।
पुतिन बातचीत में रक्षा से लेकर ऊर्जा तक कई मुद्दे
PM नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पिछली आमने-सामने मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच चल रहे सहयोग को लेकर विस्तार से बातचीत की थी। दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई अहम क्षेत्रों की प्रगति की भी समीक्षा की गई थी। पिछली बैठक में राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों के साथ-साथ रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा हुई थी। इसके अलावा अंतरिक्ष क्षेत्र और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर भी बातचीत हुई। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया था। अब दिल्ली में होने वाली मोदी-पुतिन वार्ता में एक बार फिर रक्षा सहयोग पर खास ध्यान रहने की संभावना है। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच मौजूदा रक्षा परियोजनाओं की स्थिति और भविष्य में सहयोग बढ़ाने के विकल्प बैठक के अहम विषय बन सकते हैं। ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़े सहयोग को भी इस बैठक में जगह मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा रूस से भारत को मिलने वाले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की शेष डिलीवरी और इससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। Su-57 लड़ाकू विमान को लेकर रूस की पेशकश भी बातचीत के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल हो सकती है। रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा को लेकर भी दोनों देशों की बातचीत महत्वपूर्ण रह सकती है। भारत में नए सिविल न्यूक्लियर रिएक्टर स्थापित करने से जुड़े प्रस्तावों पर दोनों पक्ष आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने के रास्तों पर भी चर्चा संभव है। दिल्ली में होने वाली यह बैठक भारत-रूस संबंधों के अगले चरण की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रक्षा से लेकर ऊर्जा और तकनीक तक कई क्षेत्रों में सहयोग पहले से मौजूद है। ऐसे में मोदी और पुतिन की बातचीत से इन साझेदारियों को आगे बढ़ाने को लेकर नए संकेत मिलने की उम्मीद है।

पुतिन BRICS के बिजनेस फोरम में भी होंगे शामिल
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा सिर्फ BRICS शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं रहेगा। सम्मेलन से जुड़े कारोबारी कार्यक्रमों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। पुतिन BRICS बिजनेस फोरम के महत्वपूर्ण सत्र में शामिल होंगे, जहां वह कारोबार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं। बिजनेस फोरम में भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ निवेश के नए अवसर तलाशने पर भी जोर रह सकता है। इसके अलावा तकनीकी क्षेत्र में साझेदारी को आगे ले जाने के विकल्पों पर भी बातचीत संभव है। भारत और रूस के कारोबारी संबंधों में पिछले कुछ समय में कई नए आयाम जुड़े हैं। ऐसे में यह फोरम दोनों देशों के उद्योग जगत के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर दे सकता है। नई परियोजनाओं, निवेश और तकनीकी साझेदारी से जुड़े प्रस्तावों पर विचार हो सकता है। पुतिन के भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के अलावा अन्य देशों के नेताओं से मुलाकातों का कार्यक्रम भी शामिल है। BRICS सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत कर सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया और मिस्र समेत कई देशों के नेताओं के साथ पुतिन की संभावित मुलाकातों पर भी नजर रहेगी। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हो सकता है। BRICS के बढ़ते दायरे को देखते हुए इस तरह की द्विपक्षीय बैठकों का महत्व और बढ़ जाता है। अलग-अलग देशों के नेताओं के साथ बातचीत के जरिए रूस अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। वहीं भारत में आयोजित यह सम्मेलन कई देशों के लिए आपसी सहयोग के नए रास्ते खोलने का मंच भी बन सकता है। पुतिन के कार्यक्रम को देखें तो उनका यह दौरा राजनीतिक बैठकों के साथ-साथ आर्थिक और कारोबारी स्तर पर भी काफी अहम रहने वाला है। BRICS बिजनेस फोरम में उनकी मौजूदगी और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ प्रस्तावित मुलाकातों से सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग
BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकातें होने वाली हैं। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक सबसे ज्यादा चर्चा में है। शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे और इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ अलग से बातचीत करेंगे। लंबे अंतराल के बाद उनकी भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मोदी और शी की बैठक में भारत-चीन संबंधों से जुड़े कई मुद्दे सामने आ सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग के अलावा सीमा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की संभावना है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच संवाद को लेकर दुनिया की नजर बनी हुई है, शीर्ष नेतृत्व की यह मुलाकात क्षेत्रीय समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। BRICS सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बातचीत की संभावना भी है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए दोनों नेताओं की मुलाकात में क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हो सकती है। ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्र में स्थिरता जैसे मुद्दे भारत और ईरान के लिए खास महत्व रखते हैं। BRICS में ईरान की मौजूदगी ने संगठन के दायरे को और व्यापक किया है। ऐसे में भारत के लिए ईरान के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को लेकर आगे की संभावनाओं पर बातचीत हो सकती है। दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सम्मेलन के दौरान कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। BRICS बिजनेस फोरम के प्लेनरी सत्र में उनके संबोधन पर भी नजर रहेगी। इस मंच के जरिए रूस की ओर से व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखी जा सकती हैं। पुतिन की कोशिश भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के साथ-साथ BRICS के अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी हो सकती है। सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया और मिस्र समेत कई देशों के नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें होने की संभावना है। इन मुलाकातों में आर्थिक और रणनीतिक विषयों पर बातचीत हो सकती है। BRICS सम्मेलन भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि एक ही मंच पर उसे रूस, चीन और ईरान जैसे महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ बातचीत का अवसर मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इन मुलाकातों के जरिए भारत के आर्थिक हितों, ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। दिल्ली में होने वाला BRICS सम्मेलन केवल सदस्य देशों की बैठक तक सीमित नहीं है। इसके दौरान होने वाली अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें आने वाले समय में भारत के विदेशी संबंधों की दिशा पर असर डाल सकती हैं। मोदी-शी बैठक से लेकर ईरान के साथ संभावित बातचीत और पुतिन की कारोबारी बैठकों तक, सम्मेलन के हर बड़े घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।









