अमेरिका की कार्रवाई से बढ़ा तनाव
शनिवार को पाकिस्तान में हुई अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी जाहिर की। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रणनीतिक नाकेबंदी लागू कर दी। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इस कदम का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
ईरान ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और इसे उकसाने वाला कदम बताया। वहीं अब चीन भी खुलकर अमेरिका के खिलाफ सामने आ गया है।
Xi Jinping का सख्त संदेश
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दुनिया को “जंगलराज” की ओर नहीं जाने दिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध नियमों और सहयोग पर आधारित होने चाहिए, न कि ताकत के प्रदर्शन पर।
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और उसके सहयोगी देश वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बहुपक्षवाद को मजबूत करने और किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध करने की बात कही।
स्पेन के समर्थन में चीन
इस पूरे घटनाक्रम में चीन ने स्पेन का भी समर्थन किया है। पहले जहां अमेरिका ने स्पेन की चिंताओं को नजर अंदाज किया था, वहीं अब चीन ने स्पेन के रुख को सही ठहराते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है।

हथियार सप्लाई के आरोपों पर सफाई
अमेरिका की ओर से लगाए गए आरोपों में कहा गया कि चीन ईरान को एयर डिफेंस से जुड़े हथियार उपलब्ध करा रहा है। इन आरोपों को चीन ने सिरे से खारिज कर दिया है। बीजिंग का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने के पक्ष में है और किसी भी तरह की सैन्य आपूर्ति के आरोप निराधार हैं।
हालांकि, कुछ खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि चीन ईरान को रक्षा उपकरण देने की तैयारी कर रहा है या पहले ही दे चुका है। इस मुद्दे पर अमेरिका ने चीन पर अतिरिक्त 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दी है।
चीन की चेतावनी और जवाबी कार्रवाई की तैयारी
चीन ने स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा। इस बयान से यह साफ है कि यह मामला अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक टकराव का रूप ले सकता है।
विदेश मंत्रालय की चिंता
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम पहले से ही नाजुक स्थिति में चल रहे युद्धविराम प्रयासों को कमजोर कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस नाकेबंदी से समुद्री मार्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ेगा।
क्या हो सकते हैं आगे के परिणाम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं संभली, तो यह विवाद बड़े सैन्य और आर्थिक संघर्ष में बदल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ेगा।
फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका, ईरान और चीन के बीच यह तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या कूटनीतिक समाधान निकल पाता है या नहीं।