दक्षिण चीन सागर में रविवार को अमेरिकी नौसेना को दो अलग-अलग हादसों का सामना करना पड़ा। नौसेना का एक एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर और एक एफ/ए-18एफ सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान क्रैश हो गए। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में सभी पायलट और क्रू सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए।
यूएसएस निमित्ज से रूटीन अभियान पर निकले थे दोनों एयरक्राफ्ट
अमेरिकी नौसेना के प्रशांत बेड़े (Pacific Fleet) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में बताया कि हादसे में शामिल दोनों विमान एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज (USS Nimitz) से रविवार दोपहर रूटीन अभियान पर निकले थे।
जानकारी के मुताबिक, पहला हादसा स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 2:45 बजे हुआ, जब “मैरीटाइम स्ट्राइक स्क्वॉड्रन” की बैटल कैट्स टीम द्वारा संचालित सीहॉक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। तीनों क्रू सदस्यों को तुरंत बचा लिया गया।
इसके करीब 30 मिनट बाद, यानी 3:15 बजे, “स्ट्राइक फाइटर स्क्वॉड्रन” की फाइटिंग रेडकॉक्स टीम का एफ/ए-18एफ सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान भी हादसे का शिकार हो गया। विमान के पायलट ने आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
अमेरिकी नौसेना ने कहा कि दोनों हादसों के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। सभी क्रू सदस्यों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।

यूएसएस निमित्ज अपनी तैनाती के अंतिम चरण में है और पश्चिमी तट की ओर लौट रहा है। यह विमानवाहक पोत 26 मार्च को अमेरिका के पश्चिमी तट से रवाना हुआ था, और इसने अधिकतर समय पश्चिम एशिया में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियानों में बिताया।
यह 17 अक्टूबर को दक्षिण चीन सागर में प्रवेश कर गया था।
दक्षिण चीन सागर में बढ़ता तनाव
गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर चीन अपना दावा करता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) पहले ही उसके दावे को खारिज कर चुका है। इसके बावजूद, चीन इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाता जा रहा है।
अमेरिका और चीन के बीच यहां अक्सर नौसैनिक टकराव की स्थिति बनती रहती है, क्योंकि अमेरिका अपने युद्धपोतों और विमानवाहक पोतों के जरिए इस क्षेत्र में “नौवहन की स्वतंत्रता” (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करने का अभियान चलाता है।
अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वार के बीच नई उम्मीद
इधर, आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच रिश्तों में हल्की नरमी दिख रही है। मलेशिया में हाल ही में हुई अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनने की खबर है, जिससे टैरिफ वार के बीच व्यापारिक रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगी है।










