Supreme Court of India में शुक्रवार को Mamata Banerjee से जुड़े चर्चित आईपैक मामले पर अहम सुनवाई होने जा रही है। यह मामला Enforcement Directorate (ईडी) द्वारा दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री, तत्कालीन डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। इस सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। ईडी का आरोप है कि जनवरी 2026 में Indian Political Action Committee (आईपैक) के कोलकाता कार्यालय में की गई छापेमारी के दौरान जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया गया। एजेंसी के अनुसार, छापेमारी के समय कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी ने जांच कार्य को प्रभावित करने की कोशिश की। यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के समक्ष होगी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा था कि यदि कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति जांच एजेंसी के काम में हस्तक्षेप करता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। वहीं, ममता बनर्जी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने ईडी की कार्रवाई में कोई बाधा नहीं डाली। उनके अनुसार, वह केवल पार्टी से जुड़े गोपनीय राजनीतिक डेटा और दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां पहुंची थीं। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।

ममता ने कहा- ED की रेड में कोई रोक नहीं डाली गई।
जस्टिस मिश्रा के नेतृत्व वाली बेंच ने मौखिक रूप से कहा, “यह स्वयं में राज्य और केंद्र के बीच कोई विवाद नहीं है।” “यह एक व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य है, जो संयोगवश एक राज्य का मुख्यमंत्री है और जो समूची व्यवस्था और लोकतंत्र को संकट में डाल रहा है.” अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परिसर में उनकी सीमित उपस्थिति केवल तृणमूल कांग्रेस से संबंधित गोपनीय और स्वामित्व डेटा को वापस लेने के लिए थी। हलफनामे में कहा गया है कि जब उन्हें यह जानकारी मिली, तो वे परिसर में गई थीं कि तलाशी के दौरान 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति से संबंधित संवेदनशील राजनीतिक डेटा देखा जा रहा था। हलफनामे में आगे कहा गया कि ईडी के अधिकारियों ने कुछ उपकरण और दस्तावेज लौटाने की इजाजत दी थी और उसके बाद जांच शांतिपूर्वक और व्यवस्थापूर्ण तरीके से जारी रही।