दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को लेकर बड़ी तेल कंपनियों ने अमेरिका को चेतावनी दी है। कंपनियों का कहना है कि अगर इस रास्ते में रुकावट जारी रही तो दुनिया में ईंधन संकट और गहरा सकता है और तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े तनाव और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य हालात के कारण इस समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इसी को लेकर अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों ने सरकार को आगाह किया है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
बताया जा रहा है कि व्हाइट हाउस में हुई बैठकों के दौरान कई बड़ी कंपनियों के प्रमुखों ने अपनी चिंता जाहिर की। इनमें ExxonMobil, Chevron और ConocoPhillips जैसी दिग्गज तेल कंपनियां शामिल हैं। कंपनियों का कहना है कि अगर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर केवल कच्चे तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल, डीजल और अन्य रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाजार में सट्टेबाजी बढ़ी तो तेल की कीमतें और तेजी से ऊपर जा सकती हैं। इससे पेट्रोल और डीजल जैसी चीजें महंगी हो सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
तेल उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाकर इस कमी को पूरा करना आसान नहीं होगा। अनुमान है कि होर्मुज में व्यवधान के कारण रोजाना लगभग 90 लाख से एक करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इस बीच तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। कुछ दिन पहले तक अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 87 डॉलर प्रति बैरल थी, जो बढ़कर लगभग 99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
उधर Donald Trump ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने करीब सात देशों से मदद मांगी है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रखी जा सके। ट्रंप का कहना है कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई देश पश्चिम एशिया के तेल पर काफी निर्भर हैं। उदाहरण के तौर पर चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से प्राप्त करता है। इसलिए इस रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करना कई देशों के लिए बेहद जरूरी है।
दरअसल, Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। हर दिन करीब दो करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। यह दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है।
सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की ढुलाई भी इसी समुद्री मार्ग से होती है। इसलिए अगर यहां थोड़ी देर के लिए भी रुकावट आती है तो उसका असर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और आम लोगों के बजट तक महसूस किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज में तनाव लंबे समय तक बना रहा तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे परिवहन महंगा होगा, उद्योगों की लागत बढ़ेगी और अंततः इसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस संकट का समाधान कैसे निकलता है और क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।










