कांग्रेस संगठन में बदलाव की प्रक्रिया के बीच पार्टी अब युवा चेहरों को आगे लाने की तैयारी में जुटी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पूरी कवायद में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रीय सचिव के पद के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं से राहुल गांधी खुद बातचीत कर रहे हैं और उनके राजनीतिक सफर के साथ-साथ संगठन में किए गए काम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम तैयार करने के लिए करीब 120 नेताओं को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। पार्टी नेतृत्व का जोर ऐसे लोगों पर बताया जा रहा है, जो केवल राजनीतिक पद या पहचान के कारण नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लगातार सक्रिय रहे हैं। नेताओं की कार्यशैली, संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और अब तक के काम को चयन में अहम आधार माना जा रहा है। इस प्रक्रिया में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों से चुने गए नेताओं को दिल्ली बुलाकर इंटरव्यू लिए जा रहे हैं। बातचीत के दौरान उम्मीदवारों से उनके पिछले संगठनात्मक अनुभव और पार्टी के लिए किए गए काम को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। कांग्रेस के भीतर इस पहल को संगठन में नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी चाहती है कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे चेहरे सामने आएं जो कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े हों और राज्यों में संगठन को मजबूत करने की क्षमता रखते हों। वरिष्ठता के साथ-साथ काम के रिकॉर्ड और जमीनी सक्रियता को महत्व देने की दिशा में यह प्रक्रिया एक अहम कदम मानी जा रही है। राहुल गांधी की भूमिका इस चयन प्रक्रिया में इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह उम्मीदवारों के बारे में पहले से उपलब्ध रिपोर्ट और उनके कामकाज की जानकारी के आधार पर सवाल कर रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी देने से पहले नेताओं की वास्तविक सक्रियता और क्षमता को परखना चाहती है। कांग्रेस के लिए यह बदलाव सिर्फ पदों पर नई नियुक्तियों तक सीमित नहीं है। पार्टी संगठन को अधिक सक्रिय और युवा बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, ताकि आने वाले चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना ज्यादा प्रभावी ढंग से किया जा सके। अब देखना होगा कि इस चयन प्रक्रिया के बाद सामने आने वाली नई टीम कांग्रेस के संगठन को किस तरह नई दिशा देती है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ले रहे इंटरव्यू
कांग्रेस संगठन में नई टीम तैयार करने की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सोमवार को राष्ट्रीय सचिव पद के लिए चुने गए 30 नेताओं से बातचीत की। पार्टी के भीतर इस प्रक्रिया को संगठन में नए चेहरों और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय सचिव पद के लिए नेताओं का इंटरव्यू एक साथ बड़ी संख्या में न लेकर छोटे समूहों में किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक उम्मीदवारों को 10-10 के बैच में बुलाया जा रहा है। इस दौरान राहुल गांधी नेताओं से उनके राजनीतिक सफर, संगठन में निभाई गई जिम्मेदारियों और अब तक किए गए काम के बारे में विस्तार से जानकारी ले रहे हैं। इंटरव्यू देने वाले नेताओं के बारे में पार्टी नेतृत्व पहले से ही जानकारी जुटा चुका है। उनके संगठनात्मक काम और गतिविधियों से जुड़ा रिकॉर्ड राहुल गांधी के पास मौजूद बताया जा रहा है। ऐसे में बातचीत के दौरान नेताओं के दावों और उनके वास्तविक काम के बीच भी परख की जा रही है। राहुल गांधी का फोकस केवल उम्मीदवार की राजनीतिक पहचान पर नहीं, बल्कि उसकी जमीनी सक्रियता पर दिखाई दे रहा है। पार्टी के लिए काम करने का अनुभव, कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ाव और संगठन को आगे बढ़ाने की क्षमता जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देने से पहले नेताओं की व्यावहारिक क्षमता को जांचना चाहती है। राहुल गांधी के रायबरेली के दो दिवसीय दौरे से वापस लौटने के बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की बात कही जा रही है। यानी राष्ट्रीय सचिवों के चयन को लेकर कांग्रेस की कवायद अभी जारी रहने वाली है। आगे और नेताओं के साथ बातचीत के बाद अंतिम नामों पर फैसला होने की संभावना है। पार्टी के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि राष्ट्रीय सचिव संगठन और राज्यों के बीच समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस ऐसे नेताओं को इस जिम्मेदारी में लाना चाहती है जो पार्टी की नीतियों को जमीन तक पहुंचाने के साथ कार्यकर्ताओं के बीच भी प्रभावी तरीके से काम कर सकें। कांग्रेस के अंदर चल रही इस चयन प्रक्रिया को महज पदों पर नियुक्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पार्टी संगठन को ज्यादा सक्रिय, जवाबदेह और युवा बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। अब इन इंटरव्यू के बाद जिन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है, उनकी भूमिका आने वाले समय में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

राहुल गांधी बना रहे अपनी नई टीम
कांग्रेस संगठन में बदलाव को लेकर पार्टी नेतृत्व ने अपनी कवायद तेज कर दी है। अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रीय सचिवों की नई नियुक्तियों की तैयारी चल रही है और इस पूरी प्रक्रिया में राहुल गांधी की भूमिका अहम बताई जा रही है। पार्टी के लिए नई टीम तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सचिव पद के दावेदारों के अंतिम चरण के इंटरव्यू राहुल गांधी खुद ले रहे हैं। इस चयन प्रक्रिया में करीब 120 नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी नेतृत्व उम्मीदवारों के राजनीतिक अनुभव के साथ उनके संगठनात्मक काम और जमीनी सक्रियता को भी परख रहा है। यानी केवल किसी वरिष्ठ नेता की सिफारिश या समर्थन को नियुक्ति का आधार बनाने के बजाय उम्मीदवार की अपनी क्षमता और पिछले काम को महत्व देने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी के पास इंटरव्यू के लिए आने वाले नेताओं के कामकाज से जुड़ी जानकारी और रिपोर्ट पहले से मौजूद है। इसी आधार पर उनसे सवाल किए जा रहे हैं। पार्टी की कोशिश ऐसे लोगों को जिम्मेदारी देने की है जो कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संपर्क में रहे हों और संगठन को जमीन पर मजबूत करने का अनुभव रखते हों। कांग्रेस की योजना मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों की टीम में बड़े स्तर पर बदलाव करने की भी है। बताया जा रहा है कि 60 प्रतिशत से अधिक मौजूदा सचिवों को बदले जाने की तैयारी है। इसके जरिए संगठन में नए चेहरों को मौका देने और नई पीढ़ी के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय सचिव पद के लिए चयन प्रक्रिया में उन नेताओं को विशेष महत्व मिलने की संभावना है, जिन्होंने कांग्रेस के ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम में ऑब्जर्वर के तौर पर काम किया है। इस कार्यक्रम के दौरान संगठन से जुड़े काम का अनुभव हासिल करने वाले नेताओं को पार्टी की जमीनी संरचना और कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की समझ होने का फायदा मिल सकता है। कांग्रेस के इस कदम को आने वाले समय के लिए नई नेतृत्व क्षमता तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ऐसे नेताओं की टीम बनाना चाहती है जो संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ राजनीतिक चुनौतियों का भी प्रभावी तरीके से सामना कर सकें। अब इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम में किन चेहरों को जगह मिलती है।









