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Nepal बाढ़ में करोड़ों का खजाना सुरक्षित

Nepal में लगातार बारिश और बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा रखी है। रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई जगहों पर इमारतों व दूसरे जरूरी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। इसी आपदा के बीच नुवाकोट के त्रिशूली स्थित एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंक की धुंगे शाखा भी बाढ़ के पानी और मलबे की चपेट में आ गई। हालात कुछ सामान्य होने के बाद बैंक के अंदर फंसी नकदी और दूसरी महत्वपूर्ण संपत्तियों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया गया। नेपाल पुलिस की टीम ने करीब आठ घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस दौरान बैंक से लगभग 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, करीब 50 करोड़ नेपाली रुपये मूल्य का सोना और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए गए। बैंक के अंदर मौजूद इतनी बड़ी संपत्ति को मलबे और पानी के बीच निकालना आसान नहीं था। राहत टीमों को खराब मौसम और मुश्किल परिस्थितियों के बीच काम करना पड़ा। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बैंक की संपत्तियों को एक-एक करके सुरक्षित किया गया। इस कार्रवाई से बैंक की महत्वपूर्ण संपत्ति को और नुकसान होने से बचा लिया गया। नेपाल सरकार इस समय बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चला रही है। अब तक 9,435 लोगों को हवाई और सड़क मार्ग के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। बचाव कार्य के लिए अब तक 394 उड़ानें संचालित की गई हैं, जिनमें रविवार को ही 72 उड़ानें शामिल थीं। प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 20,618 सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि बाढ़ से हुई पूरी क्षति का आकलन अभी मुश्किल बना हुआ है। कई इलाकों में मौसम खराब है और भौगोलिक परिस्थितियां भी राहत टीमों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद सरकार का फोकस लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सहायता पहुंचाने पर है। बैंक से करोड़ों की संपत्ति को सुरक्षित निकालने का अभियान भी इसी व्यापक राहत प्रयास का हिस्सा रहा।

सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए 279 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

नेपाल में बाढ़ के कारण जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास के इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। तेज बहाव, खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण राहत टीमों के सामने कई मुश्किलें हैं। ऐसे हालात में नेपाली सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जा रही है। जलविद्युत परियोजना वाले इलाकों से अब तक 279 लोगों को नेपाली सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए सुरक्षित निकाला जा चुका है। हेलीकॉप्टरों की मदद से उन स्थानों तक पहुंचना संभव हो रहा है, जहां सड़क संपर्क बाढ़ और भूस्खलन के कारण बाधित हो गया है। राहत टीमों की प्राथमिकता फिलहाल फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित जगह तक पहुंचाना है। रसुवा स्थित अपर त्रिशूली-1 परियोजना के आसपास भी बचाव अभियान तेजी से चलाया गया। भारतीय विशेषज्ञों की टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर लगातार दो दिनों तक ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इस दौरान करीब 250 लोगों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां राहत कार्य काफी चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। नेपाल के बचाव अभियान में भारत के साथ चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ दल भी सहयोग कर रहे हैं। अलग-अलग टीमों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल प्रभावित क्षेत्रों में खोज और राहत कार्य को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इससे उन स्थानों पर भी अभियान चलाने में मदद मिल रही है, जहां सामान्य बचाव दलों के लिए पहुंचना मुश्किल है। भारतीय विशेषज्ञ टीम सुरंग के अंदर भी खोज अभियान चला रही है। टीम करीब तीन किलोमीटर तक सुरंग के भीतर जाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश कर रही है। सुरंगों और परियोजना क्षेत्रों में काम करना जोखिम भरा है, इसलिए सुरक्षा उपायों के साथ चरणबद्ध तरीके से तलाशी अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। नेपाल में जारी इस व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन का मकसद केवल लोगों को बाहर निकालना ही नहीं, बल्कि बाढ़ से कट चुके इलाकों में राहत पहुंचाना भी है। नेपाली सेना और सहयोगी देशों की टीमें लगातार हालात का आकलन कर रही हैं। मौसम और जमीनी परिस्थितियां जैसे-जैसे बेहतर होंगी, बचाव अभियान को और तेज किए जाने की उम्मीद है।

