ट्रंप के टैरिफ का जवाब… मोदी सरकार ने 6 वर्षों में 9 देशों के साथ बनाई ‘विशेष संधि’ भारत ने अनेक ग्लोबल चुनौतियों के बीच अपनी रणनीति के अंतर्गत एक के बाद एक कई प्रमुख डील की हैं. पिछले छह वर्षों में मोदी सरकार ने मॉरिशस, ओमान, यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड के साथ FTA पर हस्ताक्षर किए हैं। रूस-युक्रेन का युद्ध हो, इजरायल-फिलিস্তीन का विवाद हो, अमेरिका-ईरान की लड़ाई हो या ट्रंप टैरिफ से दुनिया का डराना, पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक चुनौतियाँ उभरी हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की वृद्धि लगातार तेज बनी हुई है। दुनिया ने भारत को मान्यता दी है और ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि जब विश्व व्यापार और महंगाई के संकट का सामना कर रहा था, तब मोदी सरकार ने लगातार अद्भुत कार्य किए। इसका अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि पिछले छह वर्षों में भारत ने 9 देशों के साथ फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA पर हस्ताक्षर किए हैं, जो अमेरिकी टैरिफ का सामना करने में सफल रहे हैं। नै freshest डीन न्यूजीलैंड के संग की गई है. कई देशों के साथ एफटीए के जरिए सरकार को जहां भारतीय उत्पादों के निर्यात के लिए नए और विशाल बाजार हासिल हो रहे हैं, वहीं आयात पर निर्भरता भी घट रही है. इसके अतिरिक्त भारत में निवेश के लिए मार्ग प्रशस्त हैं और ये रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में प्रभावी हो रहे हैं।
यूके से लेकर ईयू तक के एफटीए
भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते स्थापित किए हैं। इनमें मॉरिशस, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) के साथ किए गए एफटीए शामिल हैं। नंबर में मोदी सरकार ने मॉरिशस के साथ एक संधि (India-Mauritius FTA) की थी और यह पहली बार था जब भारत ने किसी अफ्रीकी देश के साथ FTA हस्ताक्षरित किया था।2022 में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मुक्त व्यापार समझौता साइन किया गया था. इस FTA के तहत जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था, उसके अनुसार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को FY 2025 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचाना है। भारत ने 2022 में एक और सौदा किया। इस बार भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनी और इस पर हस्ताक्षर किए गए। यह भारत द्वारा किया गया पहला एफटीए था, जिसमें 100 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क शून्य किया गया।
भारत और ईएफटीए (EFTA – स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन) देशों के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) पर 2024 के मार्च महीने की 10 तारीख को हस्ताक्षर हुए. यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ। इसका उद्देश्य 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करना रहा। 2025 में भारत और ब्रिटेन के बीच एक संधि हुई। जुलाई के महीने में दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। इस एफटीए के तहत भारत के 99% निर्यातित सामानों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त करने का मार्ग सुनिश्चित हुआ। इसके अलावा इस सौदे का लक्ष्य India-UK के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

2025 के अंत में, अर्थात दिसंबर में, मोदी सरकार ने एक सौदे को पूरा कर लिया। ट्रंप टैरिफ के कारण विश्व में फैले भय के बीच भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (India-Oman CEPA) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत ओमान भारत को अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर टैरिफ मुक्त (Tariff Free) पहुंच उपलब्ध कराएगा। इसमें भारत से ओमान को निर्यात की जाने वाली 99.38% वस्तुएं शामिल हैं। दूसरी ओर, भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइनों में से 77.79% पर शुल्क में छूट देने का प्रस्ताव रखा है, जो ओमान से आने वाले 94.81% वस्तुओं को शामिल करता है।
2026 की शुरुआत, यानी जनवरी में भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया। इंडिया-ईयू एफटीए को ‘सभी सौदों की माता’ (Mother Of All Deals) माना गया। डील के अनुसार भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के राष्ट्रों में शून्य शुल्क निर्यात (Zero Tariff Export) का प्रवेश प्राप्त हुआ। यह डील कपड़ा-परिधान क्षेत्र के लिए सबसे लाभकारी साबित हो रही है, क्योंकि अमेरिका के बाद इस क्षेत्र में भारतीय एक्सपोर्ट के लिए ईयू सबसे बड़ा बाजार है, जिसका मूल्य 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अतिरिक्त देशों ने इस समझौते के अंतर्गत अपने बाजारों को एक-दूसरे के लिए खोलने पर सहमति दी और दोनों के 90 प्रतिशत तक उत्पादों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने की घोषणा की गई।