निर्देशक: ऋषभ शेट्टी
निर्माता: होम्बले फिल्म्स (KGF, सलार जैसी हिट फिल्मों के निर्माता)
भाषा: कन्नड़ (हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और अंग्रेजी में डब)

रिलीज वर्ष: 2025 (अनुमानित)
“कांतारा चैप्टर 1” मूल “कांतारा” (2022) का प्रिक्वल है — यानी यह कहानी पहले भाग से सैकड़ों साल पहले की घटनाओं पर आधारित है
पहली फिल्म में जिस “दैवत” या “भूत कोला” परंपरा को दिखाया गया था, इस चैप्टर में उसकी उत्पत्ति और रहस्य को उजागर किया जाएगा
कहानी का सार
कहानी 300–400 साल पहले की है, जब एक राजवंश और दैवी शक्ति के बीच एक रहस्यमय समझौता होता है।राजा को देवता से आशीर्वाद मिलता है — भूमि और समृद्धि की।लेकिन जैसे-जैसे पीढ़ियाँ बदलती हैं, इंसान का अहंकार और लालच बढ़ता है, और वह प्रकृति व देवता से टकरा जाता है।इस संघर्ष में धर्म, शक्ति, और प्रकृति की चेतावनी — सब कुछ शामिल है फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक साधारण व्यक्ति देवता का रूप लेकर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़ा होता है।
मुख्य कलाकार
- ऋषभ शेट्टी – मुख्य भूमिका में (राजवंश के योद्धा और दैवत अवतार के रूप में)
- अन्य कलाकार – कई नए चेहरे, जो दक्षिण भारत की स्थानीय पृष्ठभूमि से चुने गए हैं ताकि प्रामाणिकता बनी रहे।
फिल्म का हर फ्रेम एक कला-पट जैसा है — घने जंगल, प्राचीन मंदिर, और रहस्यमय वातावरण को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।ऋषभ शेट्टी ने इसे सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव की तरह गढ़ा है।
फिल्म का प्रदर्शन
- रिलीज के पहले ही दिन से थिएटर्स में हाउसफुल शो।
- खासकर कर्नाटक और हिंदी बेल्ट में दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स।
- सोशल मीडिया पर इसे “सांस्कृतिक महाकाव्य” और “विजुअल मास्टरपीस” कहा जा रहा है।
- IMDb रेटिंग (अनऑफिशियल शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार): 8.8/10
पहले हफ्ते की परफॉर्मेंस
- पहले दिन कमाई: ₹ 28 करोड़
- पहले वीकेंड (3 दिन): ₹ 90 करोड़
- पहले हफ्ते में कुल: ₹ 155 करोड़
फिल्म को मिले प्रशंसा बिंदु
- ऋषभ शेट्टी का दमदार निर्देशन
- शानदार विजुअल्स और साउंड डिजाइन
- पौराणिक व ऐतिहासिक भावनाओं का मिश्रण
- क्लाइमैक्स में आध्यात्मिक गहराई
कुछ क्षेत्रों में धार्मिक प्रतीकों की प्रस्तुति को लेकर हल्की बहस हुई, लेकिन इसे “सकारात्मक आध्यात्मिक संदेश” के रूप में व्यापक समर्थन मिला।कांतारा चैप्टर 1” सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि यह भारत की लोकआस्था, संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।यह फिल्म दर्शकों को बताती है कि आस्था कभी मिटती नहीं — वह बस रूप बदलती है।