नुवाकोट में सुरंंग में बचाव अभि‍यान जारी 

नेपाल में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच नुवाकोट की अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ जलविद्युत परियोजना की सुरंग में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। सुरंग तक पहुंचना टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। मलबे और मुश्किल परिस्थितियों के कारण बचाव दल को अंदर जाने का रास्ता बनाने में काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है। नेपाली सेना के इंजीनियर सुरंग तक पहुंचने के लिए ब्लास्टिंग की मदद ले रहे हैं। इससे बंद रास्ते को खोलने और अंदर तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है। अभियान में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस के विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षित खोजी कुत्तों को भी लगाया गया है। करीब 90 लोगों की संयुक्त टीम मौके पर बचाव कार्य में जुटी हुई है। बचाव दल ने सुरंग के भीतर एक छोटा रास्ता बनाने के लिए करीब दो बाई तीन फीट का छेद भी तैयार किया था। हालांकि, इस रास्ते से अंदर की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद टीमों ने रणनीति में बदलाव करते हुए बड़े उपकरणों की मदद से सुरंग को खोलने और चौड़ा करने का काम शुरू किया है। सुरंग में कई स्तरों पर एक साथ काम किया जा रहा है। एक तरफ भारी मशीनों से रास्ता साफ किया जा रहा है, तो दूसरी ओर जरूरत के मुताबिक ब्लास्टिंग की जा रही है। बचाव दल का उद्देश्य सुरंग के अंदर अधिक सुरक्षित तरीके से पहुंच बनाना और वहां संभावित रूप से फंसे लोगों की स्थिति का पता लगाना है। नुवाकोट और आसपास की अन्य जलविद्युत परियोजनाओं में भी राहत अभियान चल रहा है। अपर त्रिशूली-3 ‘बी’, चिलिमे, लांगटांग खोला और मैलुंग खोला परियोजनाओं को भी बचाव कार्य के दायरे में रखा गया है। बाढ़ और खराब मौसम के कारण इन क्षेत्रों में सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे रेस्क्यू टीमों के लिए काम और मुश्किल हो गया है। इन अभियानों में भारत के विशेषज्ञ दल भी नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय विशेषज्ञ अपनी तकनीकी जानकारी और अनुभव के जरिए खोज एवं बचाव अभियान में सहयोग दे रहे हैं। अलग-अलग टीमों के बीच समन्वय बनाकर प्रभावित परियोजना क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। नेपाल में जारी इस अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और सुरंगों के भीतर बना जोखिम है। इसके बावजूद सुरक्षा बल और विशेषज्ञ टीमें लगातार अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। सुरंग को खोलने के प्रयासों के साथ-साथ आसपास के अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी खोज और राहत कार्य जारी रखा गया है।

267 घायलों का इलाज

नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश के कारण प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। बाढ़ के दौरान घायल हुए लोगों को सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया गया है, ताकि उन्हें समय पर इलाज मिल सके। अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 267 घायलों को रेस्क्यू कर अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें स्थानीय अस्पतालों के साथ राजधानी काठमांडू के अलग-अलग अस्पताल भी शामिल हैं। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उन्हें जरूरत के मुताबिक बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया गया। इलाज के बाद कई मरीजों की स्थिति में सुधार देखने को मिला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 156 लोगों को उपचार पूरा होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। वहीं, बाकी मरीजों का इलाज अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ जैसी आपदा में लोगों को सिर्फ शारीरिक चोटों का ही सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि अचानक आई तबाही और अपनों से बिछड़ने जैसी घटनाओं का मानसिक असर भी गहरा हो सकता है। इसी को देखते हुए नेपाल सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता की व्यवस्था भी शुरू की है। काठमांडू से डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं। ये टीमें स्थानीय स्तर पर मरीजों की जांच और उपचार करने के साथ जरूरतमंद लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह भी दे रही हैं। इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित लोगों को उनके आसपास ही जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ के बाद संक्रमण और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन की कोशिश है कि जरूरतमंद लोगों को समय पर दवाएं, प्राथमिक उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता मिल सके। नेपाल में राहत एजेंसियां, सुरक्षा बल और स्वास्थ्य विभाग मिलकर अभियान चला रहे हैं। एक तरफ जहां बचाव दल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं, वहीं मेडिकल टीमें घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने का काम कर रही हैं।

