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मथुरा में सामूहिक आत्महत्या: एक ही परिवार के पांच सदस्यों की दर्दनाक मौत

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। थाना महावन क्षेत्र के गांव खप्परपुर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों—पति, पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चों—ने सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में मातम छा गया है और हर कोई स्तब्ध है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सोमवार रात (9 फरवरी 2026) को परिवार के सभी सदस्यों ने दूध में जहर मिलाकर उसका सेवन किया। जब मंगलवार सुबह तक घर का दरवाजा नहीं खुला और भीतर से कोई हलचल नहीं दिखी, तो पड़ोसियों को शक हुआ। उन्होंने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर घर के अंदर दाखिल हुई। अंदर का दृश्य बेहद भयावह था—घर के भीतर पति-पत्नी और उनके तीनों बच्चे मृत पड़े मिले। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह परिवार बेहद शांत, मिलनसार और सामान्य जीवन जी रहा था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वे इतना बड़ा और खौफनाक कदम उठा सकते हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। हर आंख नम है और लोग इस त्रासदी को लेकर गहरे सदमे में हैं।

पुलिस की शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परिवार ने यह कदम क्यों उठाया। आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे आर्थिक तंगी, पारिवारिक तनाव, कर्ज या मानसिक दबाव जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी।

पुलिस परिवार के रिश्तेदारों, पड़ोसियों और जान-पहचान वालों से पूछताछ कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि हाल के दिनों में परिवार किसी गंभीर समस्या से गुजर रहा था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जहर कहां से और कैसे प्राप्त किया गया।

इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर समाज में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक सहयोग और समय पर मदद की अहमियत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक तनाव या परेशानी की स्थिति में अकेले रहने के बजाय परिवार, दोस्तों या काउंसलिंग सेवाओं की मदद लेना बेहद जरूरी है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और गांव में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि मानसिक और भावनात्मक समस्याओं को नजरअंदाज करना कितना घातक हो सकता है।

 

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