अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीज़ा प्रणाली को और सख्त बनाते हुए ऐसा नियम लागू किया है, जो पहली बार सभी तकनीकी प्रवासियों के लिए बाध्यकारी होगा। नए आदेश के तहत H-1B वीज़ा आवेदकों और उनके H-4 आश्रितों (पत्नी, बच्चे, पेरेंट्स) को अब अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को “पब्लिक” करना अनिवार्य होगा। यह नियम 15 दिसंबर से लागू होगा। H-1B वीज़ा सोशल मीडिया स्क्रीनिंग अब अनिवार्य होगी।US स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा जारी नए ऑर्डर में कहा गया है कि H-1B, H-4, F-1, M-1, J-1, B-1 और B-2 वीज़ा के सभी आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्राइवेसी सेटिंग्स “पब्लिक” करनी होगी।

वीज़ा अधिकारी अब पोस्ट, लाइक्स, फॉलोअर्स और ओवरऑल ऑनलाइन बिहेवियर की समीक्षा कर सकेंगे।यदि किसी भी गतिविधि को “अमेरिकी हितों के खिलाफ” माना गया, तो वीज़ा तुरंत रिजेक्ट किया जा सकता है।डिपार्टमेंट ने दोहराया कि अमेरिकी वीज़ा एक अधिकार नहीं, बल्कि एक प्रिविलेज है, और हर वीज़ा निर्णय को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा गया है।
ट्रम्प का बदलता रुख
ट्रम्प के 9 वर्षों के राजनीतिक सफर में H-1B वीज़ा को लेकर रुख कई बार बदला है।2016 में H-1B को अमेरिकी नौकरियों के लिए खतरा बताया।2019 में H-1B एक्सटेंशन को सस्पेंड किया।2025 में कहा कि “हमें ग्लोबल टैलेंट की जरूरत है।”ट्रंप ने 3 नए प्रीमियम वीज़ा कार्ड लॉन्च किए।H-1B नियमों में बदलाव के साथ ट्रम्प प्रशासन ने तीन नई विशेष वीज़ा स्कीमें भी लॉन्च की हैं।

जिसमें सबसे पहले ट्रम्प गोल्ड कार्ड है जिसकी कीमत ₹8.8 करोड़ है।इसका लोगों को यह फायदा होगा कि प्रवासी व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी मिलेगी।ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड इससे एलीट वीज़ा बेनिफिट्स मिलेंगे।कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड उच्च-आय वाले निवेशकों/कंपनियों के लिए यह कार्ड लॉन्च किया है।यह पहली बार है जब अमेरिकी सरकार वीज़ा प्रक्रिया को सोशल मीडिया स्क्रीनिंग से सीधे जोड़ रही है, जिससे आवेदकों पर पारदर्शिता रखने का दबाव बढ़ गया है।