प्रधानमंत्री राहत कोष में 5.24 अरब नेपाली रुपये

नेपाल में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत अभियान के साथ आर्थिक सहायता जुटाने का काम भी तेज कर दिया गया है। सरकार की ओर से प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप कोष और प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से लोगों और संस्थाओं से आर्थिक सहयोग लिया जा रहा है। इस राशि का इस्तेमाल आपदा से प्रभावित परिवारों और राहत कार्यों में किया जा रहा है। राहत कोष में लोगों और विभिन्न संस्थाओं की ओर से लगातार योगदान दिया जा रहा है। रविवार दोपहर तक देश के नौ वाणिज्यिक बैंकों में खोले गए खातों में कुल 5 अरब 24 करोड़ 79 लाख 44 हजार 585 नेपाली रुपये जमा हो चुके थे। इतनी बड़ी रकम जमा होना बताता है कि मुश्किल की इस घड़ी में राहत प्रयासों के लिए आर्थिक सहयोग भी तेजी से जुट रहा है। राहत कोष में केवल नेपाली मुद्रा ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा के रूप में भी सहायता पहुंची है। हिमालयन बैंक और लक्ष्मी बैंक में अब तक 21 लाख 232 अमेरिकी डॉलर जमा किए जा चुके हैं। इस राशि को भी आपदा प्रभावित लोगों की मदद और राहत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। नेपाल में बाढ़ के कारण कई इलाकों में लोगों के घर, सड़कें और दूसरी जरूरी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे में राहत अभियान को लंबे समय तक जारी रखने के लिए आर्थिक संसाधनों की जरूरत है। सरकार की कोशिश है कि उपलब्ध धनराशि का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, चिकित्सा, अस्थायी आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर किया जाए। राहत कोष में जमा हो रही रकम के जरिए सरकार आपदा के बाद की चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी कर रही है। तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ आने वाले समय में प्रभावित इलाकों में पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं को दोबारा खड़ा करना भी बड़ी प्राथमिकता रहने वाली है। नेपाल में चल रहे बचाव और राहत अभियान के बीच आर्थिक सहायता का यह प्रयास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन अभी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है। सरकार और राहत एजेंसियों के सामने लोगों को सुरक्षित रखने के साथ उनके जीवन को दोबारा सामान्य बनाने की चुनौती भी बनी हुई है।

26 राहत केंद्रों में हजारों लोगों को आश्रय

नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने का काम लगातार जारी है। रसुवा और नुवाकोट में प्रशासन की ओर से 26 अस्थायी राहत और आश्रय केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों में उन लोगों को ठहराया जा रहा है, जिनके घर बाढ़ या दूसरी प्राकृतिक आपदा के कारण प्रभावित हुए हैं और जिन्हें फिलहाल सुरक्षित जगह की जरूरत है। रविवार को ही इन राहत केंद्रों के जरिए 3,454 लोगों को अस्थायी आश्रय और जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया। लोगों को रहने की जगह देने के साथ भोजन और अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि प्रभावित परिवारों को तब तक सहायता मिलती रहे, जब तक उनके लिए सामान्य परिस्थितियां बहाल नहीं हो जातीं। नेपाल की मदद के लिए भारत और चीन समेत कई देशों से राहत सामग्री पहुंच रही है। आपदा के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग से राहत अभियान को मजबूती मिल रही है। खासतौर पर चिकित्सा सामग्री और दूसरी जरूरी चीजों की आपूर्ति से प्रभावित इलाकों में काम कर रही टीमों को काफी मदद मिल रही है। भारत की ओर से अब तक चार चरणों में कुल 68.5 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाएं नेपाल भेजी जा चुकी हैं। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए भेजी गई इस मदद में राहत कार्यों में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक सामग्री भी शामिल है। इसके अलावा भारत ने प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था सुधारने के लिए 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज भी उपलब्ध कराया है। बाढ़ के कारण कई जगह सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे राहत टीमों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ऐसे में अस्थायी पुलों की जरूरत काफी बढ़ गई है। भारत ने सात और बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है, जबकि नेपाल की ओर से कुल 30 बेली ब्रिज की मांग की गई है। राहत केंद्रों से लेकर पुल निर्माण तक, नेपाल में इस समय राहत अभियान कई स्तरों पर चल रहा है। एक तरफ प्रभावित लोगों को सुरक्षित ठिकाना और जरूरी सामान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर टूटे संपर्क मार्गों को बहाल करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों को दोबारा सामान्य व्यवस्था से जोड़ना और लोगों की मुश्किलें कम करना है।

