Bihar के मुजफ्फरपुर स्थित एक निजी अस्पताल में लगी भीषण आग के बीच 95 वर्षीय राधा देवी की सूझबूझ और सतर्कता ने कई मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। हादसे के दौरान जहां अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल था, वहीं राधा देवी ने समय रहते खतरे को पहचानकर अस्पताल कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी, जिससे राहत और बचाव कार्य जल्दी शुरू हो सका। कि देर रात अस्पताल परिसर में अचानक धुआं फैलना शुरू हुआ। अधिकांश मरीज और उनके परिजन गहरी नींद में थे, इसलिए शुरुआत में किसी को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ। इसी दौरान राधा देवी ने धुएं को महसूस किया और तुरंत मौजूद नर्सिंग स्टाफ को इसकी सूचना दी। उनकी सतर्कता ने संभावित बड़े नुकसान को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आग लगने के बाद अस्पताल में मौजूद लोगों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। कई मरीज ऐसे थे जो स्वयं चलने-फिरने में सक्षम नहीं थे। अस्पताल कर्मियों और परिजनों ने मिलकर मरीजों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया। समय रहते मिली जानकारी के कारण कई लोगों को धुएं से भरे वार्डों से बाहर निकाला जा सका। राधा देवी के परिजनों ने बताया कि आग देर रात करीब साढ़े तीन बजे के आसपास लगी थी। धीरे-धीरे धुआं पूरे परिसर में फैलने लगा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों को अलर्ट किया गया तथा अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई। दमकल कर्मियों के पहुंचने के बाद आग पर काबू पाने और लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान तेज किया गया। इस घटना के बाद राधा देवी की बहादुरी और जागरूकता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। लोग उन्हें इस हादसे की ‘मसीहा’ बता रहे हैं, क्योंकि उनकी सतर्कता ने कई परिवारों को बड़ी त्रासदी से बचाने में मदद की। यह घटना इस बात का भी उदाहरण है कि आपात स्थिति में एक व्यक्ति की सजगता कितनी बड़ी भूमिका निभा सकती है।
मुजफ्फरपुर के एक प्रमुख निजी अस्पताल में देर रात हुए अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर स्थित आईसीयू में अचानक आग लगने से वहां भर्ती गंभीर मरीजों के बीच अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, धुआं तेजी से पूरे आईसीयू में फैल गया, जिससे कई मरीजों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन इस दर्दनाक हादसे में चार मरीजों की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने अन्य मरीजों को तुरंत आसपास के अस्पतालों में स्थानांतरित किया, जबकि प्रशासन आग लगने के कारणों की जांच में जुट गया है। यह हादसा अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ICU बेड, उपकरण सभी जलकर हुए खाक

खुद से ऑक्सीजन मास्क हटाकर बाहर निकली दादी
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के दौरान 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला की सूझबूझ और साहस ने कई लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिस समय आईसीयू में धुआं फैलना शुरू हुआ, उस वक्त अधिकांश मरीज अपनी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण बेड पर ही थे। ऐसे माहौल में इस बुजुर्ग महिला ने स्थिति की गंभीरता को सबसे पहले महसूस किया। बताया जा रहा है कि धुएं की गंध आते ही उन्होंने अपने चेहरे पर लगा ऑक्सीजन मास्क हटाया और हालात को समझने की कोशिश की। जब उन्हें महसूस हुआ कि आईसीयू के अंदर कुछ असामान्य हो रहा है, तो उन्होंने बिना समय गंवाए वार्ड से बाहर निकलने का प्रयास किया। उनकी यह तत्परता बाद में कई मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई। आईसीयू से बाहर आने के बाद उन्होंने तुरंत ड्यूटी पर मौजूद नर्स और अस्पताल कर्मचारियों को आग लगने की आशंका के बारे में बताया। शुरुआत में कर्मचारियों ने स्थिति की जांच की और जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि आईसीयू में धुआं तेजी से फैल रहा है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया गया। अस्पताल स्टाफ ने तत्काल मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू किया। गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की मदद से बाहर निकाला गया, जबकि कुछ मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था की गई। साथ ही अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया गया। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का मानना है कि यदि बुजुर्ग महिला समय रहते सतर्कता नहीं दिखातीं, तो हादसे का दायरा और बड़ा हो सकता था। उनकी जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया ने राहत एवं बचाव कार्य को समय पर शुरू करने में मदद की। यही कारण है कि लोग उन्हें इस हादसे की एक सच्ची नायिका और कई जिंदगियों की रक्षक के रूप में देख रहे हैं।
धुआं फैलते हम बाहर निकलली और मैडम के बतइली…
साढे़ 3 बजे लगी आग, 3.55 में अग्निशमन विभाग को दी गई सूचना
अस्पताल में मौजूद लोगों का कहना है कि यदि राधा देवी ने समय रहते स्थिति की जानकारी नहीं दी होती, तो यह हादसा और भी भयावह रूप ले सकता था। आईसीयू में भर्ती कई मरीज गंभीर अवस्था में थे और उनमें से कुछ ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी थे। ऐसे में धुएं और आग का असर तेजी से फैल सकता था, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर रात करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल के आईसीयू क्षेत्र में आग लगने की शुरुआत हुई। शुरुआत में किसी को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे धुआं पूरे इलाके में फैलने लगा। अधिकांश मरीज और उनके परिजन उस समय आराम कर रहे थे, इसलिए स्थिति की गंभीरता को समझने में कुछ समय लगा। इसी दौरान राधा देवी ने धुएं को महसूस किया और अस्पताल कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी। उनकी चेतावनी के बाद स्टाफ ने तत्काल स्थिति का जायजा लिया और पाया कि आईसीयू के भीतर हालात गंभीर होते जा रहे हैं। इसके बाद मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई और अस्पताल परिसर में आपातकालीन माहौल बन गया। धुआं फैलने की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया। मरीजों को अलग-अलग वार्डों और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने की व्यवस्था भी की गई। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर बचाव अभियान में सहयोग किया। घटना की सूचना रात करीब 3:55 बजे अग्निशमन विभाग को दी गई, जिसके बाद दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने और अस्पताल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए तेजी से कार्रवाई की गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि शुरुआती मिनटों में दिखाई गई सतर्कता और त्वरित सूचना ने बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अग्निशमन विभाग के अधिकारी ने बताया 15-20 लोगों को निकाला
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के बाद अग्निशमन विभाग ने राहत और बचाव अभियान को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। अधिकारियों के अनुसार आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम बिना देरी किए मौके के लिए रवाना हो गई थी। अस्पताल में मौजूद मरीजों और कर्मचारियों को सुरक्षित निकालना उस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी रामनिवास पांडे ने बताया कि विभाग को देर रात करीब 3:55 बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही दमकलकर्मियों की टीम आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। उस समय अस्पताल के आईसीयू और आसपास के क्षेत्रों में धुआं फैल चुका था, जिससे बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया था। दमकल कर्मियों ने अस्पताल प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से तत्काल राहत अभियान शुरू किया। टीम ने धुएं और आग के बीच फंसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम किया। अधिकारियों के अनुसार लगभग 15 से 20 मरीजों और अन्य लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया, जिससे बड़ा नुकसान टल सका। बचाव अभियान के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मरीजों की हालत बेहद गंभीर थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दो मरीजों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। बाद में उपचार के दौरान दो अन्य मरीजों के निधन की सूचना सामने आई, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ गई। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। आग लगने के कारणों का पता लगाने के साथ-साथ अस्पताल में मौजूद सुरक्षा इंतजामों की भी समीक्षा की जा रही है। इस हादसे ने स्वास्थ्य संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।