Bihar के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के खिलाफ प्रयागराज में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। यह मामला एक बीजेपी नेता की शिकायत पर दर्ज हुआ है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में किए गए एक प्रदर्शन के दौरान धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और भ्रामक प्रस्तुति देने का प्रयास किया गया। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में साधु-संत का वेश धारण कर चंदा चोरी से जुड़े मुद्दे पर प्रदर्शन किया गया। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रदर्शन के जरिए सनातन धर्म, साधु-संतों और हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया गया। इन आरोपों के आधार पर अदालत ने मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत ने मामले में संज्ञान लेते हुए पप्पू यादव के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश दिया है। अदालत ने उन्हें निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने के लिए भी कहा है। अब मामले की सुनवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संसद भवन के सामने किए गए प्रदर्शन में साधु का वेश धारण कर जिस प्रकार का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया, उससे धार्मिक समुदाय की भावनाएं प्रभावित हुईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस प्रदर्शन को लेकर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। एफआईआर दर्ज होना किसी भी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। अदालत में दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा और उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
जेल की सलाखों में बंद हैं चोरी के आरोपी
BJP नेता सुशील कुमार मिश्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि से जुड़ी कथित चोरी की घटना एक गंभीर आपराधिक मामला था। उनके अनुसार, इस प्रकरण में जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, वे वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर पहले से ही कानूनी कार्रवाई चल रही है और इसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है। शिकायतकर्ता का दावा है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन के दौरान इसी कथित चोरी की घटना को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया। उनके अनुसार, इस प्रदर्शन की शैली और संदेश ने धार्मिक आस्था से जुड़े विषय को अलग रूप में पेश किया, जिससे सनातन धर्म और उससे जुड़े श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुईं। इसी आधार पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मंदिर से जुड़े संवेदनशील विषय को सार्वजनिक प्रदर्शन का हिस्सा बनाकर प्रस्तुत करना उचित नहीं था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह की गतिविधि से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और धार्मिक मामलों को लेकर विवाद बढ़ सकता है। इन्हीं आरोपों के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई। अदालत ने शिकायत का संज्ञान लेने के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। इसके बाद पुलिस ने निर्धारित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच और न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब मामले से जुड़े सभी तथ्यों, शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा न्यायालय की निगरानी में होगी। यह पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है और संबंधित पक्षों को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी या दोष का निर्धारण केवल न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही किया जाएगा।

पप्पू यादव के खिलाफ 41 मुकदमे दर्ज
BJP नेता सुशील कुमार मिश्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन के दौरान एक संवेदनशील धार्मिक मुद्दे को कथित तौर पर गलत और भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रस्तुति से वास्तविक घटना की प्रकृति बदलकर दिखाई गई, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने न्यायालय से कानूनी कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि संबंधित सांसद के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। शिकायत में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, जबरन वसूली, धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर मामलों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन मामलों की अंतिम स्थिति और दोष सिद्ध होने का निर्णय संबंधित न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में है। संसद परिसर में साधु के वेश में किए गए प्रदर्शन से सनातन धर्म, साधु-संतों और हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस प्रदर्शन के माध्यम से धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं को लेकर भ्रामक संदेश देने का प्रयास किया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्होंने संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया। भाजपा नेता ने अपनी शिकायत में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि उस मामले में पहले से कानूनी कार्रवाई हो चुकी है और संबंधित आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के दौरान उसी घटना को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे वास्तविक तथ्यों को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। अदालत के आदेश के बाद पप्पू यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें 11 अगस्त 2026 को अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं और अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों तथा न्यायालय की सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।
शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में सांसद पप्पू यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर अदालत से उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि संसद परिसर जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थान पर किया गया प्रदर्शन सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़े प्रश्न खड़े करता है। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का अनुरोध किया था। अदालत ने शिकायत और प्रारंभिक तथ्यों पर विचार करने के बाद मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब जांच और न्यायिक कार्यवाही के दौरान सभी तथ्यों, दस्तावेजों और प्रस्तुत साक्ष्यों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। अदालत की निगरानी में दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार किसी भी एफआईआर या मुकदमे का दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता। किसी भी आरोप की पुष्टि केवल अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होती है। इसलिए जब तक न्यायालय अंतिम निर्णय नहीं देता, तब तक सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन रहते हैं। सुनवाई के दौरान यदि जांच एजेंसियों को नए तथ्य, दस्तावेज या अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त होते हैं, तो उन्हें भी नियमानुसार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। अदालत सभी उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद ही मामले में आगे की दिशा तय करेगी। यही कारण है कि फिलहाल किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। यह पूरा मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार होगी। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही दिया जाएगा। तब तक मामले से जुड़े सभी आरोप और दावे केवल जांच और न्यायिक परीक्षण का हिस्सा माने जाएंगे।