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TRUMP की बढ़ी मुश्किलें,गोल्ड कार्ड के खिलाफ 20 राज्यों ने माननीय कोर्ट ने दर्ज किया मुकदमा,कहा- कुशल प्रोफेशनल्स की होगी कमी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ वीजा नीति कानूनी विवादों में घिरती नजर आ रही है। कैलिफोर्निया के नेतृत्व में अमेरिका के 20 राज्यों ने इस वीजा पर लगाई गई 1 मिलियन डॉलर (करीब 9 करोड़ रुपये) की भारी फीस को लेकर माननीय फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।इन राज्यों का आरोप है कि यह फैसला गैर-कानूनी, मनमाना और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम (APA) का उल्लंघन है, जिससे अमेरिका में पहले से मौजूद डॉक्टरों, शिक्षकों और कुशल प्रोफेशनल्स की कमी और गहराएगी।

कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बॉन्टा ने कहा कि यह वीजा डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, वैज्ञानिक और शिक्षकों जैसे हाई-स्किल प्रोफेशनल्स के लिए होता है।उनका कहना है कि पहले H-1B वीजा की फीस 1,000 से 7,500 डॉलर के बीच थी, लेकिन अब इसे अचानक बढ़ाकर 1 लाख डॉलर और गोल्ड कार्ड के लिए 1 मिलियन डॉलर कर देना कानून के खिलाफ है।राज्यों का तर्क है कि इतनी बड़ी फीस बढ़ोतरी कांग्रेस की मंजूरी के बिना की गई।वीजा प्रोसेसिंग की वास्तविक लागत से यह फीस सैकड़ों गुना ज्यादा है।बिना नोटिस और पब्लिक कमेंट के नियम बदलना APA का उल्लंघन है

राज्यों ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थानों को सबसे बड़ा झटका लगेगा।अमेरिका के 75% डिस्ट्रिक्ट स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की कमी है।स्पेशल एजुकेशन, साइंस और बाइलिंगुअल टीचर्स की भारी डिमांड है।2024 में करीब 17,000 विदेशी डॉक्टर और नर्सों को वीजा दिया गया था।2036 तक अमेरिका में 86,000 डॉक्टरों की कमी का अनुमान लगाया जा रहा है।अब एक विदेशी शिक्षक या डॉक्टर लाने की लागत करीब 9 करोड़ रुपये होने से स्कूल और अस्पताल या तो सेवाएं घटाएंगे या जरूरी योजनाओं में कटौती करेंगे।

किन राज्यों ने दायर किया मुकदमा?

कैलिफोर्निया के अलावा इस मुकदमे में शामिल राज्यों में न्यूयॉर्क, मैसाचुसेट्स, इलिनोइस, न्यू जर्सी, वाशिंगटन, एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, मैरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, नॉर्थ कैरोलिना, ओरेगन, रोड आइलैंड, वर्मोंट और विस्कॉन्सिन शामिल है।य़ृमैसाचुसेट्स की अटॉर्नी जनरल एंड्रिया जॉय कैंपबेल इस मामले में सह-अध्यक्षता कर रही हैं।

व्हाइट हाउस का जवाब

व्हाइट हाउस ने इस नीति का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम वीजा प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकने के लिए है।इससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और वेतन की सुरक्षा होगी।हालांकि आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और भारत, चीन जैसे देशों से आने वाले 70% से ज्यादा प्रोफेशनल्स अमेरिका की जगह कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप का रुख कर सकते हैं।

क्या है ट्रम्प गोल्ड कार्ड?

1 मिलियन डॉलर फीस पर अनलिमिटेड रेसीडेंसी व अमेरिकी नागरिकों जैसी लगभग सभी सुविधाएं औऱ वोटिंग और पासपोर्ट को छोड़कर बाकी अधिकार मिलेंगे। ट्रम्प प्रशासन जल्द ही 5 मिलियन डॉलर वाला ‘ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड’ भी लॉन्च करने की तैयारी में है।

सोशल मीडिया जांच भी होगी सख्त

नई वीजा नीति के तहत आवेदकों को पिछले 5 साल का सोशल मीडिया रिकॉर्ड भी देना होगा, जिससे वीजा प्रक्रिया और सख्त हो जाएगी।

ट्रम्प का गोल्ड कार्ड वीजा जहां सरकार के लिए रेवेन्यू और अमेरिका फर्स्ट एजेंडे का हिस्सा है, वहीं राज्यों का मानना है कि यह नीति अमेरिका को मिलने वाले वैश्विक टैलेंट के दरवाजे बंद कर देगी। अब इस मामले में अदालत का फैसला तय करेगा कि यह योजना आगे बढ़ेगी या नहीं।

 

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