26 जून को अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक
यह बैठक देश में नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक और समन्वित दृष्टिकोण को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। इसमें सभी संबंधित मंत्रालयों, राज्यों और एजेंसियों द्वारा अब तक किए गए प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी, ताकि यह समझा जा सके कि वर्तमान रणनीतियाँ कितनी प्रभावी रही हैं। इस दौरान नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों की प्रगति, चुनौतियों और उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जाएगा। विभिन्न विभाग अपने-अपने स्तर पर की गई कार्रवाई और भविष्य की योजनाओं को साझा करेंगे, जिससे एक संयुक्त और प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके। बैठक का उद्देश्य केवल समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आगे की दिशा तय करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी एजेंसियां एक साझा लक्ष्य के साथ काम करें और नशे के नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाएं। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान हो सके और कार्रवाई में तेजी लाई जा सके। इससे नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इस चर्चा से जुड़े सभी प्रतिभागियों को नए उत्साह और मजबूत प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी, जिससे देश में नशा विरोधी अभियान को और अधिक सशक्त और परिणामकारी बनाया जा सकेगा।

नशे खिलाफ लड़ाई का रोडमैप होगा फाइनल
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही मुहिम को लेकर पहले भी कई महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता की है। इसी क्रम में जनवरी में आयोजित नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष स्तरीय बैठक को बेहद अहम माना गया था, जिसमें देश की नशा विरोधी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इस बैठक के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि नशे के खिलाफ लड़ाई को एक दीर्घकालिक और सुनियोजित अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया था कि 2029 तक का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए, जिससे इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। गृह मंत्री ने यह भी सुझाव दिया था कि केवल योजना बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन योजनाओं के क्रियान्वयन की समयबद्ध समीक्षा प्रणाली भी विकसित की जानी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की नियमित निगरानी हो सके और परिणामों का आकलन भी समय पर किया जा सके। उन्होंने बैठक में इस बात पर जोर दिया था कि नशीले पदार्थों का खतरा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर सामाजिक संकट है। इसलिए इसके खिलाफ लड़ाई को मिशन मोड में चलाना आवश्यक है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, मजबूत नीति और लगातार निगरानी के माध्यम से ही नशे के खिलाफ इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में इसी रोडमैप के आधार पर सरकार की रणनीति को आगे बढ़ाया जाएगा।
ड्रग्स के खिलाफ मुहिम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशीले पदार्थों की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा न मानते हुए इसे एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताया है। उनके अनुसार यह समस्या सीधे तौर पर देश की सुरक्षा, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है, जिसे व्यापक दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा था कि नशे का यह संकट केवल तस्करी या अवैध व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह “नारको-टेरर” जैसी गंभीर स्थिति से भी जुड़ा हुआ है। यह एक ऐसा नेटवर्क है जो न केवल अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज की नींव को भी कमजोर करने का काम करता है। यह समस्या किसी एक क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। उन्होंने इसे एक प्रकार का सुनियोजित प्रयास बताया था, जिसका उद्देश्य युवाओं को भटकाना और उनके भविष्य को प्रभावित करना है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नशे की लत का सीधा असर युवाओं के स्वास्थ्य, उनकी सोचने की क्षमता और कार्य प्रदर्शन पर पड़ता है। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होता है, बल्कि समाज में अपराध और अस्थिरता भी बढ़ती है। इस चुनौती से निपटने के लिए सभी स्तरों पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। सरकार, समाज और संस्थाओं को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा, ताकि देश की आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य दिया जा सके।










