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Assam में यूसीसी विधेयक पेश, राजनीतिक हलचल तेज

असम विधानसभा में सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने इसे सामाजिक सुधार और महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। हालांकि, विपक्षी दलों ने विधेयक को लेकर सदन में जोरदार हंगामा किया और सरकार पर जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया। राज्य सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने विधानसभा में “द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम बिल 2026” प्रस्तुत किया। सरकार का दावा है कि यह कानून समाज में समानता स्थापित करने, महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने में मदद करेगा। खास बात यह है कि आदिवासी समुदायों को इस कानून से पूरी तरह छूट दी गई है, ताकि उनकी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाज सुरक्षित रह सकें। विपक्षी दलों ने यूसीसी बिल का विरोध करते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून को लागू करने से पहले सभी समुदायों और सामाजिक संगठनों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी। विपक्ष का मानना है कि सरकार बिना पर्याप्त संवाद के इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश कर रही है। विधानसभा में विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। गौरतलब है कि 13 मई को हुई असम कैबिनेट बैठक में यूसीसी के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद सरकार ने घोषणा की थी कि 21 से 26 मई तक चलने वाले विधानसभा सत्र में इसे पेश किया जाएगा। अब 27 मई को इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने और इसके पारित होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे देश की निगाहें अब असम विधानसभा की कार्यवाही और इस ऐतिहासिक विधेयक के भविष्य पर टिकी हुई हैं।

कानून के पांच प्रमुख स्तम्भ

असम सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का प्रारूप राज्य की विशेष जनसांख्यिकीय विविधता और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सरकार के अनुसार यह कानून विभिन्न समुदायों की परंपराओं और सामाजिक संवेदनशीलताओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करेगा। नया विधेयक मुख्य रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति अधिकार जैसे नागरिक समाज से जुड़े पांच महत्वपूर्ण मुद्दों को एक समान और व्यवस्थित कानूनी ढांचे में लाने पर केंद्रित है, ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय मिल सके। राज्य के भीतर बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह कानूनी रोक लगेगी। विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र का एक तय मानक लागू होना। सभी शादियों और तलाकों का सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना अनिवार्य होगा। पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार। बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों यानी लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कड़े नियम और पंजीकरण अनिवार्य।

यूसीसी को लागू करने वाला तीसरा राज्य असम होगा।

यदि यह बिल पारित हो जाता है, तो असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद देश में यूसीसी विधेयक पारित करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। उत्तराखंड ने 2024 में यूसीसी को लागू किया था। वह संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य बना था। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।इस साल जनवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में यूसीसी के एक वर्ष पूर्ण होने पर इसकी सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इस कानून ने महिलाओं को सशक्त किया है और उनकी सुरक्षा को बढ़ाया है। सीएम धामी ने यह भी कहा था कि यूसीसी के प्रति लोगों की सभी शंकाएं और अफवाहें समाप्त हो चुकी हैं। पांच लाख से अधिक मामलों में निजता का उल्लंघन का कोई मामला नहीं आया है। उत्तराखंड सरकार के अनुसार, अब ऑनलाइन तरीके से रिकॉर्ड संख्या में विवाह पंजीकृत हो रहे हैं। मात्र एक वर्ष में 4,74,447 विवाह ऑनलाइन पंजीकृत किए गए हैं। दूसरी ओर, गुजरात विधानसभा ने इसी साल मार्च में महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और समानता प्रदान करने के उद्देश्य से यूसीसी विधेयक पास किया है।

भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति

ये कानून देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने के भारतीय जनता पार्टी के उद्देश्य के अनुरूप हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में मुर्शिदाबाद की सभा में कहा था कि तुष्टिकरण की राजनीति को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए पश्चिम बंगाल में भी यूसीसी लागू किया जाएगा। हाल ही में हुए असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 82 सीटें जीत कर भारी बहुमत प्राप्त किया है। असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन में एनडीए की कुल सीटें 102 तक पहुंच गई हैं।

विपक्ष की तीखी निंदा और राजनीतिक गतिविधियों में बढ़ोतरी

इस विधेयक को लेकर विधानसभा में और उसके बाहर से शुरुआत से ही राजनीतिक उत्तेजना बढ़ी हुई है। सत्ताधारी पक्ष का दावा है कि सरकार ने पहले सत्र में यूसीसी को पेश करके जनता से किया अपना सबसे बड़ा चुनावी वादा पूरा किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और राइजोर दल जैसे विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विपक्ष ने कानून के लाने के समय और इसके सामाजिक प्रभाव के खिलाफ सदन में विरोध दर्ज किया है।

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