छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों को नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। झीरम घाटी हमले के मास्टरमाइंड और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के वरिष्ठ सदस्य चैतू उर्फ श्याम दादा ने जगदलपुर में आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ दंडकारण्य और दरभा डिवीजन में सक्रिय कुल 10 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। इनमें कई हाई-रैंक कैडर भी शामिल हैं।
बस्तर IG सुंदरराज पी, DIG कमलोचन कश्यप, पुलिस, CRPF, STF और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इन सभी नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराया गया। सभी को संविधान की प्रति भेंट कर स्वागत किया गया।63 वर्षीय चैतू, जिसे नक्सल संगठन में श्याम दादा के नाम से जाना जाता है, माओवादी आंदोलन से करीब 45 साल से जुड़ा हुआ था, जिनमें से 35 साल उसने बस्तर में हिंसक गतिविधियों को संचालन करते हुए बिताए।तेलंगाना में कॉलेज के दिनों से नक्सल विचारधारा से प्रभावित होकर उसने 1980 में संगठन जॉइन किया। धीरे-धीरे वह अबूझमाड़, दंडकारण्य और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जैसे क्षेत्रों में संगठन का विस्तार करने, नए युवाओं की भर्ती कराने और वैचारिक प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सँभालने लगा।
चैतू पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह कई वर्षों से सुरक्षा बलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था और कई बार घेराबंदी से बचकर निकलने में सफल रहा था।IG सुंदरराज ने बताया कि 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी नरसंहार में चैतू की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 30 लोगों की हत्या की गई थी।बस्तर टाइगर के नाम से प्रसिद्ध महेंद्र कर्मा पर नक्सलियों ने 100 से अधिक गोलियां दागी थीं और घटना को भयावह रूप देने के लिए उनके शव पर नृत्य भी किया था।हालाँकि IG ने स्पष्ट किया कि चैतू की हमले में भूमिका की आधिकारिक पुष्टि फाइलों की छानबीन के बाद की जाएगी।

सरेंडर के बाद चैतू ने कहा कि संगठन में अब “कुछ नहीं बचा” है।उसने बताया कि केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश और सोनू दादा के हालिया आत्मसमर्पण ने उसे भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।चैतू ने कहा कि“मेरी उम्र 63 साल हो चुकी है। बदली परिस्थितियों में जनता के बीच नए तरीके से काम करना चाहता हूँ। नक्सल संगठन को बहुत नुकसान हुआ है। अब हिंसा का कोई अर्थ नहीं बचा। बाकी साथियों से भी अपील करता हूँ कि वे भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें।”
सरेंडर करने वालों में शामिल नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम था।सभी 10 नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।IG सुंदरराज पी ने कहा कि बस्तर में चल रहे पूना-मार्गेम पुनर्वास अभियान के कारण नक्सलियों की संख्या तेजी से घट रही है।यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला कदम है।
जहाँ एक ओर नक्सल संगठन कमजोर हो रहा है, वहीं बड़ी संख्या में कैडर मुख्यधारा से जुड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में शामिल हो रहे हैं।