अंतरराष्ट्रीय मदद भी बढ़ी

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद का सिलसिला तेज हो गया है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने आर्थिक सहयोग का भरोसा दिलाया है। एशियाई विकास बैंक ने नेपाल को राहत प्रयासों के लिए 50 लाख अमेरिकी डॉलर का बजटीय अनुदान देने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही संस्था की ओर से 1.5 लाख डॉलर की तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है। आर्थिक मदद के साथ तकनीकी सहयोग से नेपाल को आपदा के बाद की चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलने की उम्मीद है। विश्व बैंक की ओर से भी नेपाल के लिए बड़ी वित्तीय सहायता का भरोसा दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, विश्व बैंक 16.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रियायती ऋण उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इस राशि का इस्तेमाल राहत के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सुविधाओं की बहाली और पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भी नेपाल के राहत प्रयासों में आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की है। अमेरिका की ओर से 5 लाख डॉलर और ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 10 लाख डॉलर की सहायता का आश्वासन मिला है। इन देशों की मदद से आपदा प्रभावित लोगों के लिए चलाए जा रहे राहत कार्यों को अतिरिक्त संसाधन मिल सकेंगे। स्विट्जरलैंड की ओर से भी सहायता पहुंचाई गई है। संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से राहत कार्यों में इस्तेमाल किए जाने के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक की मदद मिली है। यह सहायता जरूरत के अनुसार प्रभावित लोगों तक जरूरी सेवाएं और सामग्री पहुंचाने में इस्तेमाल की जा सकती है। नेपाल में बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क, पुल, संचार व्यवस्था और दूसरी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे में केवल तत्काल राहत पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लंबे समय तक पुनर्वास और पुनर्निर्माण की जरूरत भी पड़ेगी। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अलग-अलग देशों से मिल रही वित्तीय मदद इसी बड़ी चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नेपाल सरकार का जोर प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ जरूरी ढांचे को फिर से खड़ा करने पर है। अलग-अलग देशों और वैश्विक संस्थाओं की ओर से मिल रहे सहयोग से राहत अभियान को मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इन संसाधनों का इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने के लिए किया जाएगा।

संचार सेवा बहाल करने का प्रयास

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 20 हजार से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है। जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना के हेलीकॉप्टर भी लगातार इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अकेले हेलीकॉप्टर अभियान के जरिए 279 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। रेस्क्यू अभियान में भारत समेत कई देशों की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाल की मदद कर रही हैं। भारतीय विशेषज्ञों ने रसुवा स्थित अपर त्रिशूली-1 परियोजना के आसपास बचाव अभियान में हिस्सा लिया है। जानकारी के मुताबिक, दो दिनों के भीतर करीब 250 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाली सुरक्षा बलों के साथ राहत अभियान में सहयोग कर रही हैं। नुवाकोट की अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भी बचाव कार्य जारी है। सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना के इंजीनियर रास्ता बनाने में जुटे हैं। इसके लिए ब्लास्टिंग और भारी मशीनों की मदद ली जा रही है। सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के प्रशिक्षित जवानों समेत करीब 90 लोगों की टीम इस अभियान में लगी हुई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 267 घायलों को निकालकर अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 156 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी डॉक्टरों की टीमें भेजी हैं। राहत व्यवस्था के तहत रसुवा और नुवाकोट में 26 अस्थायी राहत एवं आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। रविवार को इन केंद्रों के जरिए 3,454 लोगों को अस्थायी ठिकाना और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। बाढ़ के कारण जिन लोगों के घर या स्थानीय सुविधाएं प्रभावित हुई हैं, उनके लिए ये केंद्र फिलहाल बड़ी मदद साबित हो रहे हैं। नेपाल को इस मुश्किल समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहायता मिल रही है। भारत से चार चरणों में 68.5 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाएं पहुंचाई जा चुकी हैं। इसके अलावा भारत ने 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज भेजा है और सात अन्य बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है। नेपाल की ओर से कुल 30 बेली ब्रिज की मांग की गई है।

आपदा के बीच संचार व्यवस्था को बहाल करना भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। बाढ़ के कारण नेपाल टेलिकॉम के 38 और एनसेल के 27 टावर प्रभावित हुए थे। इनमें से बड़ी संख्या में टावरों को दोबारा चालू किया जा चुका है। दूरदराज के प्रभावित इलाकों में 20 सैटेलाइट फोन भी भेजे गए हैं, ताकि राहत एवं बचाव टीमों के बीच संपर्क बना रहे। इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए नेपाल को आर्थिक मदद भी मिल रही है। प्रधानमंत्री राहत और दैवी प्रकोप कोष के जरिए बड़ी राशि जुटाई जा रही है। इसके अलावा एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों और संस्थाओं ने आर्थिक एवं तकनीकी सहायता देने का भरोसा दिया है। नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश करने और बाढ़ से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की है। त्रिशूली स्थित बैंक से करोड़ों की संपत्ति को सुरक्षित निकालना राहत अभियान की एक अहम उपलब्धि जरूर है, लेकिन व्यापक स्तर पर पुनर्वास और सामान्य जनजीवन बहाल करने की चुनौती अभी भी बनी हुई है।

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